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US-Iran War: ईरान में गिराए गए F-15E विमान के क्रू मेंबर को अमेरिका ने बचाया, ट्रंप ने बताया बड़ा ऑपरेशन

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अमेरिका ने ईरान में गिराए गए अपने F-15E विमान के क्रू मेंबर को एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकाल लिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

Last Updated- April 05, 2026 | 2:48 PM IST
'We got him': How US rescued crew member of F-15E jet downed by Iran
एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर मार गिराया गया। (प्रतीकात्मक चित्र / विकिमीडिया कॉमन्स)

US-Iran War: अमेरिका ने ईरान के अंदर गिराए गए अपने F-15E लड़ाकू विमान के एक क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया है। इस मिशन को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक बताया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों में बेहद मुश्किल हालात में यह अभियान पूरा किया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी अब पूरी तरह सुरक्षित हैं और यह देश के लिए गर्व की बात है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बचाए गए अधिकारी एक कर्नल हैं और वे विमान में वेपन सिस्टम स्पेशलिस्ट के तौर पर तैनात थे। विमान गिरने के बाद वे एक दिन से ज्यादा समय तक दुश्मन इलाके में फंसे रहे।

बताया जा रहा है कि पैराशूट के जरिए बाहर निकलने के दौरान उन्हें कुछ चोटें आई थीं, लेकिन अब उनकी हालत ठीक है और जल्द ही वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।

ईरान में F-15E जेट गिराया गया, रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाए गए दोनों जवान

अमेरिका का F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर मार गिराया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया।

विमान में मौजूद दोनों क्रू मेंबर ने समय रहते पैराशूट से छलांग लगा दी थी। शुरुआती समय में दोनों का संपर्क बना रहा। पायलट को कुछ ही घंटों में सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा सदस्य पहाड़ी इलाके में लापता हो गया था।

इस बीच ईरानी सुरक्षाबलों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी उस जवान की तलाश शुरू कर दी, जिससे उसके पकड़े जाने की आशंका बढ़ गई थी।

कैसे हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

लापता जवान को सुरक्षित निकालने का अभियान आसान नहीं था और इसमें एक दिन से ज्यादा समय लगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस मिशन में खुफिया जानकारी, रणनीति और बड़े स्तर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया गया।

बताया गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने एक रणनीति के तहत यह संदेश फैलाया कि जवान पहले ही मिल चुका है, ताकि असली लोकेशन छिपी रहे। इसी दौरान विशेष तकनीक के जरिए उसकी सही स्थिति का पता लगाया गया।

लोकेशन तय होने के बाद तुरंत रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। इसमें स्पेशल फोर्स के जवानों के साथ कई लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए। अमेरिकी विमानों ने इलाके में हवाई हमले कर ईरानी बलों को दूर रखा, जबकि कमांडो टीम ने मौके पर पहुंचकर जवान को सुरक्षित बाहर निकाला।

आखिरकार दोनों क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया।

Donald Trump ने हाल ही में एक बचाव अभियान (rescue operation) को लेकर बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इस ऑपरेशन की पुष्टि की और कहा कि यह अमेरिकी सेना की ताकत को दर्शाता है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इन अभियानों में किसी भी अमेरिकी सैनिक की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। उनके अनुसार, यह इस बात का सबूत है कि अमेरिका ने ईरान के आसमान में मजबूत वर्चस्व और एयर डोमिनेंस हासिल किया है।

इस बीच, Iran और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि कूटनीतिक बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं दिख रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संघर्ष के दौरान ईरान ने कुछ अमेरिकी विमानों को भी मार गिराने का दावा किया है, जिनमें एक A-10 अटैक जेट शामिल है। इससे अमेरिका के पूर्ण हवाई नियंत्रण के दावे पर सवाल उठे हैं।

उधर, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान उनकी शांति योजना को नहीं मानता और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा नहीं खोलता, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ईरान ने ट्रंप की इन धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके बयान को “कमजोर, घबराया हुआ और असंतुलित” बताया है।

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First Published - April 5, 2026 | 2:48 PM IST

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