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KYC compliance: आपको भले उबाऊ लगता हो मगर जरूरी है KYC

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अपने दस्तावेज को समय-समय पर अपडेट करते रहें ताकि केवाईसी में कोई झंझट न हो

Last Updated- March 11, 2024 | 7:26 AM IST
केवाईसी अनुपालन: समय लेने वाला, दोहराव वाला लेकिन आपकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण, KYC compliance: Time consuming, repetitive but critical for your safety

KYC compliance: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर की गई कार्रवाई ने ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) प्रक्रिया को सुर्खियों में ला दिया है। अगर आपको ये प्रक्रिया बोझिल और समय जाया करने वाली लगती है और आप मानते हैं कि विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा केवाईसी ब्योरे को अपडेट करने पर बार-बार जोर देना उबाऊ है तो आइए जानते हैं इसे समय पर पूरा कर लेना क्यों जरूरी है।

एक से ज्यादा केवाईसी क्यों है जरूरी?

केवाईसी के संबंध में ग्राहकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी एक क्षेत्र के भीतर ही या किसी दूसरे क्षेत्र की विभिन्न वित्तीय संस्थानों में उन्हें बार-बार केवाईसी की आवश्यकता पड़ती है, ऐसा नहीं कि एक जगह करा लिया तो सब जगह काम चल जाए। हालांकि पूंजी बाजारों में केवाईसी की प्रक्रिया अधिक सरल होती हैं।

सेबी से पंजीकृत निवेश सलाहकार (आरआईए) फी-ऑनली इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के प्रमुख हर्ष रूंगटा कहते हैं, ‘एक बार किसी केआरए (केवाईसी पंजीकरण एजेंसी) से केवाईसी पूरा हो जाने के बाद यह पूरे प्रतिभूति बाजार में सबके लिए सुलभ और वैध हो जाता है, चाहे वे ब्रोकर हों, डिपॉजिटरी भागीदार हों, निवेश सलाहकार हों या फिर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के तहत आने वाली कोई अन्य इकाई हों।’ उन्होंने कहा कि जानकारी एकत्रित करने के अलावा केआरए इसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए इसे सत्यापित भी करते हैं। मगर बैंकिंग, बीमा और अन्य क्षेत्रों में देखें तो प्रत्येक संगठन में अब भी अलग-अलग केवाईसी प्रक्रिया जरूरी होती है।

इसका एक प्रमुख कारण यह है कि सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइजेशन ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन ऐंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट ऑफ इंडिया (सीईआरएसएआई) द्वारा संचालित की जाने वाली सीकेवाईसी (केंद्रीकृत केवाईसी) पर काम अभी चल ही रहा है। सीकेवाईसी आंकड़ों की गुणवत्ता चिंता का विषय है।

इंडिया लॉ में एसोसिएट पार्टनर तान्या बरनवाल कहती हैं, ‘आंकड़ों की गुणवत्ता और अन्य समस्याओं के कारण रिजर्व बैंक को सीकेवाईसी के माध्यम से आने वाले ग्राहकों को तब तक उच्च जोखिम वाला मानने पर मजबूर होना पड़ा जाए, जब तक उनकी पहचान प्रत्यक्ष सत्यापित नहीं हो जाती है।’

कुछ क्षेत्रों में नियम कायदे ऐसे हैं कि एक संस्थान दूसरे संस्थान द्वारा जारी किए गए केवाईसी पर भरोसा नहीं करता।

यही नहीं, केवाईसी की जरूरत भी सभी क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की होती हैं। जीसीएल ब्रोकिंग में रिसर्च एनालिस्ट वैभव कौशिक बताते हैं, ‘संस्थानों की अलग-अलग तरह की अनुपालन जरूरतें और जोखिम मूल्यांकन होते हैं, जिस कारण केवाईसी सबके लिए एक जैसा नहीं हो सकता।’ केंद्रीकृत केवाईसी रिपॉजटरी में जानकारी की गोपनीयता का भी मसला उठ सकता है।

बार-बार केवाईसी पर क्यों दिया जाता है जोर?

