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हॉस्पिटल बिल का झंझट खत्म! NPS में अब सीधे बैंक खाते में आएगा मेडिकल भत्ता, जानें नए नियम

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NPS पेंशनर्स के लिए अब मेडिकल भत्ता पाना आसान हो गया है। बिना बिल जमा किए हर तिमाही सीधे बैंक खाते में पैसा आएगा, बस सालाना लाइफ सर्टिफिकेट जरूरी है

Last Updated- April 27, 2026 | 3:43 PM IST
National Pension System (NPS)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए प्रक्रिया को आसान बना दिया है। अब फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) यानी चिकित्सा भत्ता पाने का सिस्टम आसान और ऑटोमैटिक कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने 16 अप्रैल को जारी अपने नए आदेश में प्रक्रिया को आसान बना दिया है। अब बुजुर्ग पेंशनर्स को फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) के लिए न तो बार-बार मेडिकल बिल जमा करने पड़ेंगे और न ही दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे। पूरी व्यवस्था बैंक के जरिए होगी और यह भत्ता सीधे उनके बैंक खाते में आ जाएगा।

बिना बिल जमा किए हर तीन महीने में आएगा पैसा

मंत्रालय ने आदेश में बताया है कि अब इस भत्ते का भुगतान बैंकों के सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेंटर (CPPC) के जरिए होगा। यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक रहेगा, इसलिए पेंशनर्स को कोई बिल या दावा देने की जरूरत नहीं होगी। प्रक्रिया ऐसी होगी कि सेंट्रल पेंशन एकाउंटिंग ऑफिस (CPAO) पहले एलिजिबिलिटी की जांच करेगा और मंजूरी मिलने पर बैंक को स्पेशल सील अथॉरिटी (SSA) जारी करेगा। इसके आधार पर बैंक का CPPC डिपार्टमेंट तय दर के अनुसार हर तीन महीने में मेडिकल भत्ते की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा कर देगा।

Also Read: NPS में पैसा लगा रहे हैं? ये 3 गलतियां कर दीं तो रिटायरमेंट प्लान हो सकता है बर्बाद

सालाना लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना है जरूरी

सरकार ने भले ही बिल जमा करने की प्रक्रिया खत्म कर दी है, लेकिन एक जरूरी नियम अब भी लागू रहेगा। पेंशनभोगियों को हर साल नवंबर में अपना ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ यानी जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा, जिसे वे डिजिटल तरीके से या बैंक जाकर दे सकते हैं। अगर यह सर्टिफिकेट नवंबर में जमा नहीं किया गया, तो दिसंबर से पेंशन और मेडिकल भत्ते के भुगतान पर असर पड़ सकता है। वहीं, अगर कोई पेंशनर्स अपना बैंक या शाखा बदलता है, तो ट्रांसफर की प्रक्रिया CPAO के मौजूदा नियमों के अनुसार ही होगी।

मृत्यु के बाद परिवार के लिए क्या है नियम

सरकार ने परिवारों के लिए प्रक्रिया भी आसान रखी है। अगर किसी पेंशनर्स की मृत्यु हो जाती है और पात्र परिवार के सदस्य का नाम पहले से दर्ज है, तो वे मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ सीधे बैंक में आवेदन कर सकते हैं और उन्हें मेडिकल भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा। वहीं, अगर नाम रिकॉर्ड में नहीं है, तो संबंधित डिपार्टमेंट के जरिए नई मंजूरी लेनी होगी।

इसके अलावा, पेंशनभोगियों के पास यह विकल्प भी है कि वे फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) की जगह CGHS की OPD सुविधा चुन सकते हैं। इस व्यवस्था में बैंक पहले भत्ते का भुगतान करेंगे और बाद में सरकार उन्हें इसकी प्रतिपूर्ति करेगी। इसका मकसद प्रक्रिया को आसान बनाना और पेंशनभोगियों को कागजी झंझट से राहत देना है।

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First Published - April 27, 2026 | 3:43 PM IST

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