Home Loan: मकान खरीदना हर मिडिल क्लास परिवार का सपना होता है, लेकिन बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के चलते अधिकतर लोग होम लोन का सहारा लेते हैं। अगर कोई व्यक्ति ₹50 लाख का होम लोन लेता है, तो उसकी मासिक EMI आमतौर पर लोन अवधि और ब्याज दर पर निर्भर करती है। लोन लेते समय ज्यादातर लोग केवल EMI और ब्याज दर पर ध्यान देते हैं, लेकिन असल खर्च इससे कहीं ज्यादा होता है। बैंक कई तरह के अतिरिक्त चार्ज भी वसूलते हैं जो कुल लोन लागत को बढ़ा देते हैं। ऐसे में जब भी होम लोन के लिए आवेदन करें, बैंक ने हिडेन चार्जेज यानी छिपे हुए खर्चों के बारे में भी जान लेना चाहिए।
जैसेकि, अगर बैंक 8.5% सालाना ब्याज दर पर 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन देता है, तो इसकी EMI लगभग ₹43,000 से ₹44,000 प्रति माह के बीच बनती है। हालांकि यह आंकड़ा अलग-अलग बैंक और ब्याज दर के अनुसार बदल सकता है। ये बात सिर्फ ईएमआई की हुई। लेकिन इसके अलावा भी आवेदन के समय और उसके बाद भी अलग-अलग परिस्थितियों में बैंक आपसे चार्जेंस वसूलते हैं या वसूल सकते हैं। इनमें प्रोसेसिंग फीस, लेट-पेमेंट फीस, डिफॉल्ट चार्ज, प्री-पेमेंट या पार्ट- पेमेंट शामिल हैं।
होम लोन पास करने के लिए बैंक एक बार प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, जो लोन अमाउंट के हिसाब से तय होती है और शुरुआत में ही देनी होती है।
अगर EMI समय पर नहीं चुकाई जाती, तो बैंक उस पर पेनल्टी लगाता है, जिससे अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
लोन चुकाने में गंभीर चूक होने पर बैंक रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े अतिरिक्त शुल्क वसूल सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति समय से पहले पूरा या आंशिक लोन चुकाता है, तो उस पर भी चार्ज लग सकता है, जो बैंक की नीति पर निर्भर करता है।
| हिडेन चार्ज | क्या होता है | उदाहरण (₹50 लाख लोन) |
|---|---|---|
| प्रोसेसिंग फीस | लोन मंजूरी के समय एक बार लिया जाने वाला शुल्क | 0.5% = ₹25,000 |
| लेट पेमेंट पेनल्टी | EMI देर से भरने पर लगने वाला जुर्माना | ₹40,000 EMI लेट होने पर 2% = ₹800 |
| डिफॉल्ट चार्ज | लंबे समय तक EMI न भरने पर कानूनी/रिकवरी खर्च | ₹10,000 – ₹50,000 तक (अनुमानित) |
| प्रीपेमेंट चार्ज | समय से पहले पूरा लोन चुकाने पर लगने वाला शुल्क | ₹20 लाख प्रीपेमेंट पर 2% = ₹40,000 |
| पार्ट-प्रीपेमेंट चार्ज | लोन का कुछ हिस्सा पहले चुकाने पर चार्ज | ₹5 लाख पार्ट पेमेंट पर 1% = ₹5,000 |
(नोट: चार्जेज को लेकर उपरोक्त उदाहरण सिर्फ समझने के उद्देश्य से है। बैंकों के वास्तविक चार्ज अलग-अलग हो सकते हैं।)
PersonalCFO के CEO सुशील जैन के अनुसार, घर खरीदना हर व्यक्ति के वित्तीय प्लान का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है, लेकिन सिर्फ EMI देखकर फैसला लेना सही नहीं है। उनके मुताबिक होम लोन में कई ऐसे hidden charges होते हैं जिनकी जानकारी होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ग्राहक को प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और अन्य शर्तों को लेकर पहले से जानकारी लेनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर बैंकों से बातचीत कर बेहतर डील हासिल करनी चाहिए।
जैन का यह भी कहना है कि जिन ग्राहकों का CIBIL स्कोर अच्छा होता है, उनके पास बैंक से ब्याज दर और अन्य शुल्क कम कराने की बेहतर संभावना होती है। इसलिए अलग-अलग बैंकों की तुलना करना जरूरी है।