आजकल जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो लोग सबसे पहले गोल्ड लोन की तरफ मुड़ रहे हैं। RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 128 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह सिर्फ 2.06 लाख करोड़ रुपये था। यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों, गांवों और आम परिवारों तक फैल रहा है। लोग इसे इमरजेंसी का सबसे भरोसेमंद सहारा मान रहे हैं।
पिछले साल सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे अब उसी जेवर या फिर सोने पर पहले से ज्यादा लोन मिल जा रहा है। लोग सोना बेचे बिना ही तुरंत पैसा जुटा पा रहे हैं। गोल्ड लोन की तेज प्रक्रिया, कम कागजी काम और गारंटी के तौर पर सोना होने की वजह से यह किसी दूसरे लोन के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद लगता है।
Nitstone Finserv के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सेंथिल कुमार आर कहते हैं, “अनिश्चित हालात में लोग ऐसे विकल्प चुनते हैं जहां जल्दी पैसा मिल जाए और लंबी प्रक्रिया में न उलझना पड़े। भारत में सोना लगभग हर घर में होता है, इसलिए गोल्ड लोन के जरिए बिना लंबे निवेश को छेड़े तुरंत नकदी मिल जाती है। साथ ही, इसकी वैल्यूएशन प्रक्रिया साफ होती है और जोखिम भी कम होता है, जिससे यह भरोसेमंद विकल्प बनता है।”
सेंथिल कहते हैं कि पहले गोल्ड लोन को लोग आखिरी विकल्प मानते थे, लेकिन अब यह आम इस्तेमाल का फाइनेंशियल टूल बन गया है। इसमें जल्दी पैसा मिल जाता है और प्रक्रिया भी आसान होती है, जहां मुख्य तौर पर सोने की शुद्धता जांची जाती है। दिसंबर 2025 की तिमाही में गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। छोटे व्यापारी, किसान और परिवार अब मेडिकल इमरजेंसी, पढ़ाई या छोटे कारोबार के कामों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
सेंथिल कहते हैं, “गोल्ड लोन की आसान प्रक्रिया, तय शर्तें और बिना गारंटी वाले कर्ज के मुकाबले कम जोखिम इसे एक व्यावहारिक और भरोसेमंद विकल्प बनाते हैं।”
पर्सनल लोन का इस्तेमाल भी अब बदल रहा है। पहले इसे सिर्फ मुश्किल समय का सहारा माना जाता था, लेकिन अब लोग इसे पढ़ाई, यात्रा या कम समय के पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए सोच-समझकर लेते हैं। डिजिटल अप्रूवल और आसान पेमेंट विकल्पों ने इसे और सहज बना दिया है। हालांकि, गोल्ड लोन के मुकाबले इसमें ब्याज ज्यादा हो सकता है और प्रक्रिया भी थोड़ी लंबी रहती है।
सेंथिल के अनुसार, पर्सनल लोन अब मजबूरी से निकलकर एक प्लान्ड फाइनेंशियल टूल बन गया है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह बिना बचत या लंबे निवेश को प्रभावित किए नकदी की जरूरत को संभालने में मदद करता है।
सोने की ऊंची कीमतें, महंगाई का दबाव और बिना गारंटी वाले लोन में सख्ती ने गोल्ड लोन की मांग बढ़ाई है। RBI भी इस सेगमेंट पर नजर बनाए हुए है, लेकिन LTV (Loan to Value) रेशियो सीमित होने से सिस्टम पर बड़ा जोखिम कम माना जाता है। सेंथिल का मानना है कि आने वाले समय में इसमें अच्छी बढ़ोतरी जारी रह सकती है, हालांकि अगर सोने की कीमतें स्थिर रहती हैं तो रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। इसलिए फायदा उठाने से पहले थोड़ा सावधानी बरतना भी जरूरी है।
गोल्ड लोन लेना आसान है, लेकिन एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इसे लेने से पहले ब्याज दर और उसे चुकाने की अपनी क्षमता जरूर देख लें, ताकि सोना खोने का जोखिम न हो। अब शहर से लेकर गांव तक, युवा से लेकर मध्यम उम्र के लोग भी इसे एक समझदार विकल्प मानने लगे हैं।
कुल मिलाकर, एक्सपर्ट मानते हैं कि गोल्ड लोन अब सिर्फ इमरजेंसी का सहारा नहीं रहा, बल्कि एक भरोसेमंद फाइनेंशियल साथी बन गया है। सोने की बढ़ती कीमतें, तेज प्रक्रिया और कम जोखिम ने मिलकर इसे आम लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया है, और आगे भी इसका चलन मजबूत रहने की उम्मीद है।