NPS Account Charges Update: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक जरूरी खबर है। अगर आप भी रिटायरमेंट की प्लानिंग के लिए इस सरकारी स्कीम में निवेश करते हैं, तो जुलाई 2026 से आपकी जेब पर पड़ने वाले बोझ में थोड़ा बदलाव होने जा रहा है। पेंशन फंड रेगुलेटर PFRDA ने NPS खातों पर लगने वाले सालाना मेंटेनेंस चार्ज (AMC) को लेकर नए नियम जारी किए हैं। 29 अप्रैल को जारी इस सर्कुलर का मकसद NPS के अलग-अलग खातों और स्कीम्स के बीच शुल्कों के ढांचे को एक समान बनाना और उन खामियों को दूर करना है, जिनकी वजह से अब तक फीस वसूलने में असमानता थी।
जुलाई से लागू होने वाले ये नियम टियर-I, टियर-II और बंद पड़े (डॉर्मेंट) खातों पर सीधा असर डालेंगे। आइए जानते हैं कि इस बदलाव के बाद आपकी निवेश रणनीति पर क्या असर पड़ेगा और आपको कहां ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
NPS सब्सक्राइबर्स के लिए सबसे बड़ा बदलाव टियर-II अकाउंट को लेकर है। अब तक टियर-I और टियर-II खातों के मेंटेनेंस चार्जेस में कुछ अंतर हुआ करता था, लेकिन अब PFRDA ने दोनों को एक बराबर कर दिया है। इसका मतलब है कि अब टियर-II खाते पर भी वही सालाना मेंटेनेंस चार्ज लगेगा जो उसी सेक्टर (सरकारी या निजी) के टियर-I खाते पर लागू होता है।
जो लोग टियर-II अकाउंट को बचत के एक आसान और फ्लेक्सिबल विकल्प की तरह इस्तेमाल करते थे, उनके लिए अब इसकी लागत टियर-I यानी मुख्य रिटायरमेंट अकाउंट के बराबर हो जाएगी। हालांकि छोटे निवेशकों को थोड़ी राहत भी मिली है। अगर किसी तिमाही के आखिर में आपके टियर-II खाते में 1,000 रुपये या उससे कम रकम है, तो आपसे कोई मेंटेनेंस चार्ज नहीं लिया जाएगा। लेकिन जैसे ही बैलेंस 1,000 रुपये से ऊपर जाएगा, चार्ज लगना शुरू हो जाएगा।
NPS में अलग-अलग स्कीम्स में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए भी PFRDA ने एक अहम बात साफ कर दी है। रेगुलेटर के मुताबिक, अब एक ही PRAN नंबर के अंदर मौजूद हर पेंशन स्कीम को अलग अकाउंट माना जाएगा।
सीधे शब्दों में समझें तो अगर आपने अपना पैसा इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड (C) और सरकारी सिक्योरिटी (G) जैसी अलग-अलग स्कीम्स में लगाया हुआ है, तो हर स्कीम पर अलग से मेंटेनेंस चार्ज लग सकता है। यानी आपका कुल निवेश भले ही वही रहे, लेकिन कई स्कीम्स में पैसा बांटने की वजह से आपकी कुल लागत बढ़ सकती है।
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कई लोग NPS खाता तो खुलवा लेते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उसमें पैसा जमा करना बंद कर देते हैं। ऐसे खातों को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। अगर किसी NPS खाते में लगातार चार तिमाहियों तक कोई योगदान नहीं आता, तो उसे ‘डॉर्मेंट’ यानी निष्क्रिय खाता माना जाएगा।
खाता डॉर्मेंट होने के बाद भी उस पर पूरी तरह छूट नहीं मिलेगी। ऐसे खातों से लागू सालाना मेंटेनेंस चार्ज का 10 फीसदी शुल्क लिया जाएगा। यह चार्ज तब तक लगता रहेगा, जब तक खाता दोबारा एक्टिव नहीं हो जाता। हालांकि यह फीस काफी कम रखी गई है, लेकिन इसका मकसद यह है कि लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े खाते पूरी तरह फ्री न रहें। यानी अब NPS में योगदान बंद करने पर भी निवेशकों को एक छोटा-सा रखरखाव शुल्क देना पड़ सकता है।
अब NPS में मेंटेनेंस चार्ज का कैलकुलेशन हर तिमाही के आखिर में खाते में मौजूद कुल रकम यानी कॉर्पस वैल्यू के आधार पर होगी। इससे फीस तय करने का तरीका ज्यादा साफ और एक जैसा हो जाएगा। हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि अगर वे तिमाही खत्म होने के आसपास खाते में पैसा जमा करते हैं या निकालते हैं, तो इसका उनकी फीस पर थोड़ा असर पड़ सकता है।
सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां (CRAs) हर तिमाही के अंत में इन शुल्कों की वसूली दो तरीकों से करेंगी:
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नए सर्कुलर में निवेशकों को कुछ राहत भी दी गई है। अब PRAN नंबर खोलने का चार्ज सिर्फ पहली बार NPS खाता खोलते समय ही देना होगा। इसके बाद अगर कोई व्यक्ति उसी PRAN के तहत नया Tier-I या Tier-II अकाउंट शुरू करता है, तो उस पर अलग से कोई चार्ज नहीं लगेगा। यानी सब्सक्राइबर्स बिना अतिरिक्त खर्च के अपने NPS निवेश को और बढ़ा सकेंगे।
वहीं NPS-Lite और अटल पेंशन योजना (APY) से जुड़े उन लोगों को भी राहत मिली है, जिनके खातों में बैलेंस जीरो है। ऐसे खातों पर कोई मेंटेनेंस चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को मिलेगा, जो कुछ समय के लिए योगदान नहीं कर पा रहे हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले ये नए नियम NPS सिस्टम को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की कोशिश माने जा रहे हैं। ऐसे में NPS सब्सक्राइबर्स के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि इन बदलावों का उनकी निवेश रणनीति पर क्या असर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब Tier-II अकाउंट पहले की तरह कम लागत वाला विकल्प नहीं रहेगा, क्योंकि उसके चार्ज अब Tier-I के बराबर हो जाएंगे। इसके अलावा, अगर आपने एक ही PRAN के अंदर कई स्कीम्स में निवेश कर रखा है, तो आपकी कुल फीस बढ़ सकती है। वहीं, लंबे समय तक योगदान बंद रखने पर भी कुछ शुल्क देना पड़ सकता है। पहली नजर में ये बदलाव छोटे लग सकते हैं, लेकिन रिटायरमेंट जैसे लंबे निवेश में फीस में थोड़ा सा बदलाव भी समय के साथ आपके कुल रिटर्न पर बड़ा असर डाल सकता है।