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ईरान युद्ध में कहीं डूब न जाए आपका पैसा! संकट के बीच जानें मजबूत पोर्टफोलियो बनाने का मंत्र

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शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है और निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है: अब क्या करें? घबराकर निवेश निकाल लें या मौके का फायदा उठाएं?

Last Updated- March 17, 2026 | 5:35 PM IST
Iran War and portfolio
फोटो: एआई जनरेटेड

जब दुनिया में तनाव बढ़ता है– कहीं युद्ध, कहीं प्रतिबंध, कहीं तेल की कीमतों में उछाल– तो सबसे पहले असर बाजार पर दिखता है। शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है और निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है: अब क्या करें? घबराकर निवेश निकाल लें या मौके का फायदा उठाएं? ऐसे ही अनिश्चित माहौल में निवेशकों के लिए एक स्पष्ट और अनुशासित रणनीति बेहद जरूरी हो जाती है। व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड की नई रिपोर्ट “जब दुनिया खतरनाक महसूस होती है: क्यों आपका पोर्टफोलियो घबराए नहीं” इसी सवाल का जवाब देती है। यह बताती है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन के दौरान बाजार की वोलैटिलिटी से कैसे निपटा जाए– सिर्फ प्रतिक्रिया देकर नहीं, बल्कि एक तय फ्रेमवर्क के साथ।

रिपोर्ट में निवेश को तीन चरणों– संकट से पहले, संकट के दौरान और संकट के बाद– में बांटकर समझाया गया है, ताकि निवेशक भावनाओं में बहने के बजाय एक ठोस और लंबे समय तक काम करने वाली रणनीति पर टिके रह सकें।

संकट से पहले (अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी तय करें)

1. लक्ष्य और जोखिम के हिसाब से निवेश करें: अपने निवेश का बंटवारा (asset allocation) अपने लक्ष्य और जोखिम सहने की क्षमता के हिसाब से तय करें, न कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर। उदाहरण के लिए एक मध्यम जोखिम वाले निवेशक (moderate investor) के लिए 65% इक्विटी, 25% डेट और 10% गोल्ड में निवेश करना बेहतर माना जाता है।

2. रीबैलेंस के लिए तैयार रहें: पहले से तय करें कि कब और कितना रीबैलेंस करना है। आमतौर पर रीबैलेंसिंग की सीमा ±5% रखना बेहतर माना जाता है। जैसे अगर इक्विटी 60% से नीचे चली जाए या 70% से ऊपर चली जाए, तो उसे वापस 65% पर लाएं।

3. पैनिक सेलिंग से बचें: बाजार शांत होने पर यह नियम लिखकर तय करें कि संकट के समय घबराकर बेचने के बजाय आप अपने तय प्लान के अनुसार ही निवेश संभालेंगे।

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संकट के दौरान (अपनी रणनीति पर अमल करें)

1. खबरें देखना बंद करें (या कम से कम बार-बार देखना छोड़ दें): हेडलाइन्स भावनाएं भड़काने के लिए बनाई जाती हैं, न कि निवेश की समझ देने के लिए। लंबे समय के निवेश को संभालने के लिए आपको हर मिनट युद्ध या घटनाओं की अपडेट जानने की जरूरत नहीं होती।

2. अपना एसेट एलोकेशन देखें, रोज के दाम नहीं: महीने में एक बार एसेट एलोकेशन देखना काफी है। क्या कोई एसेट आपकी तय सीमा से नीचे चला गया है? यदि हां, तो एक्शन लें। यदि नहीं, तो कुछ न करें।

3. तय तरीके से रीबैलेंस करें: पहले नए पैसे से कम हिस्सेदारी वाले एसेट खरीदें। जरूरत पड़े तो ज्यादा हिस्सेदारी वाले एसेट बेचकर संतुलन बनाएं। इसे बिना भावनाओं में आए, नियम के अनुसार करें।

4. यह अनुमान लगाने की कोशिश न करें कि संकट कैसे आगे बढ़ेगा: आपको नहीं पता कि हालात कितने बिगड़ेंगे या क्या असर होगा। टीवी पर दिखने वाले एक्सपर्ट्स को भी पूरी जानकारी नहीं होती। आपकी रणनीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें अनुमान लगाने की जरूरत ही न पड़े।

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संकट के बाद (सीखें, पछतावा न करें)

1. नतीजों पर नहीं, अपनी प्रक्रिया पर ध्यान दें: क्या आपने अपने नियम और अनुशासन का पालन किया? अगर हां, तो वही सबसे अहम है। रिटर्न अच्छे आए तो बढ़िया, लेकिन वह दूसरी बात है।

2. बाद में सोचकर पछताने से बचें: “मुझे पहले पता होना चाहिए था” जैसी सोच बेकार है। अगर एक बार सही टाइमिंग हो भी गई, तो हर बार ऐसा नहीं होगा।

3. अपनी स्ट्रैटेजी पर भरोसा और मजबूत करें: हर संकट जिसे आप अनुशासन से संभालते हैं, वह आगे के लिए आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है।

कुल जमा बात यह है कि भू-राजनीतिक संकट के बीच निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं में आकर पैनिक सेलिंग करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय में सबसे सुरक्षित तरीका है अपनी पहले से तय एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर टिके रहना। तेज उतार-चढ़ाव और डराने वाली खबरों के बावजूद लंबी अवधि में रिटर्न पर इसका असर सामान्यतः कम होता है। फंड हाउस का कहना है कि संकट के दौरान भावनाओं में आकर लिए गए निर्णय अक्सर निवेशकों के लिए वास्तविक संकट से ज्यादा नुकसानदेह साबित होते हैं।

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First Published - March 17, 2026 | 5:35 PM IST

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