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युद्ध के बीच उड़ानें हुई प्रभावित, किराए में भारी बढ़ोतरी: ऐसी स्थिति में यात्रियों को क्या करना चाहिए?

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पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया भर में उड़ानें रद्द हो रही हैं और हवाई किराए कई गुना बढ़ गए हैं, जिससे भारतीय यात्रियों का बजट बिगड़ गया है

Last Updated- March 13, 2026 | 7:40 PM IST
ATF Price Stabilisation Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से हवाई किराए आसमान छू रहे हैं और उड़ानें बाधित हो रही हैं। ईस्टर के मौसम में यात्रा करने वाले लोग खासकर परेशान हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, खासकर भारत से, अब काफी महंगी पड़ रही हैं या लोग अपनी यात्रा योजनाएं बदलने पर मजबूर हो रहे हैं।

उड़ानें रद्द होने का बड़ा झटका

न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक प्रभावित इलाकों में 46,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सीरियम के आंकड़ों से पता चलता है कि इस महीने की शुरुआत में ग्लोबल एयरलाइन कैपसिटी में करीब 10 फीसदी की कमी आ गई थी। यह महामारी के बाद एविएशन सेक्टर को सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

किराए क्यों बढ़ रहे हैं?

इसकी मुख्य वजह खाड़ी के बड़े ट्रांजिट हब का बंद होना या बाधित होना है। एशिया और यूरोप के बीच लंबी दूरी की ज्यादातर उड़ानें दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे हवाई अड्डों से गुजरती हैं। रोलैंड बर्गर नाम की कंसल्टेंसी के अनुमान के अनुसार, एशिया-यूरोप की हवाई यात्रा का लगभग एक तिहाई हिस्सा, यानी हर साल करीब 4 करोड़ यात्री, इन खाड़ी हब से होकर जाता है।

अब जब ये रूट प्रभावित हैं तो एयरलाइंस कम उड़ानें चला रही हैं, लेकिन मांग पहले जैसी बनी हुई है। इसी सप्लाई-डिमांड के असंतुलन से किराए तेजी से बढ़ रहे हैं।

ब्लूमबर्ग के गूगल फ्लाइट्स डेटा के विश्लेषण के मुताबिक, सिडनी से लंदन जाने वाले टिकट काफी महंगे हो गए हैं। अप्रैल की शुरुआत में इकोनॉमी रिटर्न टिकट सिर्फ दो हफ्तों में 80% से ज्यादा महंगा हो गया। वहीं, उसी रूट पर बिजनेस क्लास का टिकट करीब 40% बढ़ गया। सिंगापुर से लंदन का इकोनॉमी टिकट पहले के मुकाबले लगभग तीन गुना महंगा हो गया। कुछ मामलों में कैथे पैसिफिक की सिडनी-लंदन रिटर्न टिकट, जिसमें एक सेगमेंट फर्स्ट क्लास था, 28,000 डॉलर तक पहुंच गई।

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ईंधन कीमतों का असर भी पड़ रहा है

भू-राजनीतिक तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, और इसका असर एयरलाइंस पर पड़ रहा है। ईंधन का खर्च एयरलाइंस के कुल खर्च का करीब एक तिहाई तक हो सकता है। एशिया-पैसिफिक की कुछ एयरलाइंस ने पहले ही फ्यूल सरचार्ज लागू कर दिया है, यानी यात्रियों से टिकट की कीमत बढ़ाकर यह खर्च वसूल किया जा रहा है।

भारतीय यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर

भारत इस मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में है, क्योंकि यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के हब से होकर जाता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक, भारत से बाहर जाने वाली उड़ानों में करीब 40% पश्चिम एशिया से होकर जाती हैं। अगर ये रुकावटें बनी रहीं, तो यूरोप या अमेरिका जाने वाले भारतीय यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ सकता है, यात्रा लंबी हो सकती है और टिकट कैंसिल या बदलने का जोखिम बढ़ सकता है।

ट्रैवल कंपनी नोमैड ट्रैवल्स के CEO अजय प्रकाश ने ब्लूमबर्ग को बताया कि किराए “बहुत ज्यादा ऊंचे” हो गए हैं और इसके चलते लोग यात्रा करने से हिचकिचा रहे हैं।

यात्री क्या कर सकते हैं?

  • जल्दी बुकिंग करें: क्षमता कम होने पर किराए और बढ़ते हैं।
  • प्रभावित ट्रांजिट हब से बचें: जहां संभव हो वैकल्पिक रूट चुनें।
  • ट्रैवल इंश्योरेंस लें: कैंसिलेशन या अचानक बदलाव पर मदद मिल सकती है।
  • कई विकल्प रखें: तारीखें या आसपास के एयरपोर्ट बदलने से सस्ता विकल्प मिल सकता है।

फिलहाल ये संघर्ष जारी रहने से वैश्विक यात्रा महंगी बनी हुई है और कई लोग आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा टालने या बदलने पर विचार कर रहे हैं।

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First Published - March 13, 2026 | 7:36 PM IST

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