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इबोला के दुर्लभ वायरस ने बढ़ाई पूरी दुनिया की चिंता, WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल

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कांगो और युगांडा में दुर्लभ बुंडीबुग्यो इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप और मौतों के कारण डब्ल्यूएचओ ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है

Last Updated- May 17, 2026 | 10:30 PM IST
WHO
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को रविवार को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दी। यह निर्णय इबोला के कारण 88 लोगों की मौत होने और 300 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज होने के बाद लिया गया है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बंडीबुग्यो वायरस से फैले ये प्रकोप कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। हालांकि, संगठन ने देशों को अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद नहीं करने की सलाह भी दी। इबोला अत्यधिक संक्रामक है और संक्रमित व्यक्ति के थूक, उल्टी, खून या वीर्य के माध्यम से फैल सकता है। यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन यह गंभीर और अक्सर जानलेवा होती है। 

स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मौजूदा प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस से फैला है, जो इबोला का एक दुर्लभ स्वरूप है और इसके उपचार के लिए अभी तक कोई दवा या टीका नहीं है। कांगो और युगांडा में इबोला की 20 से अधिक लहर आ चुकी हैं, लेकिन यह तीसरी बार है जब बुंडीबुग्यो वायरस का प्रकोप फैला है। 

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दो मामलों को छोड़कर बाकी सभी कांगो से हैं। ये दो मामले पड़ोसी देश युगांडा में सामने आए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को पहली बार कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी में बीमारी फैलने की सूचना दी, जो युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमा से सटा है। टेड्रोस ने कहा, ‘फिलहाल इस बात को लेकर काफी अनिश्चितता है कि वास्तव में कितने लोग संक्रमित हैं और यह संक्रमण कितने क्षेत्रों तक फैल चुका है। 

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First Published - May 17, 2026 | 10:30 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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