मिडिल क्लास और सैलरीड लोगों के लिए टैक्स बचाना हमेशा से एक टेढ़ी खीर रहा है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के नए इनकम टैक्स नियमों ने एक ऐसी राह खोल दी है जिसकी कल्पना पहले मुश्किल थी। अगर आपका सालाना पैकेज (CTC) 15.85 लाख रुपये है, तो अब आपको सरकार को एक रुपया भी टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुनने में यह थोड़ा अविश्वसनीय लग सकता है, क्योंकि आमतौर पर 15 लाख से ऊपर की कमाई सीधे 30% वाले ऊंचे टैक्स स्लैब की जद में आ जाती है। लेकिन नई टैक्स व्यवस्था के तहत मील वाउचर यानी खाने के कूपन को एक ‘ब्रह्मास्त्र’ की तरह इस्तेमाल करके इस टैक्स लायबिलिटी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
दरअसल, टैक्स के इस नए गणित का सबसे बड़ा हीरो ‘मील वाउचर’ बनकर उभरा है। IT, फाइनेंस और मीडिया जैसे सेक्टर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
नए नियमों के मुताबिक, सेक्शन 115BAC के तहत अब एक मील पर 200 रुपये तक की छूट का नियम बनाया गया है। अगर आप दिन में दो बार के खाने के हिसाब से महीने के 22 कार्य दिवसों का हिसाब जोड़ें, तो साल भर में आप एक बड़ी रकम टैक्स फ्री कर सकते हैं। यह छोटा सा बदलाव आपकी नेट टैक्सेबल इनकम को 12 लाख रुपये के उस जादुई आंकड़े के नीचे ले आता है, जहां पहुंचते ही आपको सेक्शन 87A के तहत पूरी रिबेट मिल जाती है।
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इस पूरे खेल को समझने के लिए हमें सैलरी के ब्रेकअप पर गौर करना होगा। मान लीजिए आपका सालाना CTC 15.85 लाख रुपये है। आमतौर पर कंपनियां बेसिक सैलरी को CTC का 50 फीसदी रखती हैं, जो इस मामले में 7.92 लाख रुपये के करीब बैठती है। अब यहां से टैक्स बचाने का असली गणित शुरू होता है। सबसे पहले मील वाउचर के जरिए करीब 1,05,600 रुपये की कटौती सीधे आपकी टैक्सेबल इनकम से कम हो जाती है। यह कैलकुलेशन 200 रुपये प्रति मील, दिन में दो बार और साल के 12 महीनों के आधार पर की गई है। इसके बाद नंबर आता है एम्प्लॉयर के PF योगदान का, जो बेसिक सैलरी का 12% होता है। लगभग 95,100 रुपये की यह छूट भी आपकी कुल आय को नीचे खींचती है।
इतना ही नहीं, नई रिजीम में मिलने वाली 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन भी इसमें शामिल होती है। इन तीन प्रमुख कटौतियों के बाद आपकी नेट सैलरी करीब 13.09 लाख रुपये के पास पहुंच जाती है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। इसमें नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS का तड़का भी लगा है। सेक्शन 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी का 14% हिस्सा, जो लगभग 1.10 लाख रुपये बनता है, जब आपकी आय से घटाया जाता है, तो आपकी टैक्सेबल इनकम 11.98 लाख रुपये रह जाती है। चूंकि यह राशि 12 लाख रुपये की सीमा के अंदर है, इसलिए सरकार की टैक्स रिबेट के चलते आपकी टैक्स देनदारी जीरो हो जाती है।
इस प्लान का फायदा उठाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि मील वाउचर आपकी कंपनी ही दे, जैसे सोडेक्सो या इसी तरह के कार्ड, और ये आपकी सैलरी डिटेल्स में, खासकर फॉर्म 130 या TDS सर्टिफिकेट में सही तरीके से दर्ज होने चाहिए। ध्यान रखें कि यह छूट कैश में नहीं मिलती। साथ ही यह पूरा हिसाब उन्हीं लोगों पर लागू होता है जिनकी कमाई का एकमात्र जरिया सिर्फ सैलरी है।
टेक-होम सैलरी बढ़ाने का यह तरीका आज के समय में काफी असरदार माना जा रहा है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि हर कंपनी की HR पॉलिसी और सैलरी स्ट्रक्चर अलग होता है। इसलिए इस वित्त वर्ष में सैलरी री-स्ट्रक्चर कराने से पहले अपने ऑफिस के HR डिपार्टमेंट और किसी टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा। सही तरीके से प्लानिंग की जाए तो 15.85 लाख रुपये के पैकेज पर भी टैक्स देनदारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है और आपकी ज्यादा कमाई आपके पास रह सकती है।
| डिटेल | पैसा |
| सलाना पैकेज | ₹15,85,000 |
| बेसिक सैलरी (CTC का 50% हिस्सा) | ₹7,92,500 |
| घटाएं: मील वाउचर छूट (₹400 प्रतिदिन × 22 दिन × 12 महीने) | – ₹1,05,600 |
| घटाएं: एम्प्लॉयर द्वारा PF में दिया गया पैसा (बेसिक सैलरी का 12%) | – ₹95,100 |
| घटाएं: स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) | – ₹75,000 |
| नेट सैलरी (Net Salary) | ₹13,09,300 |
| घटाएं: NPS में जमा (बेसिक का 14% – Sec 80CCD(2)) | – ₹1,10,950 |
| टैक्सेबल इनकम | ₹11,98,350 |
| सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट (छूट) | 100% |
| टैक्स देना होगा | ₹0 (जीरो) |