HUF vs Individual Tax: भारत में टैक्स प्लानिंग सिर्फ बचत का तरीका नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा वित्तीय निर्णय भी है। बदलते नियमों और नए टैक्स सिस्टम के बीच आम लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर टैक्स बचाने के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है। खासकर जब बात आती है Individual और HUF यानी हिंदू अविभाजित परिवार की, तो यह तुलना और भी अहम हो जाती है।
पहली नजर में दोनों ही टैक्स सिस्टम काफी हद तक एक जैसे लगते हैं। दोनों पर टैक्स स्लैब समान लागू होते हैं और दोनों को पुराने और नए टैक्स सिस्टम में से चुनने का विकल्प भी मिलता है। लेकिन जब आप गहराई से देखते हैं, तो इनके बीच कई ऐसे अंतर सामने आते हैं जो आपकी टैक्स लायबिलिटी पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
यही वजह है कि सही जानकारी और समझ के साथ लिया गया फैसला आपकी टैक्स बचत को काफी हद तक बढ़ा सकता है।
1 Finance में टैक्स हेड, CA Parag Jain के अनुसार, कागज पर भले ही Individual और HUF एक जैसे दिखते हों, लेकिन व्यवहार में इनके बीच का अंतर काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह अंतर खासतौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आय का स्रोत क्या है और आप उसे कैसे मैनेज करते हैं।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों टैक्स संरचनाओं में कुछ बुनियादी समानताएं भी हैं।
यानी, सतही तौर पर देखें तो दोनों में ज्यादा फर्क नजर नहीं आता। लेकिन असली अंतर तब सामने आता है जब हम डिडक्शन, रिबेट और इनकम के स्रोत को देखते हैं।
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CA Parag Jain के अनुसार, Individual टैक्सपेयर्स को मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट है।
नए टैक्स सिस्टम में अगर किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो उसे पूरी तरह टैक्स से छूट मिल सकती है। यानी उसकी टैक्स लायबिलिटी शून्य हो जाती है।
वहीं, HUF को यह रिबेट नहीं मिलता। यही वजह है कि अगर HUF की आय 12 लाख रुपये है, तो उसे करीब 62,400 रुपये तक टैक्स देना पड़ सकता है।
Individual को सैलरी या पेंशन पर 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। यह टैक्सेबल इनकम को सीधे कम करता है।
लेकिन HUF इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सकता, क्योंकि HUF सैलरी इनकम कमा ही नहीं सकता। इस वजह से सैलरी आधारित आय वालों के लिए Individual स्ट्रक्चर ज्यादा लाभकारी रहता है।
पुराने टैक्स सिस्टम में सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट Individual और HUF दोनों को मिलती है। इसी तरह, सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस पर भी दोनों को छूट मिलती है। HUF के मामले में यह छूट परिवार के सदस्यों के हेल्थ इंश्योरेंस पर लागू होती है।
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CA Parag Jain बताते हैं कि HUF का सबसे बड़ा फायदा इसकी अलग टैक्स पहचान है।
HUF का अपना अलग PAN होता है और यह अलग से ITR फाइल करता है। इसका मतलब यह है कि परिवार की कुछ आय को HUF के तहत दिखाकर उसे अलग से टैक्स किया जा सकता है।
मान लीजिए किसी परिवार की कुल आय 24 लाख रुपये है।
अगर पूरी आय एक ही व्यक्ति के नाम पर है, तो उस पर ऊंचे टैक्स स्लैब लागू होंगे और टैक्स ज्यादा देना पड़ेगा।
अगर यही 24 लाख रुपये की आय को 12-12 लाख में बांटकर एक हिस्सा Individual और दूसरा HUF के नाम कर दिया जाए, तो दोनों पर अलग-अलग टैक्स लगेगा।
इससे कुल टैक्स कम हो सकता है, क्योंकि दोनों को बेसिक छूट और स्लैब का फायदा अलग-अलग मिलेगा।
Taxocity.com के फाउंडर सीए जतिन गोयल ने कहा कि HUF के जरिए टैक्स बचत तभी संभव है, जब निवेश में लगाया गया पैसा वास्तव में HUF का हो।
यह पैसा आमतौर पर पैतृक संपत्ति, परिवार के अन्य सदस्यों से मिले गिफ्ट या पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे से आता है। अगर HUF का कर्ता अपना व्यक्तिगत पैसा HUF में डालता है और उससे आय होती है, तो टैक्स नियमों के तहत वह आय फिर से उसी व्यक्ति की आय मानी जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि HUF चलाने के लिए अलग PAN, अलग बैंक अकाउंट, अलग ITR और सही रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है।
HUF तभी फायदेमंद होता है जब परिवार के पास ऐसी आय हो जो HUF के नाम पर दिखाई जा सके।
जैसे:
ऐसे मामलों में HUF एक अतिरिक्त टैक्स बचत का जरिया बन सकता है।
अगर किसी व्यक्ति की आय मुख्य रूप से सैलरी से आती है, तो HUF ज्यादा मददगार नहीं होता।
ऐसे में Individual टैक्सेशन बेहतर रहता है क्योंकि:
CA Parag Jain के मुताबिक, Individual और HUF को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए। सही परिस्थितियों में दोनों को साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे परिवार को टैक्स बचत का बेहतर मौका मिलता है।
टैक्स एक्सपर्ट ने कहा कि टैक्स प्लानिंग करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपनी इनकम के सोर्स को समझें।
वहीं, ईज़ीपे में सीनियर अकाउंटेंट आदिल मलिक के मुताबिक, HUF एक अतिरिक्त टैक्स इकाई की तरह काम करता है, जिससे परिवार को अलग PAN और अलग टैक्स स्लैब का फायदा मिल सकता है। यह खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी है, जिनकी संयुक्त आय अधिक है और जो कानूनी तरीके से अपनी टैक्स देनदारी को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना चाहते हैं।