facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Engineering Talent: इस साल भारत के 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स में से सिर्फ 10% को मिलेगी नौकरी

Advertisement

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की रोजगार क्षमता में कमी, 10 लाख एडवांस्ड स्किल्स वाले इंजीनियर्स की जरूरत

Last Updated- September 16, 2024 | 7:26 PM IST
Engineering Talent

भारत को इंजीनियरिंग टैलेंट के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की संख्या और उनकी रोजगार के लिए काबिलियत के बीच एक बड़ा अंतर है। यह अंतर देश की आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति के लिए एक गंभीर चुनौती बन रहा है।

रोजगार क्षमता की चुनौती:

भारत हर साल लगभग 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स तैयार करता है, लेकिन उनमें से बहुत कम को नौकरी मिलती है। TeamLease की रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स में 60% से अधिक रोजगार योग्य होते हैं, लेकिन केवल 45% ही इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करते हैं। इस वित्तीय वर्ष में 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स में से केवल 10% के ही नौकरी पाने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण इन ग्रेजुएट्स के बीच स्किल्स की कमी बताया जा रहा है।

TeamLease की रिपोर्ट में कहा गया है, “इंजीनियरिंग भारत के विकास की एक मजबूत नींव रही है और यह सबसे पसंदीदा करियर ऑप्शन में से एक है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स होने के बावजूद, उनकी रोजगार क्षमता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।”

NASSCOM ने अनुमान लगाया है कि भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर को अगले 2-3 साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य नई तकनीकों में एडवांस्ड स्किल्स वाले 10 लाख से अधिक इंजीनियर्स की जरूरत होगी। इसके साथ ही, डिजिटल टैलेंट के लिए डिमांड और सप्लाई के बीच का अंतर 2028 तक 25% से बढ़कर 30% तक हो सकता है। AI, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के बढ़ते चलन के कारण यह डिमांड और भी बढ़ रही है।

इंडस्ट्रीज में अब साइबर सिक्योरिटी, आईटी, रोबोटिक्स, और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में विशेष स्किल्स की जरूरत बढ़ रही है। यह साफ है कि पारंपरिक अकेडमिक एजुकेशन अब पर्याप्त नहीं है।

स्किल गैप को कैसे दूर किया जाए?

इस अंतर को कम करने के लिए टेक्निकल एजुकेशन को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ जोड़ना जरूरी है।

TeamLease डिग्री अप्रेंटिसशिप के वाइस प्रेसिडेंट धृति प्रसन्न महंता ने कहा, “अप्रेंटिसशिप इस कमी को भरने में मदद करता है। यह छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ फॉर्मल एजुकेशन देता है, जिससे युवा प्रोफेशनल्स पहले दिन से ही काम के लिए तैयार हो जाते हैं। असली दुनिया का अनुभव और मेंटरशिप उन्हें वो जरूरी स्किल्स सिखाते हैं, जो इंडस्ट्री की बढ़ती डिमांड को पूरा कर सकें।”

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

स्किल गैप: कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के पास वो प्रैक्टिकल स्किल्स और इंडस्ट्री-स्पेसिफिक नॉलेज नहीं होते जो एम्प्लॉयर्स को चाहिए।

बदलता जॉब मार्केट: तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी और उभरते इंडस्ट्रीज ने स्किल्स गैप को और बढ़ा दिया है।

अप्रेंटिसशिप की भूमिका:

अंतर को भरना: अप्रेंटिसशिप अकादमिक लर्निंग को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ जोड़कर स्किल्स गैप को कम करने का समाधान देता है।
इंडस्ट्री-स्पेसिफिक स्किल्स: अप्रेंटिसशिप युवा इंजीनियर्स को वो स्किल्स और अनुभव देता है, जिसकी आज के कॉम्पिटिटिव जॉब मार्केट में जरूरत है।

इंडस्ट्री की डिमांड और भविष्य:

बढ़ती डिमांड: भारत की टेक्नोलॉजी सेक्टर को एडवांस्ड स्किल्स वाले 10 लाख से अधिक इंजीनियर्स की जरूरत होगी।
स्किल्स की कमी: डिजिटल टैलेंट के लिए डिमांड और सप्लाई का अंतर बढ़ रहा है, जिससे इंडस्ट्रीज को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

समाधान की दिशा में कदम:

  • इंजीनियरिंग कोर्सेज को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार अपडेट करना होगा ताकि ग्रेजुएट्स के पास सही स्किल्स हों।
  • अकादमिक संस्थानों और इंडस्ट्रीज के बीच मजबूत साझेदारी से स्किल्स डेवलपमेंट और ज्ञान का आदान-प्रदान हो सकेगा।
  • अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देना और कंपनियों और अप्रेंटिस दोनों के लिए समर्थन प्रदान करना स्किल्स गैप को कम करने में मदद कर सकता है।

Advertisement
First Published - September 16, 2024 | 7:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement