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West Asia Crisis: वेस्ट एशिया जंग में नया मोड़! यमन की एंट्री से इजरायल पर हमला, लगातार सायरन से दहशत का माहौल

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यमन से पहली बार इजरायल पर मिसाइल हमले के साथ वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ गया।

Last Updated- March 28, 2026 | 12:28 PM IST
missile
Representative Image

वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच शनिवार सुबह यमन की ओर से इजरायल पर पहली बार मिसाइल दागी गई। इजरायल की सेना ने इसकी पुष्टि की है।

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक ईरान और हिज़बुल्लाह की ओर से भी इजरायल पर हमले जारी रहे। इस दौरान बीयर शेबा और इजरायल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास तीसरी बार सायरन बजे, जिससे इलाके में दहशत का माहौल रहा।

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही 2014 से राजधानी सना पर काबिज हैं। हालांकि, इस हमले की जिम्मेदारी उन्होंने अभी तक नहीं ली है।

गौरतलब है कि हूती अब तक इस संघर्ष से दूर थे, क्योंकि उनका सऊदी अरब के साथ पिछले कुछ वर्षों से अस्थायी युद्धविराम चल रहा है। सऊदी अरब ने 2015 में यमन की निर्वासित सरकार के समर्थन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था।

ईरान पर तुरंत हमले की योजना नहीं, अमेरिका ने रखा विकल्प खुला

अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को संकेत दिया है कि फिलहाल ईरान पर जमीनी हमला करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, पश्चिम एशिया में हजारों सैनिकों की तैनाती की जा रही है। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि यह तैनाती कई कारणों से की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इन सैनिकों का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए किया जा सकता है। साथ ही, यह कदम अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत दिखाने और अनिश्चितता बनाए रखने के लिए भी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कभी भी अपना फैसला बदल सकते हैं और हमला करने का विकल्प खुला हुआ है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान को लेकर अमेरिका अपने लक्ष्य बिना जमीनी सेना भेजे भी हासिल कर सकता है। लेकिन सैनिकों की मौजूदगी से राष्ट्रपति के पास कई विकल्प बने रहते हैं।

रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने उद्देश्यों को बिना जमीनी कार्रवाई के भी पूरा कर सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले रखे जाएंगे।

वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि रक्षा विभाग का काम है राष्ट्रपति को हर तरह के विकल्प देना। अधिकारी ने यह भी बताया कि ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अभी किसी भी जगह जमीनी सेना भेजने की योजना नहीं है। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो उसे पहले से ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा।

हाल के दिनों में अमेरिका के रक्षा विभाग ने पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। विभाग ने करीब 5,000 सैनिकों वाली दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स को तैनात किया है। इनमें से पहली यूनिट शनिवार तक पहुंचने वाली है, जबकि दूसरी यूनिट को वहां पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा। इसके अलावा, आर्मी की 82वीं एयरबोर्न डिविजन के करीब 2,000 सैनिकों को भी भेजने का आदेश दिया गया है।

इन तैनातियों के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि डॉनल्ड ट्रंप जमीनी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। संभावित योजनाओं में ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करना, उसके परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लेना या फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास के तटीय इलाकों पर कब्जा करना शामिल हो सकता है।

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First Published - March 28, 2026 | 12:23 PM IST

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