भारत में रिटेल लोन की कहानी अब सिर्फ घर खरीदने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह लोगों की लाइफस्टाइल, और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का जरिया भी बनती जा रही है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय परिवार अब कर्ज का इस्तेमाल पहले से अलग तरीके से कर रहे हैं। मल्टी-फैमिली ऑफिस ‘क्लाइंट एसोसिएट्स’ की रिपोर्ट ‘द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंस शीट’ के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि इस पूरी तस्वीर के केंद्र में अब भी हाउसिंग लोन ही है।
वित्त वर्ष 2024 में कुल पर्सनल लोन में हाउसिंग लोन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत रही। हालांकि यह हिस्सा वित्त वर्ष 2016 के 53.6 प्रतिशत से थोड़ा कम हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह सबसे बड़ा सेगमेंट बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि घर के लोन के अलावा अब बाकी कैटेगरी में तेजी से बदलाव दिख रहा है। लोग अब केवल संपत्ति बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। इससे साफ है कि देश में उधारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।
देश में अब कर्ज लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले लोग घर, शिक्षा या बड़े निवेश के लिए लोन लेते थे, लेकिन अब रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए भी उधार लेने का चलन बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिना गारंटी वाले और खपत से जुड़े कर्ज में सबसे ज्यादा तेजी आई है। खासतौर पर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। साल 2016 में जहां कुल पर्सनल लोन में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 2.7 प्रतिशत थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई है। पिछले दस साल में इस सेगमेंट ने करीब 25 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि दर्ज की है। इससे साफ है कि लोग अब छोटे खर्चों के लिए भी क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसी तरह “अन्य पर्सनल लोन” की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। इसमें ज्यादातर बिना गारंटी वाले और खर्च से जुड़े कर्ज शामिल होते हैं। इसकी हिस्सेदारी 2016 में 21.2 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 26.3 प्रतिशत हो गई है। यह अब दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट बन चुका है। इससे संकेत मिलता है कि लोग अब ऐसे लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें ज्यादा लचीलापन हो और किसी संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत न पड़े।
वहीं, पारंपरिक लोन कैटेगरी में गिरावट देखने को मिली है। शिक्षा लोन की हिस्सेदारी 4.9 प्रतिशत से घटकर 2.2 प्रतिशत रह गई है। इससे यह माना जा रहा है कि या तो एजुकेशन लोन की मांग कम हुई है या फिर लोग पढ़ाई के लिए फंड जुटाने के दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जमा के बदले लिए जाने वाले कर्ज यानी एडवांस अगेंस्ट डिपॉजिट्स का हिस्सा घटकर 4.8 फीसदी से 2.3 फीसदी रह गया है। इससे साफ है कि लोग सुरक्षित गारंटी वाले कर्ज पर अब पहले जितना निर्भर नहीं रह गए हैं।
| कैटेगरी | 2015-16 | 2016-17 | 2017-18 | 2018-19 | 2019-20 | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उपभोक्ता टिकाऊ सामान | 1.3% | 1.3% | 1.0% | 0.3% | 0.6% | 0.6% | 0.5% | 0.5% | 0.4% |
| हाउसिंग (प्राथमिक क्षेत्र सहित) | 53.6% | 53.1% | 51.1% | 51.1% | 49.9% | 49.6% | 50.2% | 47.6% | 51.0% |
| FDs पर लोन | 4.8% | 4.1% | 3.8% | 3.8% | 2.9% | 2.6% | 2.4% | 2.9% | 2.3% |
| शेयर/बॉन्ड पर लोन | 0.5% | 0.3% | 0.3% | 0.3% | 0.2% | 0.2% | 0.2% | 0.2% | 0.2% |
| क्रेडिट कार्ड बकाया | 2.7% | 3.2% | 3.6% | 3.8% | 4.4% | 4.4% | 4.5% | 4.9% | 4.8% |
| शिक्षा लोन | 4.9% | 4.3% | 3.7% | 3.3% | 2.9% | 2.6% | 2.4% | 2.3% | 2.2% |
| वाहन लोन | 11.0% | 10.5% | 9.9% | 12.4% | 12.5% | 12.2% | 11.7% | 11.7% | 10.8% |
| गोल्ड ज्वैलरी पर लोन | – | – | – | 1.1% | 1.2% | 2.5% | 2.2% | 2.1% | 1.9% |
| अन्य पर्सनल लोन | 21.2% | 23.2% | 26.6% | 24.0% | 25.5% | 25.4% | 26.0% | 27.8% | 26.3% |