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गोवा नाइटक्लब हादसे के बाद EPFO की लापरवाही उजागर, कर्मचारियों का PF क्लेम मुश्किल में

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गोवा के नाइटक्लब हादसे के बाद EPFOA ने डिफॉल्टरों की जांच और कर्मचारियों के PF लाभ सुरक्षित करने की कार्रवाई में तेजी लाने की मांग की है

Last Updated- December 14, 2025 | 6:23 PM IST
EPFO
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

गोवा के अर्पोरा में बर्च बाय रोमो लेन नाइट क्लब में बीते 7 दिसंबर को लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली। लेकिन इस हादसे ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी खामियां सामने ला दी हैं।

एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड ऑफिसर्स एसोसिएशन (EPFOA) ने 11 दिसंबर 2025 को सेंट्रल प्रॉविडेंट फंड कमिश्नर रमेश कृष्णमूर्ति को एक चिट्ठी लिखी। इसमें एसोसिएशन ने मांग की है कि फील्ड ऑफिसों को डिफॉल्ट और नियम तोड़ने वालों से निपटने के लिए जरूरी अधिकार और आधुनिक टूल्स दिए जाएं।

चिट्ठी में इस हादसे को सिस्टम की गहरी नाकामी बताया गया है। बता दें कि इस हादसे में मारे गए 25 लोगों में से पांच पर्यटक थे और बाकी 20 क्लब के कर्मचारी थे। क्लब का नाम बीइंग GS हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा LLP है, जिसका EPF कोड GAGOA3635074000 है। यह क्लब अपने कर्मचारियों के लिए EPF का कोई पैसा जमा नहीं कर रहा था।

Also Read: क्या सेल्फ एंप्लॉयड और गिग वर्कर्स को भी EPFO ​​पेंशन और PF कवर मिलेगा? जानें क्या है इसपर अपडेट

इसके अलावा मालिकों से जुड़ा एक दूसरा EPF कोड DLCPM2697829000 है, जहां सिर्फ तीन लोगों के लिए योगदान दिया जा रहा है। लेकिन इन तीनों के नाम मारे गए 20 कर्मचारियों से मेल नहीं खाते। यह मालिक फरार बताया जा रहा है। अब इन कर्मचारियों के परिवारों को प्रॉविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस के फायदे दिलाना स्थानीय EPFO ऑफिस के लिए मुश्किल हो गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि डिफॉल्टरों को पकड़ने और नियम लागू करने में बड़ी कमियां हैं। पुराने तरीके जैसे हेड ऑफिस से डिफॉल्टरों की लिस्ट भेजना, शो कॉज नोटिस जारी करना या फिजिकल इंस्पेक्शन करना, ये सब काफी हद तक बंद कर दिए गए हैं। संशोधित इंस्पेक्शन सिस्टम में बताए आधुनिक टेक्नोलॉजी वाले टूल्स आज तक नहीं दिए गए। 2019 में शुरू हुई ई-इंस्पेक्शन फैसिलिटी अभी भी काम नहीं कर रही।

EPFOA ने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा, “हमें अपनी कंप्लायंस मशीनरी को सक्रिय करना होगा। डिफॉल्टरों को निशाना बनाकर यह मैसेज देना जरूरी है कि नियम तोड़ने की कीमत बहुत भारी पड़ेगी।”

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - December 14, 2025 | 6:00 PM IST

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