भारत में महिलाओं की सेहत और खासकर मातृत्व (Maternity) देखभाल को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केयर हेल्थ इंश्योरेंस के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, महिलाएं अब अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रही हैं और अस्पताल में इलाज कराने यानी ‘इंस्टीट्यूशनल केयर’ की तरफ उनका रुझान तेजी से बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि अब देश में करीब 97.3% डिलीवरी अस्पतालों में हो रही हैं। यह दिखाता है कि लोग अब घर पर डिलीवरी कराने के बजाय डॉक्टरों की निगरानी में सेफ्टी को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
केयर हेल्थ इंश्योरेंस की नई रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में वित्त वर्ष 2024-25 से 2025-26 के बीच 37% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे खास बात यह है कि 20 से 40 साल की महिलाएं इस ग्रोथ में सबसे आगे हैं। यही वह उम्र होती है जब महिलाएं करियर और परिवार दोनों की जिम्मेदारियां संभालती हैं, ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस उनके लिए एक जरूरी सुरक्षा कवच बनता जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं का असर अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मैटरनिटी क्लेम में 60% हिस्सेदारी टियर-2 और टियर-3 शहरों की है। इसका मतलब है कि छोटे शहरों में भी लोग अब आधुनिक मेडिकल सुविधाओं का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, बेहतर सुविधाओं के साथ खर्च भी बढ़ा है। पिछले दो साल में मातृत्व से जुड़े क्लेम के खर्च में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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महिलाओं की उम्र को लेकर भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ज्यादा महिलाएं बढ़ती उम्र में मां बनना पसंद कर रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के मैटरनिटी क्लेम की हिस्सेदारी बढ़कर 12% पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि कुल क्लेम राशि का 18% हिस्सा सिर्फ इसी आयु वर्ग पर खर्च हो रहा है। इससे साफ पता चलता है कि ज्यादा उम्र में प्रेगनेंसी के दौरान इलाज और देखभाल पर खर्च भी ज्यादा आता है और मेडिकल जरूरतें भी बढ़ जाती हैं।
मेडिकल तकनीक और इलाज के तरीकों में सुधार की वजह से अब महिलाओं को अस्पताल में पहले के मुकाबले कम दिन रुकना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अब 82% महिलाएं 5 दिन के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाती हैं, जबकि दो साल पहले यह आंकड़ा 75% था। हालांकि, कम समय तक अस्पताल में रहने के बावजूद इलाज का खर्च कम नहीं हुआ है। उल्टा, इलाज की लागत यानी ‘कॉस्ट इंटेंसिटी’ लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि 2024-25 में सी-सेक्शन डिलीवरी का प्रतिशत 27% से ज्यादा रहा, जो यह दिखाता है कि मेडिकल हस्तक्षेप पहले के मुकाबले बढ़ा है।
केयर हेल्थ इंश्योरेंस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर कहते हैं, “महिलाओं की सेहत से जुड़ी इन चुनौतियों के बीच पोषण की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। सार्वजनिक स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक, आज भी हर तीन में से लगभग एक महिला आयरन की कमी से जूझ रही है। इससे साफ है कि अस्पताल और इलाज की सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य और सही पोषण के मामले में अभी काफी काम बाकी है। बदलती जरूरतों और बढ़ते मेडिकल खर्च को देखते हुए महिलाओं को समय-समय पर अपनी बीमा पॉलिसी की तहकीकात करते रहनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सही आर्थिक सुरक्षा मिल सके।”