नियमित अंतराल पर केवाईसी नियामकीय जरूरत है। वैकल्पिक परिसंपत्तियों पर केंद्रित निवेश फर्म हेडोनोवा के मुख्य निवेश अधिकारी सुमन बनर्जी कहते हैं, ‘यह वित्तीय धोखाधड़ी, काले धन को सफेद बनाने और आतंकियों को धन जुटाने से रोकने के लिए तैयार किया गया है।’

नियमित केवाईसी पहचान चोरी (अनधिकृत व्यक्ति द्वारा आपके खाते का इस्तेमाल करना) से भी महफूज रखती है। बनर्जी कहते हैं कि बार-बार केवाईसी अपडेट करने से ऐसी असामान्य अथवा संदिग्ध लेनदेन की पहचान में मदद मिलती है, जो ग्राहक आम तौर पर करता ही नहीं है। इसके अलावा जैसे-जैसे नियामकीय ढांचे सख्त हो रहे हैं नियमित समीक्षाएं महत्त्वपूर्ण हो रही हैं।

ग्राहकों की स्थिति भी समय-समय पर बदलती है, जिस कारण भी केवाईसी अपडेट जरूरी होता है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्त अधिकारी विशाल धवन का कहना है, ‘इनमें पते में बदलाव, वैवाहिक स्थिति, निवासी से अनिवासी बनने की स्थिति आदि शामिल हो सकती है।’

कब और कितनी बार केवाईसी अपडेट होगा, यह ग्राहक के जोखिम के आधार पर तय होता है। मध्यस्थ प्रत्येक ग्राहक के लिए एक जोखिम दायरा तय करते हैं। रूंगटा कहते हैं, ‘जिन ग्राहकों को अधिक जोखिम वाला माना जाता है उन्हें अपना केवाईसी बार-बार अपडेट करना पड़ता है।’

क्या होना चाहिए, मिनी या फुल केवाईसी?

कम जोखिम वाले खातों अथवा सीमित सुविधाओं वाले वॉलेट के लिए अक्सर मिनी केवाईसी का उपयोग किया जाता है। इसमें ग्राहक की पहचान का कम से कम ब्योरा चाहिए और यह आम तौर पर सरलता से सत्यापित हो जाता है। बनर्जी कहते हैं, ‘यह तुरंत ग्राहक को जोड़ने की सुविधा देता है। यह एक निश्चित सीमा से कम लेनदेन करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त होता है।’

मगर मिनी केवाईसी खातों में लेनदेन की सीमा कम रहने जैसे कई तरह अंकुश होते हैं और सेवाएं भी सीमित रहती हैं। फुल केवाईसी की व्यापक सत्यापन प्रक्रिया होती है। इसमें सरकार से जारी पहचान पत्र जमा करने और व्यक्तिगत सत्यापन भी शामिल होता है। लेकिन इससे सभी सुविधाओं या सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होती है।

सुमन बनर्जी समझाते हैं, ‘फुल केवाईसी अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है और वित्तीय लेनदेन के लिए नियामकीय मानकों का अनुपालन करता है। इसलिए ग्राहकों को इसके लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।’

सभी दस्तावेज तैयार रखें

कभी कभी दस्तावेज में फर्क (नाम और अन्य विवरण में अंतर) होने के कारण ग्राहकों को केवाईसी अपडेट करने में परेशानी होती है। धवन ने कहा, ‘ये विसंगतियां वैवाहिक स्थिति बदलने अथवा कुछ अन्य कारणों से होती हैं।’ इसलिए अपने सभी प्रमुख दस्तावेज का विवरण अपेडट रखें।

ग्राहक अक्सर केवाईसी को असुविधा के तौर पर देखते हैं, इसलिए इसकी जरूरतों पर सवाल उठाते हैं। मगर यह व्यक्तिगत सुरक्षा और वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। वैभव कौशिक कहते हैं, ‘केवाईसी अपेडट कर निवेशक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे सुरक्षित वातावरण में काम कर रहे हैं।’

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First Published - March 11, 2024 | 7:26 AM IST

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