मधुमेह और वजन घटाने की दवा सेमाग्लूटाइड के कई जेनेरिक संस्करणों के बाजार में दस्तक देने के बाद इसकी प्रतिस्पर्द्धी दवा मौनजारो (टिरजेपेटाइड) की बिक्री मार्च में सुस्त हो गई। बाजार अनुसंधान कंपनी फार्मारैक के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। पिछले महीने सेमाग्लूटाइड के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने के कुछ ही दिनों के भीतर इसके 23 से अधिक संस्करण बाजार में आ गए जिससे मार्च 2026 में इन दवाओं की बिक्री में वृद्धि हुई।
सेमाग्लूटाइड की बिक्री मार्च 2026 में लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 59 करोड़ रुपये हो गई जो फरवरी 2026 में 48 करोड़ रुपये थी। ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड (जीएलपी-1) बाजार में भी इसकी हिस्सेदारी पिछले महीने बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया जो फरवरी में 25 प्रतिशत था।
दूसरी तरफ जीएलपी-1 की कुल बिक्री में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ टिरजेपेटाइड का दबदबा अभी भी कायम है मगर मार्च 2026 में इसकी मासिक बिक्री में15 प्रतिशत की गिरावट आई और यह फरवरी 2026 के 135 करोड़ रुपये से घटकर 114 करोड़ रुपये रह गई। इसका नतीजा यह हुआ कि मौनजारो बनाने वाली कंपनी एली लिली की जीएलपी-1 बाजार में हिस्सेदारी में भारी कमी आई जो फरवरी 2026 के 61 प्रतिशत से गिरकर मार्च में 56 प्रतिशत हो गई।
फार्मारैक की उपाध्यक्ष (वाणिज्यिक) शीतल सपले ने कहा,‘ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के लॉन्च ने जीएलपी-1 बाजार में सेमाग्लूटाइड को और मजबूत बना दिया है। इस अणु के लिए जेनेरिक और नवप्रवर्तक दोनों ही टिरजेपेटाइड की तुलना में कहीं अधिक किफायती हैं।’
हालांकि, जेनेरिक दवाओं की कम कीमत ने सेमाग्लूटाइड खंड में बिक्री मूल्य और इकाई बिक्री के बीच अंतर पैदा कर दिया है क्योंकि जेनेरिक दवाएं 21 मार्च 2026 को ही उतारी थीं इसलिए उन्होंने मार्च में केवल 10 दिनों के लिए ही बिक्री को प्रभावित किया।
सपले ने कहा, ‘हालांकि मार्च के सामान्य रुझान (तीन गुना) से पता चलता है कि एक ओर जहां बेची गई इकाइयों की संख्या में लगभग दो गुना वृद्धि हुई वहीं मूल्य में उसी अनुपात में तेजी नहीं दिखी। इसका मुख्य कारण जेनेरिक दवाओं की कीमतों में भारी कटौती थी।’
सपले ने कहा कि आने वाले दिनों में और अधिक संस्करण आने की उम्मीद है जिससे अप्रैल में भी इस खंड में और वृद्धि होने की संभावना है।
मौनजारो ने वित्त वर्ष 26 में 923 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ भारत में दवा बिक्री में शीर्ष स्थान हासिल किया। वजन कम करने वाली इलाई लिली की दवा मौनजारो (टिरजेपेटाइड) मार्च 2025 में आने के एक वर्ष के भीतर ही 923 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ वित्त वर्ष 2026 में भारत की सबसे अधिक बिकने वाली दवा बन गई।
फार्मारैक के आंकड़ों से पता चला है कि मौनजारो ने लंबे समय से बाजार में अग्रणी रही दवाओं जैसे एसके की संक्रामक रोग रोधी दवा ऑगमेंटिन (जिसकी बिक्री 916 करोड़ रुपये रही) और यूएसवी की मधुमेह-रोधी दवा ग्लाइकोमेट (जिसकी बिक्री 898 करोड़ रुपये रही) को पीछे छोड़ते हुए क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर धकेल दिया।