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1 साल में 27% की बढ़ोतरी! बढ़ती मेडिकल लागत के बीच हेल्थ कवर को लेकर लोगों की सोच कैसे बदल रही है?

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भारत में बढ़ती मेडिकल लागत के बीच लोग हेल्थ इंश्योरेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां अब डिजिटल रिन्यूअल प्रिवेंटिव केयर और अधिक कवरेज को जमकर अपनाया जा रहा है

Last Updated- December 29, 2025 | 4:08 PM IST
Health Insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इलाज अब सिर्फ बीमारी आने के बाद की बात नहीं रह गई है। बढ़ती मेडिकल लागत, बदलती जीवनशैली और अचानक आने वाले स्वास्थ्य खर्च ने लोगों की सोच बदल दी है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि बीमा लेना है या नहीं, बल्कि यह हो गया है कि सही समय पर और सही कवरेज के साथ बीमा कैसे लिया जाए।

अब लोग पहले से ज्यादा सतर्क और जागरूक नजर आ रहे हैं। वे सिर्फ अस्पताल के बिल से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं। मोबाइल ऐप पर पॉलिसी देखना, ऑनलाइन रिन्यूअल करना और वेलनेस फीचर्स का इस्तेमाल करना अब आम होता जा रहा है।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस की 2025 की सलाना ट्रेंड्स रिपोर्ट इसी बदलती सोच की तस्वीर पेश करती है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत में हेल्थ इंश्योरेंस धीरे-धीरे एक मजबूरी नहीं, बल्कि समझदारी भरा फैसला बनता जा रहा है।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अंडरराइटिंग ईयर (UY) 2023–24 से 2024–25 के बीच इंश्योरेंस लेने वाले मेंबर्स की संख्या में 27 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी इस बात का साफ संकेत है कि बढ़ते इलाज खर्च के कारण लोग अब बड़े हेल्थ कवर की जरूरत को समझने लगे हैं।

बच्चों से लेकर सीनियर सिटीजन तक बढ़ा कवरेज

रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग उम्र के लोगों में हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने का तरीका भी बदल रहा है। सभी आयु वर्गों में औसत सम इंश्योर्ड (Sum Insured) में सालाना बढ़ोतरी देखने को मिली है।

खास बात यह है कि 0 से 17 साल के बच्चों के लिए औसत सम इंश्योर्ड में 2024–25 से 2025–26 के बीच 7 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार अब बच्चों के लिए ज्यादा कवरेज लेना चाहते हैं।

वहीं 18 से 35 साल के पहली बार इंश्योरेंस खरीदने वाले युवा अब भी कुल पॉलिसीधारकों का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं। 2025–26 में इनकी हिस्सेदारी 30 फीसदी से ज्यादा रही। इसके अलावा, 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजन की भागीदारी भी बढ़कर लगभग 14 फीसदी तक पहुंच गई है, जो बुजुर्गों के बीच बढ़ती जागरूकता को दिखाता है।

बीमारियों के पैटर्न भी हो रहा बदलाव

रिपोर्ट में जिन बीमारियों पर सबसे ज्यादा क्लेम सेटल किए गए, वे भी बदलती स्वास्थ्य चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं। डेंगू, मलेरिया और कॉमन फ्लू जैसी बीमारियों के साथ-साथ सांस से जुड़ी दिक्कतें, दिल की बीमारियां, कैंसर और आर्थराइटिस जैसे रोगों के मामले बढ़ रहे हैं।

Also Read: छंटनी का झटका और बीमा की चिंता: नौकरी जाते ही आपके हेल्थ इंश्योरेंस का क्या होता है? एक्सपर्ट से समझें

खास तौर पर कार्डियक और कैंसर से जुड़े हाई-वैल्यू क्लेम यह दिखाते हैं कि इलाज अब ज्यादा मुश्किल और महंगा होता जा रहा है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस की अहमियत और बढ़ जाती है, खासकर बुजुर्गों और लाइफस्टाइल बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म बने पहली पसंद

हेल्थ इंश्योरेंस को मैनेज करने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल रिन्यूअल और ऐप आधारित सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में वेबसाइट पर हाई पर्चेज इंटेंट के साथ आने वाले विजिट्स की संख्या पिछले तीन सालों में दो गुना से ज्यादा हो गई है।

इसके अलावा, मोबाइल ऐप पर स्टेप ट्रैकिंग फीचर का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में 2.5 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उन्हें रिन्यूअल प्रीमियम पर छूट मिलती है।

ऑनलाइन रिन्यूअल अब सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। लगभग 10 फीसदी ज्यादा ग्राहक अब डिजिटल तरीके से रिन्यूअल प्रीमियम चुका रहे हैं। वहीं, पिछले एक साल में करीब 30 फीसदी ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए क्लेम फाइल कर चुके हैं, जबकि 15 फीसदी से ज्यादा रिन्यूअल ऐप के माध्यम से हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब लोग सिर्फ बेसिक पॉलिसी नहीं, बल्कि टॉप-अप कवरेज, OPD बेनिफिट्स, वेलनेस प्रोग्राम, टेली-कंसल्टेशन, होम केयर और कैशलेस अस्पताल नेटवर्क जैसे फीचर्स को भी ध्यान में रखकर भी हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रहे हैं।

प्रिवेंटिव केयर और वेलनेस पर बढ़ता फोकस

केयर हेल्थ इंश्योरेंस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मनीष डोडेजा का कहना है कि रिपोर्ट साफ दिखाती है कि लोग अब प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और लाइफस्टाइल केयर को प्राथमिकता दे रहे हैं। कंपनी टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है ताकि हेल्थ इंश्योरेंस को समझना आसान हो और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से सेवाएं दी जा सकें।

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First Published - December 29, 2025 | 4:07 PM IST

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