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31 मार्च तक टैक्स सुधारने का आखिरी मौका! ITR-U के जरिए ऐसे बचाएं खुद को इनकम टैक्स नोटिस से

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पुरानी टैक्स गलतियों को सुधारने और छूटी हुई कमाई बताने के लिए ITR-U बेहतरीन मौका है। भारी पेनल्टी और कानूनी नोटिस से बचने के लिए आप 31 मार्च तक अपडेटेड रिटर्न भर सकते हैं

Last Updated- March 20, 2026 | 5:00 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

मार्च का आखिरी दौर चल रहा है और टैक्सपेयर्स के लिए ये वक्त किसी अलर्ट से कम नहीं है। अगर आपकी पुरानी ITR में कोई चूक रह गई है, चाहे इनकम छूट गई हो या कोई गलती हो गई हो, तो ITR-U के तहत अभी भी उसे सुधारने का मौका आपके पास है। ITR-U एक ऐसा विकल्प है जो आपको अपनी टैक्स हिस्ट्री को साफ सुथरा करने का दूसरा मौका देता है। CBDT ने यह सुविधा इसलिए दी है ताकि टैक्सपेयर्स अपनी पुरानी गलतियों को ठीक कर सकें और अपनी कमाई को सही से रिपोर्ट कर सकें। लेकिन ध्यान रखें, ये सिर्फ तब काम आएगा जब आपका टैक्स बढ़ने वाला हो। अगर आप रिफंड मांगने या टैक्स कम करना चाहते हैं तो यह आपके काम का नहीं है।

ITR-U क्या है और इसका असली मकसद क्या है?

ITR-U की शुरुआत सेक्शन 139(8A) के तहत हुई थी। पहले ये सिर्फ 24 महीने तक सीमित था, लेकिन बजट 2025 में इसे बढ़ाकर 48 महीने कर दिया गया। मतलब, असेसमेंट ईयर (AY) खत्म होने के 4 साल तक आप अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, AY 2021-22 (FY 2020-21) के लिए आखिरी तारीख 31 मार्च 2026 है। यही वजह है कि अभी टैक्स एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ये ‘आखिरी मौका’ है। AY 2025-26 के लिए तो 31 मार्च 2030 तक का समय है, लेकिन हर साल 31 मार्च पर एक्स्ट्रा टैक्स की दर बढ़ जाती है।

इसका मकसद है कि टैक्सपेयर्स खुद से आगे आएं और गलतियां सुधारें। इससे कोर्ट-कचहरी कम होती है और सरकार को भी सही टैक्स मिलता है। चाहे आपने ओरिजिनल रिटर्न फाइल की हो, बिलेटेड फाइल की हो या रिवाइज्ड, या फिर बिल्कुल नहीं फाइल की हो, सबके लिए ITR-U का दरवाजा खुला है। बस एक शर्त है कि अपडेट करने से आपका कुल टैक्स बढ़ना चाहिए।

Also Read: Income Tax Rules 2026: सैलरी के साथ मिलने वाली सुविधा पर टैक्स! 1 अप्रैल से बदलेंगे नियम, जानें डिटेल

कौन-कौन ITR-U फाइल कर सकता है?

अगर आपसे कोई इनकम छूट गई है, जैसे फ्रीलांस की कमाई, डिविडेंड, कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति या थोड़ा-बहुत ब्याज, तो आप ITR-U के जरिए बाद में भी उसे जोड़ सकते हैं। सिर्फ यही नहीं, अगर आपने गलत इनकम हेड चुन लिया था या गलत टैक्स रेट लगा दिया था, तो उसे भी आसानी से ठीक किया जा सकता है। यहां तक कि पहले दिखाया गया लॉस या डेप्रिशिएशन कम करना भी संभव है।

बजट 2026 के बाद इसमें और राहत मिली है, क्योंकि अब कुछ मामलों में लॉस एडजस्ट करने की भी इजाजत दे दी गई है। लेकिन हर कोई इस सुविधा का फायदा नहीं उठा सकता। अगर ITR-U भरने से आपका टैक्स कम हो रहा है या रिफंड बढ़ रहा है, तो आप इसे इस्तेमाल नहीं कर सकते। निल रिटर्न या लॉस दिखाने के लिए भी ये लागू नहीं होता (कुछ खास मामलों को छोड़कर)।

अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आपके खिलाफ सर्च या सर्वे शुरू कर दिया है, या कोई जांच/प्रोसीडिंग चल रही है, तो भी आपके लिए ITR-U का ऑप्शन बंद हो जाता है। साथ ही, अगर आप एक बार ITR-U फाइल कर चुके हैं, तो उसी असेसमेंट ईयर के लिए दोबारा इसे नहीं भर सकते।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये सुविधा सिर्फ खुद से गलती सुधारने यानी वॉलंटरी डिस्क्लोजर के लिए है। अगर आपने जानबूझकर कोई इनकम छिपाई थी, तो भी अभी मौका है उसे ठीक करने का, वरना बाद में नोटिस आ सकता है और 200% तक पेनल्टी भी लग सकती है।

ITR-U कैसे भरें, कितना एक्स्ट्रा टैक्स लगेगा और प्रोसेस क्या है?

