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Festive Shopping: शॉपिंग से पहले जरूर जानें! NPCI के 5 टिप्स जो रोकेंगे हर ऑनलाइन फ्रॉड

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त्योहारों में ऑफर्स के बीच बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों पर एनपीसीआई की चेतावनी - सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा

Last Updated- October 21, 2025 | 11:16 AM IST
Festive Shopping Frauds

Festive Shopping Frauds: त्योहारों का मौसम आते ही देशभर में खरीदारी और ऑफर्स का दौर शुरू हो जाता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर आकर्षक छूट और ऑफर ग्राहकों को लुभाते हैं। लेकिन इसी समय ठग भी एक्टिव हो जाते हैं और लोगों की जल्दबाजी व भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करते हैं। इस पर चिंता जताते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने डिजिटल पेमेंट करने वालों को सावधान रहने और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है।

क्या नकली वेबसाइट्स से बढ़ रहा है खतरा?

एनपीसीआई के मुताबिक, त्योहारों के दौरान ठग लोग असली वेबसाइट्स और ऐप्स की नकल करके नकली साइट्स बनाते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहक अपनी पर्सनल और बैंकिंग जानकारी डाल देते हैं, जिसे ठग गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग सिर्फ आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का उपयोग करें, किसी ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक न करें और किसी अनजान स्रोत से फाइल डाउनलोड न करें।

क्या हर लिंक पर भरोसा करना सही है?

त्योहारों में कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ऑफर मिलते हैं, लेकिन ठग बाहरी लिंक या नकली यूपीआई आईडी के जरिए पेमेंट कराने की कोशिश करते हैं। एनपीसीआई का कहना है कि भुगतान हमेशा प्लेटफॉर्म के आधिकारिक पेज पर ही पूरा करें और विक्रेता की जानकारी की जांच करें। किसी अनजान लिंक पर पेमेंट करने से आपका पैसा और डेटा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

‘फ्री गिफ्ट’ और ‘कैशबैक’ ऑफर कितने असली हैं?

एनपीसीआई ने चेतावनी दी है कि जो संदेश फ्री गिफ्ट, कैशबैक या वाउचर का लालच देते हैं, वे अक्सर धोखाधड़ी होते हैं। ऐसे संदेश ओटीपी, बैंक अकाउंट डिटेल या छोटे भुगतान की मांग करते हैं। असली ऑफर कभी भी संवेदनशील जानकारी या पैसे नहीं मांगते। किसी भी आकर्षक ऑफर पर विश्वास करने से पहले रुकें, जांचें और फिर निर्णय लें।

ओटीपी मांगने वाला हर कॉल असली नहीं होता

एनपीसीआई का कहना है कि ओटीपी (OTP) केवल उसी लेन-देन के लिए होता है, जिसे यूजर स्वयं शुरू करता है। यदि कोई कॉल या संदेश यह कहे कि ‘आपका भुगतान असफल रहा’ या ‘आपका खाता बंद होने वाला है’ और फिर ओटीपी मांगे, तो समझिए यह धोखाधड़ी का मामला है। बैंक या पेमेंट ऐप कभी भी फोन या एसएमएस पर ओटीपी नहीं मांगते।

जल्दबाजी में फैसले क्यों खतरनाक हैं?

अक्सर ठग जल्दबाजी और डर का माहौल बनाकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। वे कहते हैं कि “ऑफर खत्म होने वाला है” या “खाता बंद हो जाएगा।” ऐसे संदेशों से सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि असली कंपनियां कभी इस तरह के दबाव नहीं डालतीं। एनपीसीआई ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे ‘रुको, सोचो, और फिर करो’ (Stop, Think, Act) का पालन करें।

क्या सावधानी ही असली संपत्ति है?

स्टॉकग्रो के फाउंडर और सीईओ अजय लखोटिया ने भी उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा, “त्योहारों में अच्छे ऑफर जरूर आते हैं, लेकिन इसी समय धोखाधड़ी और बिना सोचे-समझे खर्च भी बढ़ जाते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले जांचें, भरोसेमंद वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें और अपने पैसों की जानकारी सुरक्षित रखें। असली अमीरी समझदारी से खर्च करने में है। सतर्क रहें, समझदारी से खरीदारी करें और जरूरत हो तो निवेश सोच-समझकर करें।”

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First Published - October 21, 2025 | 11:16 AM IST

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