भारत में लाखों टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का ‘आउटस्टैंडिंग डिमांड’ (Outstanding Demand) का मैसेज किसी बुरे सपने से कम नहीं होता। अक्सर लोग इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि जब उन्होंने हर साल ईमानदारी से टैक्स भरा है, तो फिर पोर्टल पर 10 या 15 साल पुराने नोटिस क्यों दिखाई दे रहे हैं।
इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए भारत सरकार ने छोटे और पुराने टैक्स विवादों को सुलझाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल के बजट प्रावधानों और उसके बाद जारी CBDT के निर्देशों ने करोड़ों टैक्सपेयर्स को राहत की सांस लेने का मौका दिया है। हालांकि, यह माफी कैसे काम करती है और इसके पीछे के कानूनी दांव-पेंच क्या हैं, इसे समझने के लिए हमने टैक्स और कानून के क्षेत्र के दिग्गजों से बात की है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार ने सारे पुराने टैक्स नोटिस पूरी तरह खत्म कर दिए हैं? ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप भल्ला और क्लियरटैक्स से जुड़ी टैक्स एक्सपर्ट CA चांदनी आनंदन कहती हैं कि ऐसा नहीं है। सरकार ने सभी पुराने टैक्स बकायों को एक साथ माफ नहीं किया है। राहत सिर्फ कुछ खास और छोटी डिमांड्स के लिए दी गई है। फाइनेंस एक्ट 2024 के तहत यह राहत तय नियमों और सीमाओं के साथ लागू की गई है, ताकि लंबे समय से अटकी छोटी-छोटी डिमांड्स को खत्म किया जा सके।
चांदनी आनंदन के मुताबिक, सरकार ने AY 2010-11 तक की हर छोटी बकाया डिमांड एंट्री पर 25,000 रुपये तक और AY 2011-12 से 2015-16 तक की डिमांड पर 10,000 रुपये तक की राहत दी है। हालांकि, एक टैक्सपेयर को कुल मिलाकर अधिकतम 1 लाख रुपये तक की ही राहत मिलेगी। यह पूरी प्रक्रिया सिस्टम के जरिए अपने आप की जा रही है, ताकि सालों से लंबित छोटी-छोटी टैक्स डिमांड्स को रिकॉर्ड से हटाया जा सके।
| Category | Limit / Treatment | Remarks |
| निर्धारण वर्ष (A.Y.) 2010-11 तक | प्रति डिमांड एंट्री 25,000 रुपये तक | केवल तभी पात्र जब जनवरी 2024 की अधिसूचना के अंतर्गत आता हो और 31 जनवरी 2024 तक बकाया हो। |
| निर्धारण वर्ष (A.Y.) 2011-12 से 2015-16 तक | प्रति डिमांड एंट्री 10,000 रुपये तक | केवल तभी पात्र जब जनवरी 2024 की अधिसूचना के अंतर्गत आता हो और 31 जनवरी 2024 तक बकाया हो। |
| प्रति करदाता अधिकतम सीमा | 1,00,000 रुपये | राहत की सीमा करदाता (Taxpayer) स्तर पर निर्धारित है। |
| TDS / TCS डिमांड | शामिल नहीं है | इन मांगों (Demands) को माफी योजना से बाहर रखा गया है। |
| अधिसूचना के बाहर की मांगें | माफ नहीं की गई | ये पोर्टल के ‘आउटस्टैंडिंग डिमांड’ सेक्शन में दिखती रहेंगी। |
सोर्स: ClearTax
इसी विषय पर Taxocity.com के फाउंडर CA जतिन गोयल कहते हैं कि सरकार ने पुराने टैक्स मामलों में दो तरह की राहत दी है। पहली, छोटी-छोटी बकाया डिमांड्स को अपने आप खत्म किया जा रहा है। CBDT के 13 फरवरी 2024 के आदेश के तहत 31 जनवरी 2024 तक लंबित कई छोटी डिमांड्स पोर्टल से हटाई जा रही हैं और इसके लिए टैक्सपेयर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। दूसरी तरफ, बड़े और विवादित टैक्स मामलों के लिए सरकार ने ‘विवाद से विश्वास 2.0’ जैसी स्कीम शुरू की है, जिसके जरिए लोग अपने पुराने टैक्स विवाद सुलझा सकते हैं।
जतिन गोयल साफ कहते हैं कि ‘विवाद से विश्वास’ कोई सीधी टैक्स माफी योजना नहीं है। इसमें टैक्सपेयर को विवादित टैक्स का तय हिस्सा जमा करना पड़ता है, जिसके बाद ब्याज और पेनल्टी में राहत मिलती है। उनका कहना है कि अगर आपकी डिमांड छोटी राहत वाली श्रेणी में नहीं आती, तो वह अपने आप खत्म नहीं होगी और उस पर ब्याज भी बढ़ता रहेगा।
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टैक्सपेयर्स अक्सर सोचते हैं कि कई साल पुराने टैक्स नोटिस अचानक पोर्टल पर फिर से कैसे दिखाई देने लगते हैं। SK पाटोदिया एंड एसोसिएट्स LLP में एसोसिएट डायरेक्टर (डायरेक्ट टैक्सेस) मिहिर तन्ना कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में इसकी वजह TDS क्रेडिट से जुड़ी गड़बड़ी होती है। यानी टैक्सपेयर ने रिटर्न में जिस TDS का दावा किया, वह डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में सही तरीके से मैच नहीं हो पाता।
उनका कहना है कि लोगों को यह जरूर चेक करना चाहिए कि उनका TDS Form 26AS में ‘F’ यानी Final स्टेटस के साथ दिख रहा हो। कई बार सिस्टम या पुराने रिकॉर्ड अपडेट न होने की वजह से भी पोर्टल पर गलत डिमांड दिखाई देने लगती है।
