राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) से पता चलता है कि भारत में मोटापे और मधुमेह का बोझ बढ़ रहा है जो एक चिंता की बात है। मगर राहत की बात यह है कि सर्वेक्षण में स्वास्थ्य बीमा कवरेज, टीकाकरण दर, मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल और बाल पोषण संकेतकों में सुधार होता दिख रहा है। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रहे बदलाव का पता चलता है जो पहले कुपोषण और संचारी रोगों पर केंद्रित थी, मगर अब गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) से जूझ रही है।
देश में मोटापे का बोझ सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक चिंता का विषय बनता जा रहा है। शरीर का अत्यधिक वजन मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर संबंधी जोखिम का एक प्रमुख कारक है। यह खुलासा वजन घटाने के उपचार एवं मेटाबोलिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच हुआ है। पिछले एक साल के दौरान इंजेक्टेबल जीएलपी-1 एगोनिस्ट जैसे मौनजारो, वेगोवी और ओजेम्पिक की बिक्री में 218 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसका कारोबार अप्रैल 2026 तक लगभग 1,736 करोड़ रुपये तक पहुंच गया जो एक साल पहले करीब 545 करोड़ रुपये का था। यह मोटापा और मधुमेह के उपचारों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
एनएफएचएस-5 और एनएफएचएस-6 के बीच महिलाओं और पुरुषों दोनों में मोटापे का प्रसार बढ़ा है। साल 2023-24 में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं के बीच मोटापे की शिकार महिलाओं का हिस्सा बढ़कर 30.7 फीसदी हो गया जो 2019-21 में 24 फीसदी था। पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 फीसदी से बढ़कर 27.3 फीसदी हो गया। इस सर्वेक्षण में 25 किग्रा/मी² या इससे अधिक के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को अधिक वजन या मोटापा परिभाषित किया गया है।
Also Read: सिर्फ सरकारी पैसों के भरोसे नहीं चलेगा काम, घरेलू बचत से ही बदलेगी देश की तस्वीर
मोटापे में वृद्धि के साथ रक्त शर्करा संकेतकों में भी गिरावट आई है जिससे पता चलता है कि देश में मधुमेह का बोझ लगातार बढ़ रहा है। एनएफएचएस-5 के मुकाबले उच्च या बहुत उच्च रक्त शर्करा स्तर वाले या रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए दवा लेने वाले पुरुषों का अनुपात बढ़कर 20.9 फीसदी हो गया जो पहले 15.6 फीसदी था। महिलाओं में यह आंकड़ा 13.5 फीसदी से बढ़कर 17.8 फीसदी हो गया।
ये निष्कर्ष काफी महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत में मधुमेह से पीड़ित दुनिया की एक बड़ी आबादी पहले से ही मौजूद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार आगाह करते रहे हैं कि भविष्य में मोटापा स्वास्थ्य सेवा बोझ का एक प्रमुख कारक बन सकता है।
Also Read: SC का बड़ा फैसला: आदेश सुरक्षित रखने के 3 महीने के भीतर सुनाना होगा निर्णय, देरी पर बदलेगी पीठ
एनएफएचएस-5 के मुकाबले ताजा सर्वेक्षण में उच्च रक्तचाप के संकेतकों में कुछ सुधार दिखा है। मगर जीवनशैली संबंधी बढ़ते जोखिम और एनसीडी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख चिंता के तौर पर उजागर किया गया है। उच्च रक्तचाप या इसे नियंत्रित करने के लिए दवा लेने वाले पुरुषों का हिस्सा 24 फीसदी से घटकर 22.1 फीसदी रह गया जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 21.3 फीसदी से घटकर 19.4 फीसदी रह गया।