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अमेरिका में लाखों डॉलर का इलाज, चीन में 10 गुना सस्ता! दुनिया क्यों हो रही है हैरान?

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सस्ती और एडवांस कैंसर थेरेपी के लिए चीन का रुख कर रहे विदेशी मरीज

Last Updated- June 11, 2026 | 10:38 AM IST
Cancer Treatment

न्यूजीलैंड के रहने वाले 58 वर्षीय स्टुअर्ट लाई को 2018 में डॉक्टरों ने बता दिया था कि उनके पास जीने के लिए सिर्फ तीन महीने बचे हैं। उन्हें हाई-रिस्क मायलोमा नाम का कैंसर था। कई साल तक कीमोथेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और दूसरी दवाओं से इलाज चलता रहा, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। आखिरकार उनके पास इलाज के बहुत कम विकल्प बचे थे।

चीन में मिला नया जीवन

स्टुअर्ट ने CAR-T थेरेपी के बारे में सुना था, जिसे कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता माना जाता है। लेकिन न्यूजीलैंड में यह इलाज व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध नहीं था। वहीं ऑस्ट्रेलिया में इसका खर्च 5 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 3.5 लाख अमेरिकी डॉलर) से ज्यादा था। इसी दौरान एक दूसरे मरीज ने उन्हें शंघाई के एक अस्पताल के बारे में बताया। सिर्फ 10 दिन की बातचीत के बाद स्टुअर्ट और उनकी पत्नी इलाज के लिए चीन जाने का फैसला कर चुके थे। करीब सात हफ्ते तक क्लीनिकल ट्रायल में शामिल रहने के बाद उनका कैंसर नियंत्रण में आ गया। अस्पताल, इलाज और हवाई यात्रा समेत पूरा खर्च करीब 65 हजार डॉलर आया।

क्यों बढ़ रहा है चीन का आकर्षण?

स्टुअर्ट जैसे कई विदेशी मरीज अब इलाज के लिए चीन का रुख कर रहे हैं। वजह है कि वहां कई आधुनिक इलाज दूसरे देशों की तुलना में काफी सस्ते और जल्दी उपलब्ध हैं। जहां थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और मलेशिया जैसे देश मेडिकल टूरिज्म में कॉस्मेटिक सर्जरी, आईवीएफ और हेल्थ चेकअप के लिए मशहूर हैं, वहीं चीन खुद को एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के केंद्र के रूप में पेश कर रहा है।

क्या है CAR-T थेरेपी?

CAR-T एक खास तरह की इम्यूनोथेरेपी है। इसमें मरीज के खून से टी-सेल निकाले जाते हैं और लैब में उन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खत्म कर सकें। फिर इन बदले हुए सेल्स को वापस मरीज के शरीर में डाला जाता है, जहां वे कैंसर से लड़ते हैं।

अमेरिका के मुकाबले चीन में काफी सस्ता इलाज

अमेरिका में CAR-T थेरेपी की एक डोज का खर्च 3 लाख से 4.75 लाख डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं चीन में यही इलाज करीब 1.5 लाख से 1.8 लाख डॉलर में हो जाता है। कुछ नई थेरेपी तो इससे भी कम कीमत पर लाने की तैयारी है।

रिसर्च और ट्रायल में तेजी से आगे बढ़ रहा चीन

चीन ने 2021 में अपना पहला CAR-T प्रोडक्ट मंजूर किया था। आज उसके पास इस क्षेत्र में सात मंजूरशुदा थेरेपी हैं, जो अमेरिका के बराबर हैं। इतना ही नहीं, CAR-T से जुड़े क्लीनिकल ट्रायल की संख्या के मामले में भी चीन दुनिया में सबसे आगे है।

हाल के वर्षों में चीन ने कई नई मेडिकल तकनीकों में तेजी दिखाई है। 2024 में वहां बच्चों में ल्यूपस के इलाज के लिए नई सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया गया। 2025 में एशिया का पहला पशु-से-मानव किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं इस साल रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों के लिए ब्रेन इम्प्लांट को मंजूरी देने वाला चीन दुनिया का पहला देश बना।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है। विदेशी मरीजों के लिए जानकारी जुटाना आसान नहीं है। भाषा, वीजा और भुगतान जैसी कई दिक्कतें भी सामने आती हैं। इसके अलावा क्लीनिकल ट्रायल में शामिल मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इसी वजह से चीन ने हाल ही में नए नियम लागू किए हैं ताकि मेडिकल रिसर्च और नई तकनीकों पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।

अब दूसरे मरीजों की मदद कर रहे हैं स्टुअर्ट

इलाज के बाद स्टुअर्ट अब अपने परिवार के साथ न्यूजीलैंड के हैमिल्टन शहर में रह रहे हैं। हर महीने उनकी जांच होती है और अभी तक रिपोर्ट स्थिर है। उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ दी है और अब एक स्कूल में पार्ट-टाइम केयरटेकर के तौर पर काम करते हैं। साथ ही चीन में इलाज कराने की सोच रहे दूसरे मरीजों की मदद भी करते हैं। स्टुअर्ट कहते हैं, “यह पूरी तरह इलाज नहीं है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी और मौका मिला, तो मैं दोबारा इलाज के लिए चीन जरूर जाऊंगा।” (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

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First Published - June 11, 2026 | 10:29 AM IST

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