लंबे समय से लंबित पड़े लावारिस भविष्य निधि जमा राशि के समाधान के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एक आधार पर आधारित पोर्टल शुरू करने जा रहा है। इससे संगठन के सदस्यों को निष्क्रिय खातों तक पहुंचने और उन्हें फिर से सक्रिय करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि ई-प्राप्ति (ईपीएफ आधार बेस्ड एक्सेस पोर्टल फॉर ट्रैकिंग इनऑपरेटिव अकाउंट्स) पोर्टल उन ग्राहकों के लिए होगा, जिनके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) नहीं है या जिनके पास पुराने, भौतिक रूप से संचालित ईपीएफ खाते हैं।
प्रस्तावित पोर्टल का मकसद सदस्यों को निष्क्रिय या लावारिस पड़ी ईपीएफ राशि से संबंधित लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करना है, जिससे वे स्वतंत्र रूप से पुराने खातों की पहचान कर सकें और उन तक पहुंच सकें।
यह यूएएन से जुड़े न होने वाले पुराने खातों को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित तंत्र प्रदान करने में आधार पर आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग करेगा। मांडविया ने कहा, ‘यह पोर्टल एक सुव्यवस्थित और आधार पर आधारित प्रमाणीकरण की व्यवस्था मुहैया कराएगा। इससे सदस्यों को अपने पुराने ईपीएफ खाते, जिससे यूएएन जुड़ा न हो, तक सुरक्षित रूप से पहुंचने और अपने सदस्य प्रोफाइल को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिलेगी। इसके बाद इसे यूएएन से जोड़कर सक्रिय किया जा सकेगा।’
शुरुआती चरण में इस प्लेटफॉर्म का संचालन मेंबर आईडी पर आधारित व्यवस्था होगा, जिससे सुरक्षित रूप से इसे लागू किया जा सके। उम्मीद की जा रही है कि इससे बड़ी संख्या में सबस्क्राइबरों को तात्कालिक राहत मिल सकेगी, जो अपना पिछला सदस्य आईडी जानते हैं।
श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे द्वारा लोक सभा में दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार 31 मार्च 2024 तक ईपीएफओ के 21.5 लाख निष्क्रिय खाते थे, जिनमें 8,505 करोड़ रुपये जमा है। इस साल संबंधित लाभार्थियों को निष्क्रिय खातों से 2,632 करोड़ रुपये का निपटान किया गया। 2018-19 और 2023-24 के बीच ऐसे खातों में फंसी धनराशि 5 गुना से अधिक बढ़ी है।