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विश्व बैंक प्रमुख की चेतावनी: ईरान युद्ध के बाद भी मंडरा रहा वैश्विक रोजगार संकट

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अगले 15 वर्षों में 80 करोड़ नौकरियों की कमी का खतरा, विश्व बैंक ने रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे पर फोकस बढ़ाने को कहा।

Last Updated- April 13, 2026 | 2:13 PM IST
World Bank Job Crisis Warning
File Image

World Bank Job Crisis Warning: पश्चिम एशिया का युद्ध इस हफ्ते ग्लोबल फाइनें​शियल डिस्कशन पर हावी रहने वाला है, लेकिन इसके बीच विश्व बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा ने एक गंभीर और दीर्घकालिक संकट की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि आने वाले दशकों में दुनिया एक बड़े रोजगार संकट का सामना कर सकती है, जो करोड़ों लोगों को बेरोजगार छोड़ सकता है।

अजय बंगा ने कहा कि अगले 10 से 15 वर्षों में विकासशील देशों में करीब 1.2 अरब लोग कामकाजी उम्र में पहुंचेंगे, लेकिन मौजूदा आर्थिक रुझानों के अनुसार केवल लगभग 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा हो पाएंगी। इससे करीब 80 करोड़ नौकरियों की बड़ी कमी रह जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पॉलिसी बनाने वाले ईरान जैसे अल्पकालिक संघर्षों में उलझ सकते हैं, जबकि रोजगार से जुड़ी दीर्घकालिक और संरचनात्मक चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

नौकरी, बुनियादी ढांचा और असमानता की बढ़ती चिंता

विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा ने कहा कि सरकारों को तात्कालिक संकटों से निपटने के साथ-साथ दीर्घकालिक प्राथमिकताओं, जैसे रोजगार सृजन, स्वच्छ पानी और बिजली की उपलब्धता पर भी बराबर ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा, “हमें एक साथ कई काम करने होंगे,” और मौजूदा स्थिति को तेज बदलाव वाले ऐसे दौर के रूप में बताया, जो लगातार भू-राजनीतिक झटकों से प्रभावित हो रहा है।

बंगा ने चेतावनी दी कि अगर रोजगार की कमी को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इससे इलीगल इमिग्रेशन और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2025 में दुनिया भर में 11.7 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए।

नीतिगत सुधार और निजी निवेश पर फोकस

विश्व बैंक की डेवलपमेंट कमेटी विकासशील देशों में निवेश का माहौल बेहतर बनाने के लिए कई अहम सुधारों पर काम कर रही है। इनमें कारोबार से जुड़े नियमों को आसान बनाना, भूमि और श्रम कानूनों में सुधार, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना और भ्रष्टाचार कम करना शामिल है।

इसके साथ ही, संस्था सरकारों के साथ मिलकर निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। खास तौर पर उन क्षेत्रों पर जोर दिया जा रहा है, जो वैश्विक व्यापार झटकों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, हेल्थकेयर, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा कि भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा ग्रुप और नाइजीरिया के डांगोटे ग्रुप जैसी कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार कर रही हैं।

पानी और ऊर्जा तक पहुंच प्राथमिकता

रोजगार के साथ-साथ विश्व बैंक बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान दे रहा है। इसका लक्ष्य 1 अरब से अधिक लोगों तक स्वच्छ पानी की सुरक्षित पहुंच और अफ्रीका में करोड़ों लोगों तक बिजली पहुंचाना है।

बंगा ने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अन्य विकास बैंकों और निजी निवेशकों के साथ समन्वित प्रयास जरूरी होंगे, ताकि तत्काल आर्थिक दबावों और दीर्घकालिक चुनौतियों दोनों का समाधान किया जा सके।

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First Published - April 13, 2026 | 2:13 PM IST

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