विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कई स्वास्थ्य रिपोर्टों ने भारत में चुपके से कम उम्र में होने वाली बीमारियों के बढ़ते बोझ के प्रति आगाह किया है। इससे स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि अब हमें केवल बीमार होने पर इलाज कराने के बजाय बीमारियों की रोकथाम पर आधारित स्वास्थ्य सेवा की ओर रुख करने की तत्काल आवश्यकता है।
थायरोकेयर टेक्नॉलजीज ने 2023 से 2025 के बीच किए गए 93 लाख से अधिक एहतियातन स्वास्थ्य जांच के आधार पर जारी अपनी ‘भारत आरोग्य स्कोर’ रिपोर्ट में खुलासा किया है कि 90 फीसदी से अधिक लोगों में कम से कम एक बीमारी के शुरुआती लक्षण मौजूद हैं। बड़ी तादाद में लोग कई तरह के स्वास्थ्य जोखिमों से घिरे हुए हैं जिनकी शुरुआत अक्सर 20 साल की उम्र से ही हो जाती है।
विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य जोखिम शायद ही कभी अकेले पाए जाते हैं। हर 10 में से 8 से अधिक लोगों को कम से कम दो बीमारियों का खतरा है जबकि 10 में से लगभग 2 व्यक्तियों में 5 या इससे अधिक बीमारियों के जोखिम देखे गए हैं। इससे स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते दायरे का पता चलता है।
अपोलो हॉस्पिटल्स की ‘हेल्थ ऑफ द नेशन 2026’ रिपोर्ट करीब 30 लाख स्वास्थ्य जांच पर आधारित है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि हर 3 में से 2 नवयुवक गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के जोखिम में पहले से ही हैं। कामकाजी आबादी में लगभग आधे लोगों में मधुमेह अथवा मधुमेह से पहले के लक्षण (प्री-डायबिटिक) पाए गए हैं जबकि हर 10 में से 8 लोग मोटापे के शिकार हैं।
इन दोनों रिपोर्टों से एक चिंताजनक रुझान का पता चलता है। इससे पता चलता है कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पहले उभरते हैं, वे लंबे समय तक बिना निदान के बने रहते हैं और उनका विस्तार पारंपरिक नैदानिक मानदंडों के बाहर होता जा रहा है।
थायरोकेयर के निष्कर्षों से पता चलता है कि 21 से 40 वर्ष उम्र के लोगों में हृदय रोग और मधुमेह से संबंधित जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि 30 वर्ष की उम्र तक हृदय संबंधी जोखिम दोगुने हो जाते हैं और 40 की उम्र तक मधुमेह का जोखिम दोगुने से भी अधिक हो जाता है।
अपोलो के आंकड़ों से पता चलता है कि 30 वर्ष से कम उम्र के हर 5 में से 1 व्यक्ति पहले से ही प्री-डायबिटिक है जबकि आधे से अधिक लोगों में मोटापा या असामान्य कोलेस्ट्रॉल का स्तर देखा गया है। पोषक तत्वों की कमी और फिटनेस से संबंधित चिंताएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
अपोलो की रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 में से करीब 7 लोगों में विटामिन डी की कमी है और लगभग आधे लोगों में विटामिन बी12 का स्तर कम है। इसके अलावा युवा आबादी में ताकत और लचीलेपन जैसे शारीरिक फिटनेस के संकेतकों में गिरावट देखी जा रही है।
रिपोर्टों में लैंगिक आधार पर खास रुझानों पर भी प्रकाश डाला गया है। थायरोकेयर के अनुसार, महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर पुरुषों की तुलना में लगभग 2.5 गुना कम पाया गया जबकि पुरुषों में लिवर से संबंधित असामान्यताएं अधिक देखी गईं। अपोलो की रिपोर्ट में महिलाओं के बीच एनीमिया बढ़ने और स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण का उल्लेख किया है।
इन रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में बीमारियों का बोझ तेजी से युवा पीढ़ी की ओर बढ़ रहा है जो खराब आहार, तनाव आदि जीवन शैली जीवनशैली संबंधी कारकों से प्रेरित है। लगभग सभी रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जल्द जांच, नियमित निगरानी और समय पर हस्तक्षेप से नतीजों में काफी सुधार हो सकता है। मगर उसमें बताया गया है कि जागरूकता अभी भी कम है और अधिकतर लोग जोखिमों से तब तक अनजान रहते हैं जब तक स्थिति गंभीर न हो जाए।