facebookmetapixel
Advertisement
M&M का EV प्लान! सिर्फ नई कार नहीं, पूरी फैक्ट्री बदल रही कंपनीराज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिका

RBI MPC MEET: उठाना पड़ेगा खर्च का बोझ, अभी UPI पर मिल रही सब्सिडी

Advertisement

मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि यूपीआई पर आने वाली लागत का भुगतान किया जाना चाहिए, यह ज्यादा जरूरी नहीं है कि कौन इस लागत का बोझ उठा रहा है।

Last Updated- August 06, 2025 | 10:43 PM IST
UPI Transactions may 2026

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की स्थिरता के लिए जरूरी है कि इस पर आने वाली लागत कोई न कोई वहन करे। उन्होंने कहा कि सरकार इस समय इन लागतों पर सब्सिडी दे रही है, जिससे अंतिम उपभोक्ता इस सेवा का मुफ्त में इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने यह भी साफ किया कि उपयोगकर्ताओं को यूपीआई लेनदेन के लिए भुगतान नहीं करना होगा।

मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि यूपीआई पर आने वाली लागत का भुगतान किया जाना चाहिए, यह ज्यादा जरूरी नहीं है कि कौन इस लागत का बोझ उठा रहा है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘इसकी लागतें हैं। किसी न किसी को तो इसे चुकाना ही होगा। कौन चुकाता है, यह महत्त्वपूर्ण है, लेकिन उतना महत्त्वपूर्ण नहीं, जितना कि बिल चुकाया जा रहा है। (यूपीआई की) स्थिरता के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत रूप से, कोई न कोई इसका भुगतान करे।’
इसके पहले एक सार्वजनिक मंच पर मल्होत्रा ने कहा था कि यूपीआई भुगतान व्यवस्था के लिए सरकार विभिन्न हिस्सेदारों को सब्सिडी दे रही है, लेकिन इसकी कुछ लागत का भुगतान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘मेरा कहना यह है कि इस समय भी यह मुफ्त नहीं है। कोई इसका भुगतान कर रहा है, सरकार इस पर सब्सिडी दे रही है। लेकिन, कहीं न कहीं से इस लागत का भुगतान किया जाना चाहिए। सरकार की नीति से यूपीआई के विस्तार को बढ़ाने में मदद मिली है।’

केंद्र सरकार हर साल यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए पियर-टु-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड से लेनदेन के लिए एक निश्चित राशि देती है। यह राशि बैंकों और फिनटेक कंपनियों को हर वित्त वर्ष के आखिर में दी जाती है।

Advertisement
First Published - August 6, 2025 | 10:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement