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होर्मुज के लिए ट्रंप ने मांगी मदद, ब्रिटेन-जापान-ऑस्ट्रेलिया ने भेजने से मना किए युद्धपोत

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ट्रंप ने कहा कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों को भी इस क्षेत्र में जहाज भेजने चाहिए ताकि यह समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सके।

Last Updated- March 16, 2026 | 12:30 PM IST
Donald Trump
File Image

Strait of Hormuz Crisis: ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कई देश, खासकर वे जो ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक नष्ट हो चुकी है, लेकिन चेतावनी दी कि तेहरान अब भी ड्रोन, बारूदी सुरंगों या छोटी दूरी की मिसाइलों के जरिए जहाजों को निशाना बना सकता है।

ट्रंप ने कहा कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों को भी इस क्षेत्र में जहाज भेजने चाहिए ताकि यह समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के तटीय इलाकों पर कार्रवाई जारी रखेगा।

Strait of Hormuz क्यों अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए हैं या उनसे अनुमति लेने की बात कही है, जिससे यह रास्ता लगभग बाधित हो गया है।

यह पढ़ें: Middle East Crisis: ड्रोन हमले से दहला दुबई, इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद; कई उड़ानें डायवर्ट

 

सहयोगी देशों का इनकार!

ट्रंप की अपील पर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद में कहा कि जापान फिलहाल इस क्षेत्र में नेवी के जहाज भेजने की कोई योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि जापान अभी इस बात पर विचार कर रहा है कि वह कानूनी ढांचे के भीतर स्वतंत्र रूप से क्या कदम उठा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने भी कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे की गंभीरता समझती है, लेकिन वह Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए वहां नौसेना के जहाज नहीं भेजेगी।

ब्रिटेन ने भी युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि ब्रिटिश सरकार इस समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंग हटाने के लिए हवाई माइंसवीपर तैनात करने पर विचार कर रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर का कहना है कि युद्धपोत भेजने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

यह पढ़ें: ट्रंप की अपील: चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन हॉर्मुज की सुरक्षा में आगे आएं

जर्मनी, फ्रांस का क्या है रुख

जर्मनी ने भी संकेत दिया है कि वह इस मिशन में शामिल नहीं होगा। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडेफुल ने कहा कि यूरोप समुद्री मार्गों की सुरक्षा का समर्थन करता है, लेकिन फिलहाल जर्मनी की भागीदारी की कोई आवश्यकता नहीं दिखती। फ्रांस के रक्षा मंत्री ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि फ्रांस होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत नहीं भेजेगा। दिलचस्प यह है कि फिलहाल अमेरिकी नौसेना भी इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सीधे सुरक्षा प्रदान नहीं कर रही है।

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First Published - March 16, 2026 | 12:30 PM IST

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