facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

ITR Filing 2026: सिर्फ Form-16 के भरोसे न रहें, रिटर्न भरने से पहले जरूर चेक करें AIS और TIS

Advertisement

ITR Filing AY 2026-27: ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 16, AIS और TIS का मिलान बेहद जरूरी है। इन तीनों में आंकड़ों का अंतर होने पर सीधे टैक्स नोटिस आ सकता है

Last Updated- June 01, 2026 | 4:36 PM IST
Income Tax Return
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ITR Filing2026: जून का महीना शुरू होते ही देश भर में नौकरीपेशा लोगों को अपनी कंपनियों से फॉर्म 16 मिलना शुरू हो जाता है। इसके मिलते ही लोग टैक्स फाइलिंग की तैयारी में जुट जाते हैं। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ फॉर्म 16 के भरोसे आपका इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) बिल्कुल सही और बिना किसी गलती के भर जाएगा, तो आप गलतफहमी में हैं। टैक्स नियमों में आए बदलावों के बाद अब सरकार आपके हर लेन-देन पर बारीक नजर रखती है।

यही वजह है कि अब ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 16 के साथ-साथ दो और जरूरी डॉक्यूमेंट्स से मिलान करना जरूरी हो गया है और ये डॉक्यूमेंट्स हैं AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) और TIS (टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी)।

अगर इन तीनों डॉक्यूमेंट्स में दिखाई गई रकम आपस में मैच नहीं खाती है, तो टैक्स डिपार्टमेंट आपको सीधे मिसमैच का नोटिस भेज सकता है। आइए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि ये तीनों चीजें क्या हैं और रिटर्न भरने से पहले इनमें क्या-क्या चेक करना जरूरी है।

Also Read: ITR-1 से लेकर ITR-4 तक, सीनियर सिटीजन कौन सा फॉर्म चुनें और कहां मिल सकती है छूट?

Form 16: आपकी सैलरी और कटे हुए टैक्स का पूरा हिसाब-किताब

फॉर्म 16 को सीधे और आसान शब्दों में समझें तो यह आपकी सैलरी और टैक्स से जुड़ा एक अहम डॉक्यूमेंट है, जो आपकी कंपनी आपको जारी करती है। इसे आपकी नौकरी से हुई कमाई और उस पर कटे टैक्स का आधिकारिक रिकॉर्ड भी कहा जा सकता है।

फॉर्म 16 मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा होता है, Part A और Part B। Part A में पूरी जानकारी दी जाती है कि आपकी कंपनी ने साल भर में आपकी सैलरी से कितना TDS काटा, यह टैक्स सरकार के पास कब-कब जमा किया गया और उससे जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारियां क्या हैं। इस हिस्से में कंपनी का PAN, TAN और कर्मचारी का PAN नंबर भी दर्ज होता है, जिससे टैक्स रिकॉर्ड की पहचान की जा सके।

वहीं, Part B में आपकी सैलरी और टैक्स का पूरा हिसाब-किताब विस्तार से दिया जाता है। इसमें आपकी ग्रॉस सैलरी यानी साल भर की कुल कमाई, आपको मिलने वाले अलग-अलग भत्ते जैसे HRA (हाउस रेंट अलाउंस) और LTA (लीव ट्रैवल अलाउंस), साथ ही टैक्स बचाने के लिए किए गए निवेशों की जानकारी शामिल होती है। उदाहरण के लिए, धारा 80C के तहत PF, LIC या दूसरे निवेश और धारा 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी जानकारियां इसमें रहती हैं। इसी हिस्से में यह भी बताया जाता है कि सभी छूट और कटौतियों को जोड़ने के बाद आपकी नेट टैक्सेबल इनकम कितनी बनती है, जिस पर टैक्स की गणना की गई है।

जब आपको अपना फॉर्म 16 मिले, तो सबसे पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें आपका PAN नंबर सही दर्ज है या नहीं। इसके बाद Part A में दिखाई गई कुल TDS राशि का मिलान अपने Form 26AS से कर लें। ऐसा करने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि आपकी कंपनी ने आपकी सैलरी से जो टैक्स काटा था, वह वास्तव में सरकार के खाते में जमा भी कर दिया गया है।

Also Read: ITR-1 से लेकर ITR-4 तक, सीनियर सिटीजन कौन सा फॉर्म चुनें और कहां मिल सकती है छूट?

