New Rules From April 2026: नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई अहम नियम लागू होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों, खासकर नौकरीपेशा, टैक्सपेयर्स और निवेशकों पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड, इनकम टैक्स, ITR फाइलिंग और पेट्रोल से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए हैं।
अब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। 1 अप्रैल 2026 से नए पैन या उसमें सुधार के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। इससे प्रक्रिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।
HRA लेने वाले कर्मचारियों के लिए नियम कड़े किए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का पैन नंबर देना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि मकान मालिक परिवार का सदस्य है या नहीं। इसके लिए नया फॉर्म भरना होगा। इसका उद्देश्य फर्जी क्लेम रोकना है।
अब बड़े क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन की जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का बिल डिजिटल तरीके से चुकाने या 1 लाख रुपये से ज्यादा नकद भुगतान करने पर इसकी रिपोर्टिंग जरूरी होगी।
अब टैक्सपेयर्स क्रेडिट कार्ड के जरिए भी टैक्स जमा कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
अगर कंपनी कर्मचारी का क्रेडिट कार्ड बिल भरती है, तो इसे लाभ माना जा सकता है और उस पर टैक्स लग सकता है। लेकिन यदि खर्च आधिकारिक काम के लिए है और रिकॉर्ड मौजूद है, तो टैक्स नहीं लगेगा।
1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। इसमें नियमों को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है और भाषा को आसान बनाया गया है। आय की परिभाषा और वर्गीकरण को भी अपडेट किया गया है। यह नया कानून FY 2026-27 से लागू होगा।
अप्रैल 2026 से आयकर रिटर्न भरने की कुछ तारीखों में बदलाव किया गया है।
FY 2026-27 के लिए FASTag एनुअल पास की फीस बढ़ा दी गई है। इसे 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दिया गया है। यह शुल्क केवल गैर-व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगा जिनके पास वैध FASTag है।
अब पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इन सभी बदलावों का असर लोगों की जेब, निवेश और टैक्स प्लानिंग पर पड़ेगा। खासकर नौकरीपेशा और ज्यादा खर्च करने वालों को अब अपने लेनदेन और टैक्स नियमों को लेकर ज्यादा सावधान रहना होगा।