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US-Iran War: Trump ने ‘Project Freedom’ रोका, Iran से डील की उम्मीद बढ़ी

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Trump ने Strait of Hormuz में चल रहे “Project Freedom” को बातचीत के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया है, जबकि ईरान-अमेरिका तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता जारी है।

Last Updated- May 06, 2026 | 9:03 AM IST
US President Donald Trump
Representative image

US-Iran War Updates:अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका की ओर से चलाया जा रहा एक ऑपरेशन फिलहाल कुछ समय के लिए रोक दिया जाएगा। यह कदम Strait of Hormuz से गुजरने वाले उन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए शुरू किया गया था, जो इस समय वहां फंसे हुए हैं।

Trump ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “Project Freedom” नाम का यह मिशन, जिसे Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा था, कुछ समय के लिए स्थगित रहेगा। इसका मकसद यह देखना है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत किसी अंतिम समझौते तक पहुंच सकती है या नहीं।

उन्होंने बताया कि ईरान के साथ एक “पूर्ण और अंतिम समझौते” की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। Trump के अनुसार यह फैसला पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देशों के अनुरोध पर लिया गया है, जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर अमेरिका की जो रोक या पाबंदियां पहले से लागू हैं, वे अभी भी पूरी तरह जारी रहेंगी और उनमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।

हाल ही में US President Donald Trump के बयान ने बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।

Trump ने बातचीत को लेकर किसी भी ठोस प्रगति या चल रही डील की जानकारी नहीं दी। उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि ईरान के साथ किसी नए समझौते पर बात आगे बढ़ रही है या नहीं। उनके बयान पहले के रुख से अलग दिखाई दिए, क्योंकि कुछ दिन पहले तक वे ईरान की ओर से आए प्रस्तावों और बातचीत की धीमी गति पर असंतोष जता रहे थे।

इसी बीच वैश्विक तेल बाजार में भी बड़ा असर देखने को मिला। Brent crude का दाम गिरकर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि West Texas Intermediate (WTI) भी लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के पास ट्रेड करता दिखा। एक दिन पहले ही इसमें करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

अमेरिकी प्रशासन इस पूरे विवाद को शांत करने की कोशिश में लगा हुआ है, क्योंकि बढ़ते तेल दामों से आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पेट्रोलियम कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं तो इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा और इसका राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है, खासकर आगामी midterm elections को ध्यान में रखते हुए।

यह पढ़ें: US-Iran War: होर्मुज में बड़ा बवाल, ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, कहा- हमला किया तो धरती से मिटा देंगे

दूसरी ओर, US Secretary of State Marco Rubio ने White House में मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ आक्रामक सैन्य कार्रवाई फिलहाल खत्म कर दी गई है। अब अमेरिका का ध्यान Strait of Hormuz से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर है।

हालांकि स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। एक दिन की कार्रवाई के बाद एक और cargo vessel पर हमला होने की खबर ने यह साफ कर दिया है कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की अशांति सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने “Project Freedom” को एक मानवीय प्रयास बताया है, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्ग में फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालना और एक अहम जलमार्ग से व्यापारिक वस्तुओं की आवाजाही को फिर से सामान्य करना है। यह रणनीतिक जलमार्ग युद्ध की शुरुआत, यानी फरवरी के अंत से लगभग बंद पड़ा है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।

हालांकि इस अभियान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही है और इसे शिपिंग कंपनियों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में भी खास सफलता नहीं मिली है। कई स्तरों पर समन्वय की कमी के कारण स्थिति और जटिल होती जा रही है।

सोमवार को इस अभियान के दौरान तनाव और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना को ईरान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और छोटे हथियारों से लैस नावों के हमलों का सामना करना पड़ा। ये हमले उस समय हुए जब अमेरिकी झंडे वाले दो जहाजों को स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही थी। इस दौरान United Arab Emirates ने भी दावा किया कि उसने ईरानी क्रूज मिसाइलों को रोक दिया है।

मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बयान के दौरान एक ब्रिटिश निगरानी संगठन ने जानकारी दी कि स्ट्रेट में एक कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है।

यह पढ़ें: शांति की उम्मीद या फिर छिड़ेगी जंग? ईरान ने अमेरिका को भेजा ‘मल्टी-लेयर्ड’ शांति प्रस्ताव; ट्रंप ने दिया जवाब

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस स्थिति के कारण लगभग 1,550 से अधिक वाणिज्यिक जहाज पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं, जिनमें करीब 22,000 नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर बड़ा दबाव बना हुआ है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।

दूसरी ओर Iran पर आरोप है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को बाधित कर रहा है और तेल व गैस की सप्लाई को सीमित कर रहा है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है।

राष्ट्रपति Trump ने यह कदम तीन हफ्ते पहले उठाया था, ताकि ईरान के कच्चे तेल के निर्यात को रोका जा सके और आर्थिक दबाव बढ़ाकर परमाणु समझौते की बातचीत में मजबूती हासिल की जा सके।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव लगातार गहराता जा रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि यह गतिरोध ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है और उसे कुछ नीतिगत समझौतों के लिए मजबूर कर रहा है।

Trump का कहना है कि अमेरिका की तरफ से बनाए जा रहे दबाव की वजह से ईरान पर आर्थिक असर बढ़ रहा है, लेकिन दूसरी तरफ इस स्थिति ने बाजारों में अनिश्चितता भी पैदा कर दी है। निवेशकों और ऊर्जा सेक्टर में इस बात की चिंता है कि यह टकराव कब खत्म होगा, क्योंकि यह संघर्ष करीब नौ हफ्तों से जारी है और इसका कोई साफ समाधान अभी नजर नहीं आ रहा है।

दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका की बातचीत की शर्तों को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है। उनके अनुसार अमेरिका एक तरफ “मैक्सिमम प्रेशर” यानी अधिकतम दबाव की नीति अपना रहा है और दूसरी तरफ उम्मीद कर रहा है कि ईरान बातचीत की मेज पर आकर उसकी शर्तें मान ले, जो व्यवहारिक रूप से असंभव है।

यह बयान उन्होंने इराक के प्रधानमंत्री-नामित Ali al-Zaidi के साथ बातचीत के दौरान दिया, जिसकी जानकारी semi-official Fars news agency ने दी है।

अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत में देरी का एक बड़ा कारण ईरान के भीतर मौजूद निर्णय प्रक्रिया भी है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी Rubio ने बताया कि जब कोई प्रस्ताव भेजा जाता है तो उसका जवाब आने में कई दिन लग जाते हैं। उनके अनुसार यह प्रक्रिया इसलिए धीमी होती है क्योंकि ईरान में फैसले कई स्तरों से गुजरते हैं और अंत में उन्हें Supreme Leader तक पहुंचना होता है।

Rubio ने यह भी कहा कि ईरान की यह जटिल व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन हाल के संघर्ष और नुकसान के बाद यह और भी जटिल हो गई है, जिससे निर्णय लेने में और अधिक समय लग रहा है।

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First Published - May 6, 2026 | 9:03 AM IST

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