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EMI Economy: भारत में क्रेडिट कार्ड का बूम, एजुकेशन लोन में बड़ी गिरावट

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भारत में रिटेल लोन का ट्रेंड अब घर खरीदने से आगे बढ़कर रोजमर्रा के खर्च और लाइफस्टाइल जरूरतों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है।

Last Updated- April 15, 2026 | 2:57 PM IST
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रिपोर्ट के अनुसार, FY2016 के बाद से बैंकों और एनबीएफसी ने रिटेल लोन पर ज्यादा ध्यान दिया है। -प्रतीकात्मक फोटो

भारत में रिटेल लोन की कहानी अब सिर्फ घर खरीदने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह लोगों की लाइफस्टाइल, और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का जरिया भी बनती जा रही है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय परिवार अब कर्ज का इस्तेमाल पहले से अलग तरीके से कर रहे हैं। मल्टी-फैमिली ऑफिस ‘क्लाइंट एसोसिएट्स’ की रिपोर्ट ‘द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंस शीट’ के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि इस पूरी तस्वीर के केंद्र में अब भी हाउसिंग लोन ही है।

वित्त वर्ष 2024 में कुल पर्सनल लोन में हाउसिंग लोन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत रही। हालांकि यह हिस्सा वित्त वर्ष 2016 के 53.6 प्रतिशत से थोड़ा कम हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह सबसे बड़ा सेगमेंट बना हुआ है।  दिलचस्प बात यह है कि घर के लोन के अलावा अब बाकी कैटेगरी में तेजी से बदलाव दिख रहा है। लोग अब केवल संपत्ति बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। इससे साफ है कि देश में उधारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

क्रेडिट कार्ड सबसे आगे

देश में अब कर्ज लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले लोग घर, शिक्षा या बड़े निवेश के लिए लोन लेते थे, लेकिन अब रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए भी उधार लेने का चलन बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिना गारंटी वाले और खपत से जुड़े कर्ज में सबसे ज्यादा तेजी आई है। खासतौर पर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। साल 2016 में जहां कुल पर्सनल लोन में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 2.7 प्रतिशत थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई है। पिछले दस साल में इस सेगमेंट ने करीब 25 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि दर्ज की है। इससे साफ है कि लोग अब छोटे खर्चों के लिए भी क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसी तरह “अन्य पर्सनल लोन” की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। इसमें ज्यादातर बिना गारंटी वाले और खर्च से जुड़े कर्ज शामिल होते हैं। इसकी हिस्सेदारी 2016 में 21.2 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 26.3 प्रतिशत हो गई है। यह अब दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट बन चुका है। इससे संकेत मिलता है कि लोग अब ऐसे लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें ज्यादा लचीलापन हो और किसी संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत न पड़े।

वहीं, पारंपरिक लोन कैटेगरी में गिरावट देखने को मिली है। शिक्षा लोन की हिस्सेदारी 4.9 प्रतिशत से घटकर 2.2 प्रतिशत रह गई है। इससे यह माना जा रहा है कि या तो एजुकेशन लोन की मांग कम हुई है या फिर लोग पढ़ाई के लिए फंड जुटाने के दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जमा के बदले लिए जाने वाले कर्ज यानी एडवांस अगेंस्ट डिपॉजिट्स का हिस्सा घटकर 4.8 फीसदी से 2.3 फीसदी रह गया है। इससे साफ है कि लोग सुरक्षित गारंटी वाले कर्ज पर अब पहले जितना निर्भर नहीं रह गए हैं।

शेयर और बॉन्ड के बदले लिए जाने वाले लोन का हिस्सा अभी भी बहुत कम, करीब 0.2 फीसदी के आसपास है। इसका मतलब है कि लोग अपने वित्तीय निवेश को गिरवी रखकर कर्ज लेने से अभी भी बच रहे हैं। व्हीकल लोन, जो पहले खपत से जुड़ा एक बड़ा हिस्सा माना जाता था, अब लगभग स्थिर है। महामारी के दौरान इसमें उछाल आया था, लेकिन अब यह 11 फीसदी से हल्का घटकर 10.8 फीसदी पर आ गया है।

वहीं, गोल्ड ज्वेलरी के बदले मिलने वाले कर्ज में महामारी के बाद कुछ समय के लिए तेजी देखी गई थी। अब यह करीब 1.9 फीसदी पर स्थिर हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि अनिश्चित समय में लोग इसे शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यह घटकर सिर्फ 0.4 फीसदी रह गया है। इससे पता चलता है कि छोटे खर्चों के लिए लोग अब क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, हाउसिंग लोन अब भी लंबी अवधि के कर्ज का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, लेकिन सबसे तेज बढ़ोतरी अब बिना गारंटी वाले, खपत आधारित कर्ज में हो रही है।

सेक्टरवार पर्सनल लोन   

कैटेगरी 2015-16 2016-17 2017-18 2018-19 2019-20 2020-21 2021-22 2022-23 2023-24
उपभोक्ता टिकाऊ सामान 1.3% 1.3% 1.0% 0.3% 0.6% 0.6% 0.5% 0.5% 0.4%
हाउसिंग (प्राथमिक क्षेत्र सहित) 53.6% 53.1% 51.1% 51.1% 49.9% 49.6% 50.2% 47.6% 51.0%
 FDs पर लोन 4.8% 4.1% 3.8% 3.8% 2.9% 2.6% 2.4% 2.9% 2.3%
शेयर/बॉन्ड पर लोन 0.5% 0.3% 0.3% 0.3% 0.2% 0.2% 0.2% 0.2% 0.2%
क्रेडिट कार्ड बकाया 2.7% 3.2% 3.6% 3.8% 4.4% 4.4% 4.5% 4.9% 4.8%
शिक्षा लोन 4.9% 4.3% 3.7% 3.3% 2.9% 2.6% 2.4% 2.3% 2.2%
वाहन लोन 11.0% 10.5% 9.9% 12.4% 12.5% 12.2% 11.7% 11.7% 10.8%
गोल्ड ज्वैलरी पर लोन 1.1% 1.2% 2.5% 2.2% 2.1% 1.9%
अन्य पर्सनल लोन 21.2% 23.2% 26.6% 24.0% 25.5% 25.4% 26.0% 27.8% 26.3%

(सोर्स: क्लाइंट एसोसिएट्स की रिपोर्ट) 

बैंकों और NBFCs का रिटेल लोन पर फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, FY2016 के बाद से बैंकों और एनबीएफसी ने रिटेल लोन पर ज्यादा ध्यान दिया है। शुरुआत में इसकी वजह कॉर्पोरेट लोन की कमजोर मांग थी, लेकिन बाद में लोगों के कर्ज लेने के तरीके में बदलाव भी एक बड़ा कारण बना। महामारी के बाद बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई, जिससे उन्होंने पर्सनल लोन तेजी से बढ़ाए। इसी का असर है कि रिटेल क्रेडिट का हिस्सा GDP के मुकाबले FY2016 के 10.1 फीसदी से बढ़कर FY2025 में 18.1 फीसदी तक पहुंच गया।

इस तेजी के पीछे एक बड़ा कारण बिना गारंटी वाले कर्ज का बढ़ना है। फिनटेक कंपनियों के नए विकल्प जैसे ‘बाय नाउ, पे लेटर’ और बेहतर लोन जांच सिस्टम ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है।

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First Published - April 15, 2026 | 11:04 AM IST

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