बुढ़ापे की लाठी कहे जाने वाली ‘अटल पेंशन योजना’ (APY) ने सफलता का एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना से जुड़ने वाले लोगों की संख्या अब 9 करोड़ के पार निकल गई है। भारत के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए यह योजना अब रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरी है। बुधवार को सरकार ने आंकड़े जारी करते वक्त इसकी सराहना करते हुए इसे देश के सामाजिक सुरक्षा ढांचे का एक मजबूत स्तंभ बताया।
साल 2015 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को पेंशन के दायरे में लाना था, जिनके पास EPFO जैसी औपचारिक रिटायरमेंट सुविधाएं नहीं हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर यह योजना एक निश्चित आय की गारंटी देती है, जो इसे निवेश के अन्य विकल्पों से अलग बनाती है।
अटल पेंशन योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘गारंटीड’ होना है। अक्सर रिटायरमेंट फंड या म्यूचुअल फंड जैसे निवेश बाजार के जोखिमों पर टिके होते हैं, लेकिन APY में ऐसा नहीं है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर को 60 साल की उम्र के बाद 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन मिलने का वादा किया जाता है।
खास बात यह है कि अगर स्कीम में जमा फंड पर मिलने वाला रिटर्न उम्मीद से कम रहता है, तो सरकार खुद अपनी तरफ से फंड की कमी को पूरा करती है ताकि पेंशनभोगी को तय रकम मिल सके। वहीं, अगर निवेश पर रिटर्न उम्मीद से बेहतर मिलता है, तो सब्सक्राइबर्स को ज्यादा पेंशन मिलने की संभावना भी बनी रहती है।
यह योजना केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा का भी ध्यान रखती है। यदि योजना लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वही पेंशन राशि उसकी पत्नी या पति को जीवनभर मिलती रहती है। यदि दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो जमा किया गया पूरा मूल धन नॉमिनी को वापस कर दिया जाता है। सुरक्षा की यह तिहरी परत ही इसे भारतीय परिवारों के बीच लोकप्रिय बना रही है।
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इस योजना में आप जितनी जल्दी जुड़ते हैं, आपकी जेब पर बोझ उतना ही कम पड़ता है। 18 से 40 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसका अपना बैंक खाता है, इसमें निवेश शुरू कर सकता है।
उदाहरण के तौर पर देखें तो, यदि कोई 18 साल का युवा 5,000 रुपये की मासिक पेंशन का विकल्प चुनता है, तो उसे 40 साल की उम्र में जुड़ने वाले व्यक्ति के मुकाबले बहुत कम प्रीमियम देना होगा। लंबे समय तक निवेश करने की वजह से कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का फायदा मिलता है और पेंशन का लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाता है। सब्सक्राइबर्स अपनी सुविधा के अनुसार महीने में एक बार, तीन महीने में या छह महीने में किस्तों का भुगतान कर सकते हैं।
जैसे-जैसे यह योजना आगे बढ़ रही है, सरकार ने इसकी पहुंच को उन लोगों तक सीमित कर दिया है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। 1 अक्टूबर 2022 से लागू हुए नए नियमों के मुताबिक, अब इनकम टैक्स भरने वाले लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।
इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार इसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के उन लोगों के लिए एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में देख रही है, जो टैक्स के दायरे से बाहर हैं और जिनके पास बुढ़ापे के लिए कोई दूसरा ठोस इंतजाम नहीं है।
अटल पेंशन योजना इसलिए लोगों को पसंद आती है क्योंकि यह समझने और इस्तेमाल करने में बहुत आसान है। बैंक खाते से पैसे अपने आप कट जाते हैं, इसलिए हर महीने किस्त भरने की टेंशन नहीं रहती। ऊपर से सालाना चार्ज भी बहुत कम, करीब 15 रुपये ही है, इसलिए यह जेब पर भी भारी नहीं पड़ती।
जो लोग दिहाड़ी पर काम करते हैं या छोटा-मोटा कारोबार चलाते हैं, उनके लिए यह योजना पैसे बचाने का एक आसान और नियमित तरीका बन गई है। साथ ही, परिवार के भविष्य और जीवनसाथी की सुरक्षा भी मिलती है, इसलिए यह एक तरह से बीमा जैसा सहारा भी देती है।
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यह लंबी अवधि की योजना है, इसलिए इसमें पैसे निकालने के नियम थोड़े सख्त हैं। पेंशन का फायदा आपको 60 साल के बाद ही मिलता है। अगर कोई इससे पहले योजना छोड़ना चाहता है, तो इसकी इजाजत सिर्फ गंभीर बीमारी या मृत्यु जैसी खास परिस्थितियों में ही मिलती है।
अगर आप बीच में ही बाहर निकलते हैं, तो सरकार का दिया पैसा और उस पर मिला ब्याज वापस नहीं मिलता, सिर्फ आपका खुद का जमा पैसा ही मिलता है। वहीं, अगर 60 साल से पहले सब्सक्राइबर की मौत हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी खाते को जारी रख सकता है और बाद में पेंशन का लाभ ले सकता है।
इतनी खूबियों के बावजूद, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आज की महंगाई को देखते हुए 5,000 रुपये की पेंशन आगे चलकर कम पड़ सकती है। क्योंकि यह रकम महंगाई के हिसाब से बढ़ती नहीं है, इसलिए भविष्य में इसकी असली वैल्यू घट सकती है। ऐसे में अटल पेंशन योजना को अकेला सहारा मानने के बजाय एक बेसिक सिक्योरिटी की तरह देखना ज्यादा समझदारी होगी। फिर भी, जिन लोगों के पास पहले कोई पेंशन सुविधा नहीं थी, उनके लिए यह एक बड़ा सहारा साबित हो रही है।