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अब नहीं चलेगी मनमानी! EPFO ने बदले नियम, प्राइवेट PF ट्रस्टों की बढ़ी मुश्किलें

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EPFO ने प्राइवेट PF ट्रस्टों के लिए नए सख्त नियम लागू किए, अब कर्मचारियों को EPFO के बराबर या बेहतर लाभ देना अनिवार्य होगा।

Last Updated- May 12, 2026 | 4:23 PM IST
EPFO
Representative image

Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने निजी या छूट प्राप्त प्रॉविडेंट फंड ट्रस्ट्स के लिए नए नियमों का एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है। इस नए ढांचे के तहत अब प्राइवेट ट्रस्टों को अपने कर्मचारियों को कम से कम EPFO के बराबर या उससे बेहतर लाभ देना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने पर छूट का दर्जा भी रद्द किया जा सकता है।

देशभर में 1,250 से अधिक निजी ट्रस्ट इस दायरे में आते हैं, जो लगभग 32 लाख कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत का प्रबंधन करते हैं। इन ट्रस्टों के पास करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये की राशि जमा है, जो कर्मचारियों की जीवनभर की बचत से जुड़ी है।

क्या है नई SOP और क्यों लाया गया बदलाव

EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) द्वारा मंजूर इस नई SOP का उद्देश्य निजी ट्रस्टों के संचालन में एकरूपता लाना और निगरानी प्रणाली को मजबूत करना है। इस बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya करते हैं।

नई SOP के तहत पहले से मौजूद चार अलग-अलग दिशानिर्देशों और मैनुअल को मिलाकर एक एकीकृत नियमावली तैयार की गई है। इसका उद्देश्य अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है।

निजी ट्रस्टों पर सख्त शर्तें

नए नियमों के अनुसार, किसी भी छूट प्राप्त संस्था को अपने कर्मचारियों को EPFO से कम लाभ देने की अनुमति नहीं होगी। अगर किसी ट्रस्ट में यह पाया जाता है कि लाभ कम है या समान नहीं है, तो उसकी छूट समाप्त की जा सकती है।

इसके अलावा, सभी निष्क्रिय खातों और जिन खातों में KYC अपडेट नहीं है, उनकी राशि और उस पर अर्जित ब्याज को EPFO में ट्रांसफर करना अनिवार्य कर दिया गया है।

ब्याज दरों पर नियंत्रण

नई SOP में ब्याज दरों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अब निजी ट्रस्ट मनमाने ढंग से अधिक ब्याज नहीं दे सकेंगे। अधिकतम सीमा EPFO की ब्याज दर से 2 प्रतिशत अंक ऊपर तय की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में पहले 30 से 34 प्रतिशत तक ब्याज दिए जाने के मामले सामने आए थे, जिसे वित्तीय संतुलन और अंतर-पीढ़ीगत समानता के लिए नियंत्रित करना जरूरी माना गया।

इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक पीढ़ी पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े और फंड स्थिर रूप से संचालित हो।

डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता पर जोर

नई SOP में तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया गया है। अब सभी छूट प्राप्त संस्थाओं को एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करना होगा, जिसके माध्यम से कर्मचारी शिकायत दर्ज कर सकेंगे।

इन शिकायतों को सीधे EPFO के सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी।

इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है, जिसमें छूट लेने, उसे छोड़ने और पुराने फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया भी शामिल है।

अनुपालन और निरीक्षण प्रणाली मजबूत

नई व्यवस्था में निरीक्षण और अनुपालन की प्रक्रिया को भी सरल और प्रभावी बनाया गया है। अब EPFO इन ट्रस्टों पर जोखिम आधारित निगरानी रखेगा, जिससे कमजोर क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा सके।

रिपोर्टिंग और ऑडिट की प्रक्रिया को भी डिजिटल और केंद्रीकृत किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या देरी को रोका जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से न केवल प्रशासनिक बोझ कम होगा, बल्कि संस्थानों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा पर फोकस

नई SOP का सबसे बड़ा उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी कर्मचारी की पेंशन और भविष्य निधि से जुड़ी बचत सुरक्षित रहे और उसे समय पर उचित लाभ मिले।

इसके तहत छूट प्राप्त संस्थाओं को अपने कर्मचारियों को EPFO के बराबर सुविधाएं देना अनिवार्य होगा। अगर कोई ट्रस्ट ऐसा करने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

किन बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा असर

EPFO के अनुसार, कई बड़ी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां इस व्यवस्था के अंतर्गत आती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • Bokaro Steel
  • Jindal Stainless
  • Bharat Petroleum Corporation
  • Hindustan Unilever
  • Hindustan Petroleum Corporation Ltd
  • Raymond Ltd
  • Larsen & Toubro
  • Wipro
  • Reliance Industries
  • BHEL
  • Infosys
  • Indian Oil Corporation
  • NTPC
  • Tata Tea

इन कंपनियों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की PF व्यवस्था पर अब नए नियमों का सीधा प्रभाव पड़ेगा।

आसान अनुपालन और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर जोर

नई SOP को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अनुपालन आसान हो और कंपनियों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव न पड़े। दस्तावेजों की संख्या कम की गई है और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।

सरकार का मानना है कि इससे न केवल कर्मचारियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि कंपनियों को भी स्पष्ट और स्थिर नियमों के तहत काम करने में सुविधा होगी।

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First Published - May 12, 2026 | 4:23 PM IST

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