Annual Information Statement (AIS): आपकी कमाई का डिजिटल बहीखाता

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कुछ साल पहले AIS (Annual Information Statement) की शुरुआत की थी। इसे आसान भाषा में समझें तो यह आपके पूरे लेन-देन का एक पूरा रिकॉर्ड होता है। जहां फॉर्म 16 में केवल आपकी नौकरी से हुई कमाई और उस पर कटे टैक्स की जानकारी होती है, वहीं AIS इससे कहीं ज्यादा बड़ी तस्वीर को दिखाता है। नौकरी की सैलरी के अलावा आपकी दूसरी कमाई और लेनदेन इसमें दर्ज होती हैं, जिनकी जानकारी आपकी कंपनी के पास नहीं होती। टैक्स डिपार्टमेंट इस स्टेटमेंट में पूरे साल के दौरान हुए आपके छोटे-बड़े लेन-देन, निवेश और आय से जुड़ी जानकारियों को एक जगह जमा करके रखता है।

जब आप इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाकर अपना AIS डाउनलोड करेंगे, तो आपको वहां कई ऐसी चीजें दिखेंगी जो शायद आपको खुद भी याद न हों। इसमें आपके बैंक खातों से मिलने वाला कुल ब्याज (चाहे वह सेविंग्स अकाउंट का हो या FD का), आपको कंपनियों से मिला डिविडेंड, आपके द्वारा खरीदे या बेचे गए शेयर और म्यूचुअल फंड की पूरी डिटेल, और यहां तक कि अगर आपने साल भर में कोई महंगी गाड़ी या जमीन-जायदाद खरीदी है, तो उसकी जानकारी भी दर्ज होती है। इसे चेक करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी कोई भी छुपी हुई कमाई ITR में भरने से नहीं चूकते।

Taxpayer Information Summary (TIS): पेचीदा आंकड़ों का आसान जवाब

कई बार AIS में इतने सारे ट्रांजैक्शन दर्ज होते हैं कि एक आम टैक्सपेयर के लिए उन्हें समझना और जोड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी उलझन को सुलझाने के लिए टैक्स डिपार्टमेंट ने TIS (Taxpayer Information Summary) की व्यवस्था की है। यह कुछ और नहीं बल्कि आपके AIS का ही एक छोटा और बेहद आसान रूप है। TIS आपके हर कैटेगरी के ट्रांजैक्शन को एक समरी या कुल योग (Summary Value) के रूप में दिखाता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपके पूरे साल में अलग-अलग तारीखों पर शेयर बाजार में 50 ट्रांजैक्शन हुए हैं, तो AIS में उन सभी 50 ट्रांजैक्शन की लंबी चौड़ी लिस्ट होगी। लेकिन TIS में सीधे एक लाइन में लिख दिया जाएगा कि साल भर में आपका कुल शेयर टर्नओवर या सेल वैल्यू कितनी रही। ITR फॉर्म भरते समय आपको इसी TIS में दी गई वैल्यूज का इस्तेमाल करना होता है। यह फॉर्म आपको यह समझने में मदद करता है कि सरकार के डेटाबेस के हिसाब से आपकी कुल सालाना आय किस कैटेगरी में कितनी मानी जा रही है।

Also Read: ITR filing 2026: सीनियर सिटीजन इन इनकम सोर्सेज को जरूर करें डिस्क्लोज, वरना सीधे घर आएगा नोटिस!

ITR फाइल करने से पहले कैसे करें इन तीनों का मिलान?

रिटर्न भरने की शुरुआत करने से पहले आपको एक जासूस की तरह इन तीनों डॉक्यूमेंट्स को सामने रखकर बैठना होगा। सबसे पहले यह देखें कि फॉर्म 16 में जो आपकी सैलरी दिखाई गई है, क्या वही रकम AIS और TIS के सैलरी वाले कॉलम में भी दिख रही है या नहीं। कई बार कंपनियों से डेटा फीड करने में गलती हो जाती है, जिससे दोनों आंकड़ों में अंतर आ जाता है।

इसके बाद, अपने बैंक की पासबुक या स्टेटमेंट निकालें और यह चेक करें कि साल भर में आपको कुल कितना ब्याज मिला है। इस ब्याज की रकम का मिलान TIS में लिखे ‘Interest from Savings Bank/Deposits’ वाले कॉलम से करें। अगर आपके पास कोई और कमाई है जैसे शेयरों से डिविडेंड, तो उसका भी मिलान करें।

अगर आपको लगता है कि AIS या TIS में कोई ऐसी जानकारी दर्ज है जो गलत है,  जैसे आपने कोई शेयर खरीदा ही नहीं लेकिन वह आपके नाम पर दिख रहा है, तो टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर ही आपको इसके खिलाफ ‘फीडबैक’ देने का विकल्प मिलता है।

आप वहां जाकर ‘Information is not correct’ पर टिक कर सकते हैं, जिसके बाद डिपार्टमेंट उसे दुरुस्त करता है। इन तीनों कागजों की रकम को आपस में मिलाने के बाद ही जब आप ITR सबमिट करेंगे, तो आपका रिटर्न पूरी तरह सुरक्षित और नोटिस के खतरे से बाहर रहेगा।

Advertisement
First Published - June 1, 2026 | 4:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement