देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त खर्च लगातार बढ़ रहा है और घरेलू खर्च में दशक के आधार पर गिरावट आई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 2022-23 के लिए जारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में कुल स्वास्थ्य व्यय का 39.4फीसदी रहा बाहरी खर्च 2022-23 में बढ़कर 43.4फीसदी हो गया।
वहीं, सरकार का अंश 48फीसदी से घटकर 43.7फीसदी रह गया। यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुमानों में ओओपीई में वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार और निजी स्रोतों द्वारा किया गया वर्तमान और पूंजीगत व्यय शामिल है।
कोविड-19 महामारी के बाद पूर्ण रूप से खुलने के पहले साल में ओओपीई में वृद्धि 2022-23 में स्वास्थ्य, निदान और फार्मास्यूटिकल्स की उच्च लागत और मांग का संकेत देती है। हालांकि, 2013-14 में दर्ज किए गए 64.2 फीसदी की तुलना में घरेलू खर्च में दशक के आधार पर गिरावट आई है। यह केंद्र के वित्त वर्ष 2025-26 तक कुल स्वास्थ्य व्यय का 35फीसदी तक ओओपीई कम करने के लक्ष्य के अनुरूप है।