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Explainer: अब पेंशन की बचत से भरें अस्पताल का बिल! ‘NPS Swasthya’ क्या है और यह कैसे काम करेगा

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NPS Swasthya के जरिए अब आप पेंशनर्स पेंशन फंड से दवा और इलाज का खर्च निकाल सकते हैं। इसमें निवेश के साथ आपको हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा भी मिलेगी

Last Updated- April 10, 2026 | 5:05 PM IST
senior citizen
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

एक वक्त था जब पेंशन सिर्फ रिटायरमेंट के बाद के खर्चों के लिए हुआ करती थी, लेकिन वक्त के साथ इसमें भी कई बदलाव हो रहे हैं। अब पेंशन अब सिर्फ बुढ़ापे की सुरक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इलाज का सहारा भी बन सकती है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) की नई पहल ‘NPS Swasthya’ इस सोच को हकीकत में बदल रही है। अब आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, दवा और अस्पताल के खर्च में काम आ सकती है। बढ़ती महंगाई और हेल्थकेयर कॉस्ट के बीच यह स्कीम एक ऐसा स्मार्ट फाइनेंशियल टूल बनकर उभर रही है, जो भविष्य की सुरक्षा के साथ वर्तमान की चिंता भी कम करती है। यानी पेंशन अब सिर्फ कल के लिए नहीं, आज के लिए भी है।

NPS Swasthya आखिर है क्या?

NPS Swasthya दरअसल नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंदर एक खास सेक्टर स्कीम है। यह मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत चलती है। जनवरी 2026 में शुरू हुए पहले पायलट के बाद अब अप्रैल 2026 में PoC 2 (Proof of Concept) आ गया है, जिसमें और सख्त नियम और बेहतर सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

इस स्कीम का सीधा मकसद है कि लोग रिटायरमेंट के लिए बचत करते हुए अपने मेडिकल खर्चों के लिए भी अलग से पैसा तैयार कर सकें। PFRDA के मुताबिक, भारत में 2026 तक हेल्थकेयर का खर्च 11.5 से 14 फीसदी तक बढ़ सकता है, जो सामान्य महंगाई से काफी ज्यादा है। ऐसे में कई बार लोगों की पेंशन की बचत इलाज में ही खर्च हो जाती है। NPS Swasthya इसी दिक्कत को दूर करने के लिए शुरू की गई है।

यह पूरी तरह से वॉलंटरी और कंट्रीब्यूटरी स्कीम है, यानी इसमें शामिल होना आपकी मर्जी पर है और पैसा भी आपको खुद ही जमा करना होता है। कोई भी भारतीय नागरिक इसमें जुड़ सकता है। इसमें जो पैसा आप डालते हैं, वह मार्केट से जुड़ा होता है और समय के साथ बढ़ता है, जिससे रिटायरमेंट के समय मदद मिलती है। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर बीच में मेडिकल खर्च के लिए कुछ पैसा निकाला भी जा सकता है। PoC 2 में हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े फायदे जरूरी कर दिए गए हैं, ताकि यह स्कीम और मजबूत बन सके।

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स्कीम में शामिल होने के लिए क्या करें?

इस स्कीम में शामिल होने के लिए सबसे पहले आपको NPS Swasthya अकाउंट खोलना होगा। अगर आपके पास पहले से NPS का कॉमन अकाउंट नहीं है, तो उसे भी बनाना जरूरी है। नॉन-गवर्मेंट सेक्टर के जो सब्सक्राइबर 40 साल से ऊपर हैं, वे अपने रेगुलर NPS अकाउंट से अपनी और अपने एम्प्लॉयर की कंट्रीब्यूशन का 30 फीसदी तक हिस्सा NPS Swasthya अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं।

ऑनबोर्डिंग के लिए कम से कम 25,000 रुपये का शुरुआती निवेश करना होता है। इतना पैसा डालते ही आप स्कीम के फायदे लेने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं। इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यानी NPS के नियमों के मुताबिक आप जितना चाहें उतना पैसा डाल सकते हैं।

स्कीम को मजबूत बनाने के लिए कई पार्टनर्स जुड़े हुए हैं। इसके तहत मेडी असिस्ट हेल्थकेयर सर्विसेज (MAven ऐप) क्लेम मैनेजमेंट और ऐप से जुड़ी सेवाएं संभाल रही है। CAMS KRA सब्सक्राइबर ऑनबोर्डिंग और KYC की प्रक्रिया में मदद करता है। पेंशन फंड मैनेजमेंट के लिए टाटा पेंशन फंड और एक्सिस पेंशन फंड जिम्मेदार हैं। वहीं हेल्थ इंश्योरेंस के लिए आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस ग्रुप हेल्थ सुपर टॉप अप कवर दे रहा है। PoC 2 में इस इंश्योरेंस को लेना जरूरी कर दिया गया है और इसका प्रीमियम सीधे आपके NPS Swasthya अकाउंट से ही कट जाता है।

MAven ऐप के जरिए पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, जिसमें KYC, क्लेम और पैसा निकालने की सुविधा शामिल है। इसके साथ ही पूरे देश में 15,500 से ज्यादा अस्पतालों का नेटवर्क भी उपलब्ध है।

मेडिकल खर्चों के लिए पैसे निकालने के नियम क्या हैं?

यहीं पर इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा मिलता है। आप अपने खुद के जमा किए गए पैसे का 25 फीसदी तक हिस्सा मेडिकल खर्चों के लिए निकाल सकते हैं, जिसे नेट एलिजिबल बैलेंस कहा जाता है। यह पैसा OPD, दवाइयों, जांच या अस्पताल में भर्ती जैसे खर्चों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पहला पार्शियल विड्रॉल तभी किया जा सकता है जब अकाउंट में कम से कम 50,000 रुपये जमा हो जाएं। इसके बाद आपको दोबारा पैसे निकालने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, और जब भी जरूरत हो, आप बार-बार पैसे निकाल सकते हैं।

अगर किसी एक बार में मेडिकल खर्च बहुत ज्यादा हो जाए और 25 फीसदी की सीमा से ऊपर चला जाए, तो ऐसी स्थिति में आप 100 फीसदी रकम निकालकर प्रीमेच्योर एग्जिट भी ले सकते हैं, लेकिन यह सुविधा सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी के लिए है। निकाला गया पैसा सीधे हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर या हेल्थ टेक कंपनी को जाता है और बिल सेटल होने के बाद बचा हुआ पैसा आपके कॉमन स्कीम अकाउंट में वापस आ जाता है।

इंश्योरेंस का प्रीमियम भी इसी खाते से पार्शियल विड्रॉल के जरिए कटता है। क्लेम की पूरी प्रक्रिया साफ और आसान रखी गई है, जिसमें क्या कवर होगा, क्या नहीं होगा और शिकायत कैसे करनी है, यह सब पहले से स्पष्ट कर दिया जाता है।

इस स्कीम की खास बात यह है कि पेंशन के लिए किया गया निवेश पूरी तरह लॉक नहीं रहता। जरूरत पड़ने पर आप उसमें से पैसा निकालकर तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि बाकी रकम मार्केट रिटर्न के साथ बढ़ती रहती है। NPS और APY को मिलाकर देश में करीब 9.64 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं और मार्च 2026 तक इनका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 16.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। NPS Swasthya इसी बड़े सिस्टम को और मजबूत बनाने का काम कर रहा है।

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First Published - April 10, 2026 | 5:05 PM IST

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