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₹2 लाख से ₹12 लाख तक: 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इनकम टैक्स में अब तक क्या बदला?

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2014 में मोदी सरकार आने के बाद अब तक इनकम टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसका सीधा असर टैक्सपेयर्स पर पड़ा है

Last Updated- January 27, 2026 | 4:52 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनी, तब मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स में राहत को लेकर थी। अब मोदी सरकार के सत्ता में 12 साल होने जा रहे हैं लेकिन हर बार बजट के साथ चर्चा का सबसे अहम मुद्दा इनकम टैक्स रहता है। हर फरवरी की पहली तारीख को लोग टीवी स्क्रीन के सामने बैठकर यह जानने को उत्सुक रहते थे कि इस बार टैक्स स्लैब में बदलाव होगा या नहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ेगा या कोई नया टैक्स सिस्टम सामने आएगा।

इन वर्षों में इनकम टैक्स सिर्फ सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम आदमी की सैलरी, बचत और रोजमर्रा के खर्च से सीधे जुड़ गया। कभी टैक्स की दरों में कटौती हुई, कभी छूट की सीमा बढ़ाई गई, तो कभी टैक्स भरने का पूरा ढांचा ही बदल दिया गया। सरकार की तरफ से लगातार यह कहा गया कि टैक्स सिस्टम को सरल बनाया जा रहा है, ताकि टैक्सपेयर्स को ज्यादा फायदा मिल सके।

2014 से 2025 के बीच इनकम टैक्स में हुए बदलावों ने मिडिल क्लास की जेब पर क्या असर डाला और किस साल कितनी राहत मिली, यही इस पूरी कहानी का सार है।

2014: बेसिक इनकम टैक्स छूट सीमा में पहली बढ़ोतरी

मोदी सरकार ने जुलाई 2014 में अपना पहला आम बजट पेश किया। इस बजट में बेसिक इनकम टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया। वहीं, सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई। यह फैसला मिडिल क्लास और बुजुर्ग टैक्सपेयर्स के लिए शुरुआती राहत के तौर पर देखा गया।

2017: टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव

2017 के बजट में मोदी सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव किया। 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर टैक्स दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया। यह पहली बार था जब सीधे तौर पर नौकरीपेशा वर्ग की टैक्स देनदारी कम करने वाला फैसला लिया गया, जिससे सैलरी क्लास को सीधा फायदा मिला।

2018: स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी

2018 के बजट में मोदी सरकार ने सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की घोषणा की। इसके तहत 40,000 तक की सीधी कटौती का प्रावधान किया गया। इससे पहले यह सुविधा कई सालों से बंद थी। बाद में 2019 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया।

2019: 5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री

2019 के बजट में मोदी सरकार ने मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी। सरकार ने सेक्शन 87A के तहत रिबेट बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया। इससे पहले टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये थी। इस फैसले से करोड़ों टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिला।

Also Read: Budget 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को टैक्स में राहत की उम्मीद, पॉलिसीधारकों को मिल सकता है सीधा फायदा!

2020: न्यू टैक्स रिजीम की एंट्री

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट यानी 2020 में न्यू टैक्स रिजीम पेश की। इस रिजीम में टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया, लेकिन इसके बदले कई छूट और डिडक्शन खत्म कर दिए गए। टैक्सपेयर्स को विकल्प दिया गया कि वे ओल्ड टैक्स रिजीम में रहें या नई रिजीम को अपनाएं।

2023: टैक्स छूट की सीमा 7 लाख रुपये तक बढ़ी

2023 के बजट में न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स-फ्री इनकम की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया। इसके साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाया गया। वहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 बरकरार रखा गया। 

2024: स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये

2024 के बजट में मोदी सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 से बढ़ाकर 75,000 कर दिया। यह फैसला खास तौर पर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा गया, जिससे उनकी टैक्सेबल इनकम और कम हो गई।

2025: 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स राहत

2025 के बजट में मोदी सरकार ने इनकम टैक्स को लेकर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया। नई टैक्स रिजीम के तहत टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई। साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन को इसमें शामिल करने के बाद आम टैक्सपेयर्स के लिए 12.75 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स छूट के दायरे में आ गई।

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First Published - January 27, 2026 | 4:29 PM IST

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