फाइलिंग का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन है। इसके लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें और वहां ‘Updated Return (ITR-U)’ का ऑप्शन चुनें।

फिर अपना असेसमेंट ईयर चुनें, जैसे AY 2025-26। इसके बाद आपको बताना होगा कि आप रिटर्न क्यों अपडेट कर रहे हैं, जैसे कोई इनकम छूट गई थी, गलत हेड चुन लिया था या कोई और वजह। इसके बाद 26AS, AIS और TIS चेक करें और सही इनकम भरें। जो भी अतिरिक्त इनकम है, उसे जोड़कर टैक्स कैलकुलेट करें, उसमें ब्याज और एडिशनल टैक्स जोड़ें और पेमेंट कर दें। आखिर में सबमिट करते ही ITR-V जनरेट हो जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल है कि एक्स्ट्रा खर्च कितना आएगा? यहां सिर्फ टैक्स ही नहीं, ब्याज भी देना होगा, जो सेक्शन 234A, 234B और 234C के तहत लगता है। इसके साथ एडिशनल टैक्स भी जुड़ता है, जो इस बात पर तय होता है कि आप कितनी देर से रिटर्न अपडेट कर रहे हैं।

अगर असेसमेंट ईयर खत्म होने के 12 महीने के अंदर ITR-U फाइल करते हैं, तो 25% एडिशनल टैक्स देना होगा। 24 महीने तक करने पर 50%, 36 महीने तक 60% और 48 महीने तक 70% तक देना पड़ सकता है। यानी जितनी देरी करेंगे, उतना ज्यादा खर्च बढ़ेगा।

उदाहरण के तौर पर, अगर 20,000 रुपये एक्स्ट्रा टैक्स बनता है और 2,000 रुपये ब्याज, तो पहले साल में कुल करीब 27,500 रुपये देने होंगे। इसे ऐसे समझिए कि आपका 20,000 रुपये एक्स्ट्रा टैक्स और 2,000 रुपये ब्याज मिलाकर कुल 22,000 रुपये बनता है। अगर आप पहले 12 महीने के अंदर ITR-U फाइल करते हैं, तो इस पूरे अमाउंट पर 25% एडिशनल टैक्स लगता है, यानी 5,500 रुपये। इस तरह कुल मिलाकर आपको 22,000 + 5,500 = 27,500 रुपये चुकाने पड़ते हैं।

बजट 2026 के बाद एक और बात ध्यान रखें कि अगर आप रीअसेसमेंट के दौरान रिटर्न अपडेट करते हैं, तो उस पर करीब 10% अतिरिक्त चार्ज भी लग सकता है।

फाइलिंग से पहले फॉर्म 26AS और AIS जरूर चेक कर लें, ताकि कोई भी इनकम छूट न जाए। साथ ही TDS क्रेडिट, TCS या एडवांस टैक्स भी क्लेम कर सकते हैं। लेकिन एक बात याद रखें, ITR-U के जरिए रिफंड नहीं मिलता, इसमें सिर्फ अतिरिक्त टैक्स भरने का ही ऑप्शन होता है।

टैक्स एक्सपर्ट द्वारा टैक्सपेयर्स को सलाह दी जा रही है कि मार्च 2026 खत्म होने से पहले जरूरी कदम उठा लें, खासकर उन असेसमेंट ईयर के लिए जहां 31 मार्च 2026 आखिरी तारीख है। देरी करने पर पेनल्टी बढ़ती जाएगी और स्क्रूटनी नोटिस आने का जोखिम भी रहता है। ITR-U भरना भले आसान हो, लेकिन सही जानकारी देना और समय पर पेमेंट करना बेहद जरूरी है। अगर कहीं भी कन्फ्यूजन हो, तो चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेना बेहतर रहेगा, इससे आप अपनी टैक्स फाइलिंग को पूरी तरह साफ और अपडेट रख सकते हैं।

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First Published - March 20, 2026 | 5:00 PM IST

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