facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारतीयों में ज्यादा रकम वाली हेल्थ कवर की मांग ने पकड़ी रफ्तार, कम प्रीमियम में मिल रही बड़ी सुरक्षा

Advertisement

पॉलिसीबाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार बीमा को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर किए जाने के बाद ज्यादा रकम की बीमा पॉलिसी की मांग तेजी से बढ़ रही है

Last Updated- December 07, 2025 | 8:44 PM IST
Health Insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

लगातार महंगे होते इलाज को देखकर लोग भी उसके लिए पूरी तरह तैयार हो रहे हैं। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय बड़ी रकम का स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं। पॉलिसीबाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार बीमा को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर किए जाने के बाद ज्यादा रकम की बीमा पॉलिसी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस प्लेटफॉर्म पर 13 फीसदी खरीदारों ने 25 लाख रुपये से अधिक बीमा रकम वाली पॉलिसी खरीदी, 45 फीसदी लोगों ने 15 से 25 लाख रुपये की पॉलिसी चुनी, 24 फीसदी लोगों ने 10 से 15 लाख रुपये की पॉलिसी ली और 10 लाख रुपये से कम रकम वाला स्वास्थ्य बीमा चुनने वाले केवल 18 फीसदी लोग थे।

इन बातों का रखें ध्यान

बीमा की रकम इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति किस शहर में रहता है, उसकी उम्र कितनी है, परिवार में कितने लोग हैं और उसे पहले किस तरह की बीमारी हुई हैं। इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग) निहारिका सिंह का कहना है, ‘महानगर में रहने वाले व्यक्ति को 15 लाख रुपये या ज्यादा का बीमा लेना चाहिए और छोटे शहर के व्यक्ति को कम से कम 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराना चाहिए। परिवार में चार सदस्य हों तो 15 लाख रुपये का फैमिली फ्लोटर सही है मगर महानगरों में रहने वालों या बुजुर्गों वाले परिवारों के लिए बीमा की रकम बढ़कर 25 से 50 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।’

बड़े शहरों में इलाज ज्यादा महंगा होता है। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के कारोबार प्रमुख (स्वास्थ्य बीमा) सिद्धार्थ सिंघल कहते हैं, ‘बड़े शहरों में रहने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 लाख रुपये का बीमा कराना चाहिए और मझोले शहर के व्यक्ति को पर्याप्त सुरक्षा के लिए कम से कम 7 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लेना चाहिए।’ जिन लोगों को मधुमेह, हृदयरोग या कैंसर जैसी बीमारियां हैं, उन्हें 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कराना चाहिए। सिंघल की राय है, ‘अपनी जेब से खर्च कम करना है तो ऐसी पॉलिसी चुनें, जिनमें वेटिंग पीरियड कम हो और सब-लिमिट या बहुत अधिक को-पे का प्रावधान नहीं हो।’

जल्द खरीदें पॉलिसी

आपकी उम्र 25 साल के आसपास है तो स्वास्थ्य बीमा खरीदने पर प्रीमियम कम होगा, मंजूरी आसानी से मिल जाएगी और विकल्प भी ज्यादा होंगे। सिंघल समझाते हैं, ‘इससे वेटिंग पीरियड जल्दी खत्म हो जाता है और बाद में मधुमेह या दिल की बीमारी हो जाए तो फौरन बीमा के दायरे में आ जाती है।’

सुरक्षा संग देखें किफायत भी

अगर आप 30 से 50 साल की उम्र में बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो बीमा की रकम अधिक होने पर प्रीमियम का बोझ उठाना आपके लिए आसान होता है। लेकिन 60 साल से ज्यादा उम्र होने पर वही आपको बोझ लग सकता है। इसलिए बेस प्लान लेकर उसमें सुपर टॉप-अप जोड़ने पर आपको वाजिब रकम में ज्यादा बीमा सुरक्षा मिल सकती है। उदाहरण के लिए अगर आप 20 लाख रुपये की बेस पॉलिसी लेकर 80 लाख रुपये का सुपर टॉप-अप कराते हैं तो उसका प्रीमियम 1 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसी के प्रीमयम से बहुत कम होगा।

बेस पॉलिसी+सुपर टॉप अप 

अगर आप अधिक रकम वाली बेस बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो उसमें डिडक्टिबल नहीं होगा, दावे आराम से निपटेंगे, रीन्यूअल भी आसान होगा और आपकी जेब से बहुत कम खर्च होगा। इसमें फीचर भी ज्यादा मिलेंगे। बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप सस्ता पड़ेगा।

डिडक्टिबल वह रकम है जो चुकाने के बाद ही सुपर-टॉप का काम शुरू होता है। बजाज जनरल इंश्योरेंस के हेड (हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम) भास्कर नेरुरकर बताते हैं, ‘डिडक्टिबल उतना ही हो, जितनी आपकी बेस पॉलिसी की बीमा रकम है तो एक्टिवेशन काफी आसान हो जाता है।’

सुपर टॉपअप ज्यादा अच्छा

स्वास्थ्य बीमा में आपको टॉप-अप के बजाय सुपर टॉप-अप चुनना चाहिए। नेरुरकर समझाते हैं, ‘टॉपअप हरेक दावे में डिडक्टिबल के बराबर रकम खर्च होने के बाद ही काम करना शुरू करता है। लेकिन सुपर टॉप-अप में पूरे एक साल के दौरान हुआ खर्च देखा जाता है और जैसे ही यह खर्च डिडक्टिबल से ज्यादा होता है सुपर टॉप-अप काम करना शुरू कर देता है।’

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Advertisement
First Published - December 7, 2025 | 8:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement