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इनकम टैक्स के नए नियम लागू: अब 24Q और 26Q की छुट्टी, फॉर्म 138 और 140 से TDS भरना होगा आसान!

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1 अप्रैल 2026 से नए टैक्स नियम लागू हुए हैं, जिसके बाद TDS-TCS का सिस्टम बदल गया है। इसके चलते टैक्स फाइलिंग पहले से आसान, तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद जताई जा रही है

Last Updated- April 07, 2026 | 4:14 PM IST
Income TAX
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल 2026 से देश के टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स फाइलिंग का सिस्टम काफी बदल गया है। सरकार ने इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 लागू कर दिए हैं। इसके बाद TDS और TCS के नियमों में सुधार और टैक्स फाइलिंग को पहले से ज्यादा आसान, तेज और पारदर्शी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुराने फॉर्म 24Q और 26Q की जगह अब फॉर्म 138 और 140 लाए गए हैं, जिनमें ऑटो-प्रीफिल और रीयल-टाइम वैलिडेशन जैसी सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही TCS की दर घटने से विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज पर खर्च करने वालों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।

इन बदलावों का मकसद टैक्स भराना आसान बनाना, डिजिटल रिपोर्टिंग बढ़ाना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना है। अब बिजनेस करने वाले और आम लोग दोनों को फायदा होने वाला है।

नई फॉर्म्स ने बदला TDS का तरीका

टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) के सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बताया कि ये बदलाव समय बचाने, गलतियां कम करने, मैचिंग की समस्या खत्म करने और फास्ट प्रोसेसिंग के लिए किए गए हैं।

पुराने 24Q और 26Q फॉर्म की जगह अब 138 और 140 फॉर्म आ गए हैं। ये दोनों फॉर्म पहले की तरह ही हर तिमाही TDS स्टेटमेंट भरने के काम आएंगे। टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि नए फॉर्म आसान हैं, टेक्नोलॉजी से लैस हैं और भरोसेमंद भी हैं। इनमें ऑटो-प्रीफिल, रीयल-टाइम चेक, ड्रॉप-डाउन मेन्यू, डेट चुनने का ऑप्शन और चेकबॉक्स जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे फॉर्म भरना आसान हो जाता है और गलती होने की संभावना कम रहती है।

फॉर्म 138 किसके लिए और क्यों जरूरी?

फॉर्म 138 खास तौर पर नियोक्ताओं यानी एम्प्लॉयर्स के लिए है। इसका इस्तेमाल कर्मचारियों की सैलरी से काटे गए TDS की जानकारी देने के लिए किया जाता है, जो सेक्शन 392 के तहत आता है।

Also Read: ITR Filing 2026: इस बार नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा या पुराना? एक्सपर्ट से दूर करें सारा कंफ्यूजन

इसके अलावा, कुछ निर्धारित यानी Specified बैंकों को भी इस फॉर्म के जरिए रिपोर्ट करना होता है, जब वे तय किए गए सीनियर सिटीजन्स को पेंशन या ब्याज आय पर TDS काटते हैं। इस फॉर्म को दो तरह की संस्थाओं को भरना होगा।

पहला, कोई भी एम्प्लॉयर, चाहे वह कंपनी हो, फर्म, गवर्मेंट डिपार्टमेंट या कोई व्यक्ति, जो कर्मचारियों की सैलरी से टैक्स काटता है। दूसरा, वे निर्धारित बैंक जो सीनियर सिटीजन्स की आय पर TDS काटते हैं।

फॉर्म 140 का क्या काम?

फॉर्म 140 का इस्तेमाल नॉन-सैलरी पेमेंट्स पर TDS की जानकारी देने के लिए किया जाता है। इसमें कमीशन, ब्रोकरेज, प्रोफेशनल फीस या किराया जैसे पेमेंट शामिल हैं, जो रेसिडेंट्स को किए जाते हैं। इस फॉर्म को हर वह संस्था भरती है, चाहे वह कंपनी हो, फर्म, पार्टनरशिप, सरकारी संस्था या कोई व्यक्ति, जो रेसिडेंट को ऐसे नॉन-सैलरी पेमेंट करता है और जिस पर टैक्स काटने की जिम्मेदारी होती है।

TCS में राहत, रेट्स घटे

TCS के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि लोगों पर पहले से टैक्स का बोझ कम हो सके। अब विदेश यात्रा पैकेज पर फ्लैट 2 प्रतिशत TCS लगेगा, जबकि पहले यह 10 लाख रुपये तक 5 प्रतिशत और उससे ऊपर 20 प्रतिशत था। शिक्षा और मेडिकल के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी TCS की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।

इन बदलावों से यात्रा करने वाले लोगों और जिनके परिवार का विदेश में पढ़ाई या इलाज का खर्च है, उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही टैक्स अधिकारियों के लिए रिपोर्टिंग की निगरानी भी बनी रहेगी। ये बदलाव टैक्स सिस्टम को और बेहतर और आसान बनाने की दिशा में एक कदम माने जा रहे हैं।

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First Published - April 7, 2026 | 4:14 PM IST

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