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नया वित्त वर्ष, नए बदलाव! 1 अप्रैल से बदल जाएंगे ये बड़े नियम, जानें आपके लिए क्या है खास

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सरकार ने एमएसएमई के लिए टर्नओवर और निवेश मानकों में अहम बदलाव अधिसूचित किए हैं जो एक अप्रैल से प्रभावी होंगे।

Last Updated- March 30, 2025 | 10:40 PM IST
Indian Rupee

एक अप्रैल से वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत होने जा रही है और उसके साथ ही कई प्रमुख वित्तीय और नियामकीय बदलाव भी होंगे। इनमें आय कर स्लैब, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) तथा सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रम (एमएसएमई) के लिए सीमा में इजाफा आदि शामिल हैं जिससे खपत को गति मिलेगी, सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और छोटे उपक्रमों के कारोबारी अवसर बढ़ेंगे।

नई कर व्यवस्था के तहत आय कर के नए स्लैब को संशोधित किया गया है ताकि बुनियादी छूट सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये किया जाए। इसके अलावा धारा 87ए के तहत कर छूट को भी बढ़ाया गया है और मध्य वर्ग के आय करदाताओं पर से बोझ कम किया गया है। नई कर व्यवस्था के तहत आय कर स्लैब में इन बदलावों के साथ एक अप्रैल 2025 से सालाना 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोग 83,200 रुपये की कर बचत कर सकेंगे।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक आय कर में कटौती का असर खर्च के मौसम के जोर पकड़ने पर सामने आएगा। अप्रैल में यह शायद ही नजर आए क्योंकि इस समय मांग में कमी रहती है। उन्होंने कहा, ‘गर्मियों की शुरुआत में एयरकंडिशनर आदि की बिक्री में अस्थायी तेजी आती है लेकिन निरंतर उपभोक्ता व्यय अगस्त के बाद जोर पकड़ता है। कई लोग बड़े खर्च के पहले बचत करना चाहते हैं।’

एग्रो फाउंडेशन के सीईओ चरण सिंह मानते हैं कि आम बजट में घोषित आयकर राहत के कारण अप्रैल से खपत व्यय बढ़ना चाहिए क्योंकि लोग अनुमानित कर लाभ को ध्यान में रखेंगे। इसके अलावा नकदी की बेहतर स्थिति और कम ब्याज दरों से भी टिकाऊ और गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री को गति मिलनी चाहिए। इसके परिणामस्वरूप अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से खपत व्यय बढ़ सकता है।

एकीकृत पेंशन योजना को केंद्र सरकार ने गत वर्ष अगस्त में मंजूरी दी थी और इसका क्रियान्वयन एक अप्रैल् से किया जाएगा। इसके तहत न्यूनतम 25 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले लोगों को सेवानिवृत्ति के पहले के 12 महीनों के औसत बेसिक वेतन के आधे के बराबर पेंशन दी जाएगी।

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकार (पीएफआरडीए) राष्ट्रीय पेंशन योजना के सदस्यों के लिए एकीकृत पेंशन योजना के क्रियान्वयन पर काम कर रहा है। इसमें नए शामिल होने वाले तथा सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी शामिल हैं। जिन लोगों के जीवनसाथ जीवित नहीं हैं वे भी इसके पात्र होंगे। एक चिंता यह भी है कि संभव है यह योजना आरंभ में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आकर्षित करे क्योंकि दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कुछ ही राज्य इसमें रुचि ले रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक एकीकृत पेंशन योजना में शामिल होने के बाद कर्मचारियों को बाहर निकलने का विकल्प नहीं दिया गया है जो चिंता का विषय है। इससे उनके मन में संदेह पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आवेदन प्रक्रिया में ही तीन महीने से अधिक समय लग सकता है।

सरकार ने एमएसएमई के लिए टर्नओवर और निवेश मानकों में अहम बदलाव अधिसूचित किए हैं जो एक अप्रैल से प्रभावी होंगे।

उदाहरण के लिए सूक्ष्म उपक्रमों के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा को एक करोड़ रुपये और पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह मझोले उपक्रमों की सीमा को 50 करोड़ और 125 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो ऐंड स्माल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज के महासचिव अनिल भारद्वाज के अनुसार यह संशोधन एमएसएमई को सरकारी खरीद में लंबे समय तक लाभान्वित करेगा और प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण और ऋण गारंटी कवर में मदद करेगा।

बहरहाल, इंडिया एसएमई फोरम के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने कहा, ‘परिभाषा में बदलाव सरकार द्वारा उठाया गया एक स्वाभाविक कदम है जिसके जरिये वह भारतीय एसएमई की परिभाषा को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना चाहती है। कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट व्यवस्था तथा अन्य कारोबारी गतिरोधों के बीच यह आवश्यक है कि हम अपने एमएसएमई निर्यातकों को विकसित देशों जैसा ही संरक्षण मुहैया कराएं।’

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First Published - March 30, 2025 | 10:40 PM IST

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