facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

नील कट्याल कौन हैं? ट्रंप के टैरिफ पर ऐतिहासिक फैसले के पीछे का बड़ा नाम

Advertisement

Supreme Court of the United States ने Donald Trump के टैरिफ अधिकारों पर रोक लगाते हुए फैसला दिया, जिसमें भारतीय मूल के वकील Neal Katyal की अहम भूमिका रही।

Last Updated- February 21, 2026 | 1:04 PM IST
Neal Katyal
Neal Katyal

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक अहम फैसले ने देश की व्यापार नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस ऐतिहासिक निर्णय के केंद्र में भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कट्याल रहे, जिन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आयात शुल्कों को अदालत में चुनौती दी थी।

कौन हैं नील कट्याल?

नील कट्याल अमेरिका के जाने-माने संवैधानिक और अपीलीय वकीलों में गिने जाते हैं। उनका जन्म अमेरिका के शिकागो शहर में भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ। उनके माता-पिता पेशे से डॉक्टर और इंजीनियर थे।

उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से सरकार और भारतीय इतिहास विषय में स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की।

कट्याल वर्तमान में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वे अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में लगभग 50 मामलों में बहस की है, जो किसी भी वकील के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान एडमंड जे. रैंडॉल्फ पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें द अमेरिकन लॉयर द्वारा ‘लिटिगेटर ऑफ द ईयर’ का सम्मान भी दिया गया था।

क्या था मामला?

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर आयातित वस्तुओं पर व्यापक शुल्क लगाए थे। उनका तर्क था कि इससे अमेरिकी उद्योग और रोजगार को मजबूती मिलेगी।

हालांकि कई छोटे और मध्यम व्यवसायों का कहना था कि इन शुल्कों से उनके कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसी को लेकर छोटे व्यवसायों के एक समूह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और उनकी ओर से पैरवी की जिम्मेदारी नील कट्याल ने संभाली।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के अनुसार टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार मूल रूप से कांग्रेस के पास है, जब तक कि यह अधिकार स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति को सौंपा न गया हो।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। उनके साथ जस्टिस नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट, सोनिया सोतोमयोर, एलेना केगन और केतनजी ब्राउन जैक्सन भी सहमत रहे।

वहीं जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताई।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की शक्तियां व्यापक हो सकती हैं, लेकिन वे संविधान से ऊपर नहीं हैं। यदि टैरिफ को टैक्स के रूप में देखा जाए, तो उसे लागू करने का अधिकार कांग्रेस के पास ही रहेगा।

नील कट्याल की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद नील कट्याल ने इसे चुनौती देने वाले पक्ष की “पूर्ण और निर्णायक जीत” बताया। उनका कहना था कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक ढांचे की रक्षा से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति शक्तिशाली जरूर है, लेकिन संविधान उससे भी अधिक शक्तिशाली है। उनके अनुसार यह निर्णय शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को मजबूत करता है।

ट्रंप की नई घोषणा

फैसले के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे 10 प्रतिशत का वैश्विक आयात शुल्क लागू करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उन्होंने ओवल ऑफिस से इस संबंध में आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में और जांच के बाद अतिरिक्त शुल्क भी लगाए जा सकते हैं।

क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

यह निर्णय अमेरिकी शासन व्यवस्था में शक्तियों के संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने साफ किया है कि व्यापार और कर नीति जैसे मामलों में अंतिम अधिकार विधायिका के पास है।

भारतीय मूल के वकील नील कट्याल की इस भूमिका ने न केवल कानूनी हलकों में, बल्कि भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा पैदा कर दी है। यह मामला बताता है कि संवैधानिक सीमाएं किसी भी पद या व्यक्ति से बड़ी होती हैं।

Advertisement
First Published - February 21, 2026 | 1:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement