आजकल हॉस्पिटल का खर्च जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखकर डर लगना जायज है। इलाज का खर्च हर साल 14% से 15% की रफ्तार से महंगा हो रहा है। ऐसे में हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक ‘हेल्थ इंश्योरेंस’ ले लिया तो काम हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बड़ी बीमारी या हॉस्पिटल में भर्ती होने के अलावा भी सेहत पर कई ऐसे खर्च होते हैं जो इंश्योरेंस कवर नहीं करता? यही कारण है कि अच्छी सेहत के लिए सिर्फ इंश्योरेंस ही नहीं, बल्कि एक अलग बचत (सेविंग्स) का होना भी बहुत जरूरी है।
हेल्थ इंश्योरेंस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आप अचानक हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं या कोई बड़ा ऑपरेशन होता है, तो वह आपको लाखों के बिल से बचा लेता है। लेकिन, हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले और बाद के कई खर्च ऐसे होते हैं जिन्हें इंश्योरेंस कंपनियां पूरी तरह कवर नहीं करतीं।
जैसे कि घर पर चलने वाली दवाएं, समय-समय पर होने वाले ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या डॉक्टर की फीस। कई बार पुरानी बीमारियों का कवर सालों बाद शुरू होता है। अगर आपके पास कोई अलग से बचत नहीं है, तो ये छोटे-छोटे दिखने वाले खर्च आपके महीने का बजट बिगाड़ सकते हैं।
आजकल ‘प्रिवेंटिव केयर’ यानी बीमारी को होने से पहले रोकने पर काफी जोर दिया जा रहा है। इसमें सालाना हेल्थ चेकअप, सही डाइट और रेगुलर टेस्ट आदि शामिल हैं। ज्यादातर इंश्योरेंस पॉलिसी इन चीजों का खर्च नहीं उठातीं। इसके अलावा, लंबी बीमारियों (जैसे फिजियोथेरेपी या घर पर देखभाल) के लिए भी इंश्योरेंस नाकाफी साबित होता है।
इसी मुद्दे पर Staywell.Health के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति का कहते हैं, “महंगी दवाओं और इमरजेंसी के लिए इंश्योरेंस सबसे जरूरी है, लेकिन बार-बार होने वाले छोटे खर्च, बीमारियों से बचाव (प्रिवेंटिव केयर) या लंबे समय तक चलने वाले इलाज के लिए सिर्फ इंश्योरेंस काफी नहीं है।”
वे आगे समझाते हैं, “इमरजेंसी में तो इंश्योरेंस काम आता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म देखभाल के खर्चों को संभालने के लिए हमें एक दूसरे रास्ते की जरूरत होती है। इसलिए, लोगों को व्यवस्थित बचत (स्ट्रक्चर्ड सेविंग) का सहारा लेना चाहिए। इंश्योरेंस और बचत मिलकर एक ऐसी तैयारी करते हैं जिससे हम किसी भी बीमारी के लिए पूरी तरह तैयार रह सकते हैं।”
रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। उस समय प्रीमियम की दरें भी आसमान छू रही होती हैं। अगर आपने समय रहते एक ‘हेल्थ फंड’ नहीं बनाया है, तो बुढ़ापे में अपनी जमा-पूंजी को बचाना मुश्किल हो सकता है।
आंकड़े बताते हैं कि कई परिवार अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी के कारण अपनी बरसों की बचत गंवा देते हैं। अगर आप इंश्योरेंस के साथ-साथ म्यूचुअल फंड या किसी दूसरी स्कीम में सेहत के नाम पर छोटी-छोटी बचत करते हैं, तो भविष्य में बढ़ती महंगाई का मुकाबला आसानी से कर सकते हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, हेल्थ के लिए सबसे सही प्लानिंग है ‘संतुलन’। आपके पास एक अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी तो होनी ही चाहिए, लेकिन उसके साथ एक ऐसा फंड भी हो जिसे आप OPD, दवाइयों और रुटीन चेकअप के लिए इस्तेमाल कर सकें। जब आप इंश्योरेंस की सुरक्षा और अपनी बचत की ताकत को एक साथ जोड़ देते हैं, तो आप न केवल बड़ी बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार होते हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुरक्षित रखते हैं।