वहीं ‘रेस्ट द केस’ की फाउंडर और CEO श्रेया शर्मा कहती हैं कि पुराने टैक्स नोटिस ज्यादातर फाइलिंग में हुई छोटी-छोटी गलतियों की वजह से सामने आते हैं। उनके मुताबिक, Form 26AS और ITR के आंकड़ों में फर्क, गलत ITR फॉर्म चुनना या टैक्स चालान की सही जानकारी न देना इसकी आम वजहें हैं।
कई बार डिपार्टमेंट पुराने बकाये को नए रिफंड से एडजस्ट भी कर देता है, जिसकी जानकारी टैक्सपेयर को बाद में पता चलती है। श्रेया बताती हैं कि पहले कई रिकॉर्ड मैनुअल थे, लेकिन अब CPC जैसे डिजिटल सिस्टम के कारण पुराने डेटा और गड़बड़ियां भी पोर्टल पर सामने आने लगी हैं।
अगर आपको लगता है कि पोर्टल पर दिखाई दे रही टैक्स डिमांड गलत है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संदीप भल्ला सलाह देते हैं कि टैक्सपेयर तुरंत ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ‘पेंडिंग एक्शन’ में ‘रिस्पॉन्स टू आउटस्टैंडिंग डिमांड’ सेक्शन खोलें। यहां आप बता सकते हैं कि डिमांड सही है, आंशिक रूप से सही है या पूरी तरह गलत है। अगर आप डिमांड से सहमत नहीं हैं, तो अपने पक्ष में चालान, पुराने असेसमेंट ऑर्डर या दूसरे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने चाहिए। उनका कहना है कि ज्यादा जटिल मामलों में संबंधित निर्धारण अधिकारी (Assessing Officer (AO)) से सीधे संपर्क करना भी जरूरी पड़ सकता है।
CA जतिन गोयल इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि अगर आपने पोर्टल पर एक बार ‘डिमांड इज करेक्ट’ (Demand is Correct) चुन लिया, तो बाद में उसे बदलना आसान नहीं होता। इसलिए जवाब देने से पहले पूरी जानकारी अच्छी तरह जांच लें। अगर डिमांड डिपार्टमेंट की गलती या डेटा मैच न होने की वजह से बनी है, तो टैक्सपेयर को सेक्शन154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट (Rectification Request) फाइल करनी चाहिए।
वहीं, मिहिर तन्ना बताते हैं कि रेक्टिफिकेशन के लिए आवेदन उस वित्त वर्ष के खत्म होने के 4 साल के भीतर करना जरूरी है, जिसमें संबंधित आदेश जारी हुआ था। उनके मुताबिक, पोर्टल पर CPC के आदेश, CIT(Appeals) के आदेश और AO से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं, इसलिए सही टैब चुनना बेहद जरूरी है।
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एक बड़ी गलतफहमी यह है कि 10-15 साल पुराने टैक्स बकाये अपने आप खत्म हो जाते हैं। श्रेया शर्मा कहती हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। सरकार की तरफ से खास राहत मिले बिना कोई भी टैक्स डिमांड सिर्फ पुरानी होने से खत्म नहीं होती। अगर टैक्सपेयर इसे नजरअंदाज करता है, तो आगे चलकर डिपार्टमेंट बैंक अकाउंट अटैच करने, रिफंड रोकने या दूसरी रिकवरी कार्रवाई भी कर सकता है।
जतिन गोयल बताते हैं कि पुराने टैक्स बकाये को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि उस पर हर महीने 1% की दर से ब्याज जुड़ता रहता है। ऐसे में 15 साल पुरानी 50,000 रुपये की डिमांड भी समय के साथ काफी बड़ी रकम बन सकती है। इसलिए पुराने टैक्स नोटिस को नजरअंदाज करना आगे चलकर महंगा साबित हो सकता है।
ऐसी परेशानियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड्स और जानकारी हमेशा अपडेट रखी जाए। मिहिर तन्ना कहते हैं कि टैक्सपेयर्स को अपना सही ईमेल ID ITR और इनकम टैक्स पोर्टल पर अपडेट रखना चाहिए, क्योंकि डिपार्टमेंट के ज्यादातर नोटिस और जानकारी अब ईमेल के जरिए ही भेजी जाती हैं।
वहीं श्रेया शर्मा सलाह देती हैं कि लोग अपने टैक्स रिकॉर्ड, चालान और ITR की कॉपियां कम से कम 7 से 10 साल तक संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
संदीप भल्ला और जतिन गोयल दोनों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को समय-समय पर AIS, TIS और Form 26AS का मिलान करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी गड़बड़ी का पता समय रहते चल सके। जतिन गोयल सलाह देते हैं कि अगर आपकी कमाई कई सोर्स से होती है या आप बिजनेस करते हैं, तो ITR फाइल करने से पहले किसी अनुभवी CA की मदद लेना बेहतर रहता है।
आज डिजिटल सिस्टम में विभाग के पास लगभग हर वित्तीय लेनदेन की जानकारी पहुंच जाती है, इसलिए सिर्फ रिटर्न भर देना ही काफी नहीं है। टैक्स पोर्टल पर नजर बनाए रखना और नोटिस या डिमांड को समय पर चेक करना भी उतना ही जरूरी हो गया है।