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US-Iran War: सीजफायर के बीच समंदर में जंग, होर्मुज में दो जहाज निशाने पर, बढ़ा टकराव का खतरा

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि तेल बाजार में भारी उछाल देखा जा रहा है।

Last Updated- April 22, 2026 | 2:50 PM IST
Strait of hormuz West Asia War
Representative image

US-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बुधवार को दो जहाजों पर हमले की घटना सामने आई है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की कोशिशों को झटका लगा है। यह जानकारी ब्रिटेन की सैन्य एजेंसी ने दी है।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है। वहीं, ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने दूसरे जहाज पर हमले की पुष्टि तो की, लेकिन हमलावर की पहचान साफ नहीं की है। हालांकि शक की सुई ईरान की ओर ही जा रही है।

दूसरी घटना में एक कार्गो जहाज ने बताया कि उस पर फायरिंग की गई, जिसके बाद उसे समुद्र में ही रोक दिया गया। इस हमले में जहाज को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

ये दोनों घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं जब हाल ही में अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक कंटेनर जहाज को जब्त किया था और हिंद महासागर में एक तेल टैंकर पर कार्रवाई की थी।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात कहा कि अमेरिका ईरान के साथ जारी सीजफायर को अनिश्चित समय के लिए बढ़ा रहा है। इसका मकसद तेहरान को बातचीत से पहले एक साझा प्रस्ताव तैयार करने का समय देना है।

यह भी पढ़ें | US-Iran War: ईरान पर आर्थिक संकट का बम, ट्रंप बोले रोज 500 मिलियन डॉलर का नुकसान

ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की घोषणा पर ईरान ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप का धन्यवाद किया है और कहा है कि यह फैसला कूटनीतिक कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए समय देगा।

शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान को जिस भरोसे और विश्वास के साथ यह जिम्मेदारी दी गई है, वह उसका सम्मान करते हुए संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा।

दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर जारी नाकेबंदी जारी रखेगा। ईरान ने इस कदम को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है और इसी वजह से वह इस समय इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बुधवार को चेतावनी दी कि वह क्षेत्र में दुश्मनों के बाकी ठिकानों पर और भी करारे हमले करेगी।

उधर, ब्रिटिश सेना से जुड़े यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि पहले 7:55 बजे हुए हमले के दौरान ईरानी गार्ड की नाव ने जहाज को कोई चेतावनी नहीं दी और सीधे फायरिंग कर दी। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है।

वहीं ईरान के नूर न्यूज ने दावा किया है कि फायरिंग तब की गई जब जहाज ने ईरानी सेना की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया था। ईरान की अर्धसरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने इस कार्रवाई को जायज बताते हुए कहा कि यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के नियंत्रण को लागू करने की कार्रवाई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सामान्य समय में दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है, जो फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है।
लेकिन 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात बदल गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को सीमित करना शुरू कर दिया, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।

बुधवार की शुरुआती ट्रेडिंग में ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह युद्ध शुरू होने के दिन की तुलना में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है।

इसी बीच पाकिस्तान इस तनाव को कम करने और बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिशों में जुटा है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालांकि अब तक ईरान ने इस पर औपचारिक सहमति नहीं दी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि तेहरान अपनी टीम भेज सकता है। इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी।

ईरान ने हाल ही में कहा है कि उसे अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच अब भी कई मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, उसके क्षेत्रीय सहयोगी और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति प्रमुख हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संघर्षविराम की अवधि बढ़ाए जाने का स्वागत किया है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच कूटनीति और विश्वास बहाली के लिए जरूरी समय मिल सकता है।

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में 3,375 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। लेबनान में 2,290 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि इजराइल में 23 लोगों की मौत हुई है। खाड़ी देशों में भी एक दर्जन से अधिक लोगों की जान गई है। इसके अलावा क्षेत्र में इजराइली सेना के 15 जवान और अमेरिकी सेना के 13 सदस्य भी मारे गए हैं।

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First Published - April 22, 2026 | 2:50 PM IST

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