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सैलरी से कटा TDS कंपनी ने नहीं किया जमा, क्या कर्मचारी को फिर भरना होगा टैक्स? जानें ITAT का फैसला

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कंपनी अगर सैलरी से कटा TDS सरकारी खाते में जमा न करे, तो टैक्स डिपार्टमेंट कर्मचारी से दोबारा टैक्स की वसूली नहीं कर सकते। ITAT ने कर्मचारियों को इसपर बड़ी राहत दी है

Last Updated- April 21, 2026 | 4:54 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सैलरी से टैक्स कट तो गया, लेकिन सरकारी खाते में जमा ही नहीं हुआ; यह किसी भी ईमानदार कर्मचारी के लिए किसी बुरे सपने जैसा है। अक्सर कंपनियां दिवालिया हो जाती हैं या आर्थिक तंगी का हवाला देकर काटा गया TDS सरकार को नहीं भेजतीं। ऐसे में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का डंडा सीधा कर्मचारी पर चलता है और उसे दोबारा टैक्स भरने का नोटिस थमा दिया जाता है।

लेकिन दीपक कुमार रुइया बनाम DCIT के हालिया मामले में कोलकाता ITAT (इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल) ने टैक्स डिपार्टमेंट को आईना दिखाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि एम्प्लॉयर की चोरी या लापरवाही की सजा कर्मचारी को नहीं भुगतनी होगी। यह फैसला उन लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो कंपनी और टैक्स टैक्स डिपार्टमेंट की खींचतान के बीच बेवजह पिसते रहे हैं।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला असेसमेंट ईयर 2016-17 से जुड़ा है। न्यूज वेबसाइट फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक कुमार रुइया ‘फाल्कन टायर्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी में काम करते थे। कंपनी ने उनकी सैलरी से करीब 17.97 लाख रुपये का TDS काटा था। नियम के मुताबिक, कंपनी को यह पैसा सरकार के पास जमा करना था, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया और बाद में कंपनी दिवालिया हो गई।

जब दीपक ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया और TDS क्रेडिट का दावा किया, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के असेसिंग ऑफिसर (AO) ने हाथ खड़े कर दिए। टैक्स डिपार्टमेंट का तर्क था कि चूंकि कंपनी ने पैसा जमा ही नहीं किया, इसलिए इसका क्रेडिट कर्मचारी को नहीं मिल सकता। इस वजह से दीपक के सिर पर 15.85 लाख रुपये की टैक्स डिमांड निकाल दी गई। यानी जो टैक्स वो एक बार दे चुके थे, टैक्स डिपार्टमेंट वही पैसा उनसे दोबारा मांग रहा था।

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ट्रिब्यूनल ने टैक्स डिपार्टमेंट को क्यों फटकारा?

जब यह मामला ITAT की कोलकाता बेंच के पास पहुंचा, तो ट्रिब्यूनल ने टैक्स डिपार्टमेंट के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि कर्मचारी की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी है कि वह अपनी सैलरी से टैक्स कटने दे। एक बार जब एम्प्लॉयर ने टैक्स काट लिया, तो कर्मचारी की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसके बाद वह पैसा सरकार तक पहुँचाना पूरी तरह से कंपनी की जिम्मेदारी है।

अदालत ने एक बेहद जरूरी बात कही, “अगर एम्प्लॉयर टैक्स जमा करने में गलती करता है, तो इसकी सजा कर्मचारी को नहीं दी जा सकती।”

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि टैक्स टैक्स डिपार्टमेंट को वह पैसा कंपनी से वसूलना चाहिए, न कि उस कर्मचारी से जो पहले ही अपनी सैलरी का एक हिस्सा टैक्स के रूप में गंवा चुका है।

नियमों की अनदेखी और कर्मचारियों के अधिकार

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने साल 2016 में ही एक सर्कुलर जारी किया था। इस नियम में साफ कहा गया था कि अगर किसी का TDS कट चुका है लेकिन जमा नहीं हुआ, तो टैक्स डिपार्टमेंट उस टैक्स की सीधी वसूली टैक्सपेयर से नहीं कर सकता। ट्रिब्यूनल ने इस बात पर चिंता जताई कि टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी अक्सर जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं करते हैं।

कोलकाता बेंच ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 143(1) के तहत TDS क्रेडिट देने से मना करना कानूनी रूप से गलत है। ITAT ने दीपक कुमार रुइया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके ऊपर थोपी गई टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया और उन्हें पूरा TDS क्रेडिट देने का आदेश दिया।

इस फैसले से आगे क्या बदलेगा?

यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी सांस की तरह है जिनकी कंपनियां आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं या बंद होने की कगार पर हैं। अक्सर देखा जाता है कि फॉर्म-16 में तो TDS दिखता है, लेकिन वह फॉर्म-26AS में अपडेट नहीं होता। ऐसे में अब कर्मचारी मजबूती से अपना पक्ष रख सकते हैं कि एम्प्लॉयर की गलती का बोझ उनके कंधों पर नहीं डाला जा सकता। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ITAT के इस फैसले को ऊपर की अदालतों में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल यह टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी जीत है।

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First Published - April 21, 2026 | 4:54 PM IST

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