थाईलैंड में वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों में एक ऐसे कोरोनावायरस स्ट्रेन का पता लगाया है, जो इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। यह जानकारी ‘सेल’ जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन में सामने आई है। तोक्यो विश्वविद्यालय सहित अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस शोध के अनुसार थाईलैंड में फैल रहे इस वायरस में विशेष परिस्थितियों में मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने की भी क्षमता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नया वायरस सारबेकोवायरस परिवार से संबंधित है, जिसमें सार्स-कोव-1 और कोविड-19 का कारण बनने वाला सार्स-कोव-2 जैसा उपसमूह भी शामिल हैं। लेकिन, जानवरों में पाए जाने वाले वायरस स्वयं इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नए स्ट्रेन में मानव एसीई2 रिसेप्टर्स से जुड़ने की ताकत हो सकती है। एसीई2 एक प्रोटीन है, जो मानव कोशिकाओं, विशेष रूप से फेफड़ों और आंतों में पाया जाता है और जिसका उपयोग सार्स-कोव-2 मानव शरीर में प्रवेश करने के लिए करता है।
वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि फिलहाल इस वायरस से मानव संक्रमण या सामुदायिक प्रसार का कोई सबूत नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘भले ही अभी इस वायरस से जानवरों से इंसानों में फैलने का खतरा न हो, लेकिन इसकी पुनर्संयोजन प्रकृति, बड़ी संख्या में प्रसार क्षमता, बार-बार रूप बदलने जैसे लक्षण सार्स-कोव-2 से संबंधित कोरोनावायरस में परिवर्तित होने का संकेत देते हैं।’
यह अध्ययन थाईलैंड और आसपास के दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रों में हॉर्सशू चमगादड़ों पर किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि अभी भी वन्यजीवों में वायरस के संक्रमण को लेकर निगरानी की सख्त जरूरत है और कोविड-19 महामारी के बाद विकसित की गई प्रारंभिक जांच प्रणाली बेहद महत्त्वपूर्ण है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि इस वायरस से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि सक्रिय रूप से निगरानी करने से इसके खतरों से निपटने में मदद मिल सकती है। शोध में कहा गया, ‘हॉर्सशू चमगादड़ों में फैल रहे
सरबेकोवायरस और उनकी जैविक विशेषताएं जो हमें पता चली हैं, उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि ये वायरस आसानी से रूप बदल सकते हैं। वे आपस में मौजूद दूसरे मिलते-जुलते वायरसों के साथ मिलकर या अपने अंदर छोटे-छोटे बदलाव (म्यूटेशन) करके नए रूप और गुण विकसित कर लेते हैं।’
भारत में फिलहाल इस वायरस का कोई खतरा दिखाई नहीं देता। डॉक्टरों ने बताया है कि देश में ऐसा कोई मामला अभी सामने नहीं आया है और न ही इस संबंध में सरकार ने कोई दिशानिर्देश जारी किया है। दिल्ली स्थित एक इम्यूनोलॉजिस्ट ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों में एक नया वायरस खोजा है, जो विभिन्न प्रकार के वायरस के फैलने में सहायक बनते हैं, लेकिन यह कोई घबराहट की बात नहीं है । नए स्ट्रेन के प्रति सतर्क रहना हमेशा बेहतर होता है।’