भारत में निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक विकल्पों से आगे बढ़कर निवेशक नए रास्ते तलाश रहे हैं। केयरएज एडवाइजरी एंड रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट सेक्टर पिछले दशक में तेजी से उभरा है और अब एक बड़े बदलाव के दौर में पहुंच चुका है।
दिसंबर 2025 तक इस सेक्टर का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट 152 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो पिछले 10 साल में दोगुने से ज्यादा है। लेकिन असली कहानी अभी बाकी है। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 276 अरब डॉलर हो सकता है, यानी आने वाले सालों में तेज ग्रोथ की पूरी संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में अभी भी अल्टरनेटिव निवेश की हिस्सेदारी जीडीपी का सिर्फ 4% है, जबकि विकसित देशों में यह 10% से ज्यादा है। यही अंतर इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा मौका बनकर सामने आ रहा है।
| निवेश विकल्प | FY23 (%) | FY25 (%) |
|---|---|---|
| टर्म डिपॉजिट | 40.5% | 44.7% |
| म्युचुअल फंड (MF) | 15.1% | 20.7% |
| PMS | 2.7% | 3.2% |
| SEBI पंजीकृत अल्टरनेटिव | 3.2% | 4.2% |
भारत में अमीर निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 से 2027 के बीच हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या दोगुनी हो सकती है। ये निवेशक अब सिर्फ फिक्स्ड डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि बेहतर रिटर्न और विविधता की तलाश में हैं।
इस सेक्टर में अब घरेलू निवेशकों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। दिसंबर 2025 तक कुल निवेश का करीब 66% हिस्सा भारतीय निवेशकों का हो गया है। वहीं विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी जरूर है, लेकिन उनका निवेश अब भी बढ़ रहा है। यानी भारत का बाजार अब खुद की ताकत पर आगे बढ़ रहा है।
| देश | 2022 | 2027 (अनुमान) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| अमेरिका | 251.7 लाख | 368.8 लाख | 7.9% |
| चीन | 103.8 लाख | 208.1 लाख | 14.9% |
| भारत | 7.9 लाख | 16.5 लाख | 15.8% |
| विश्व | 695.4 लाख | 1090.9 लाख | 9.4% |
अल्टरनेटिव निवेश में अब प्राइवेट क्रेडिट की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह है स्थिर रिटर्न और कम जोखिम। बाजार की अनिश्चितता के बीच निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर झुक रहे हैं जहां पैसा ज्यादा सुरक्षित और रिटर्न ज्यादा स्थिर हो।
इन निवेशों का रुख अब भविष्य के सेक्टरों की तरफ है। फिनटेक, हेल्थटेक, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में तेजी से पैसा लगाया जा रहा है। यानी निवेशक अब सिर्फ सुरक्षित नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर पर दांव लगा रहे हैं।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक अनिश्चितता इस सेक्टर के लिए चुनौती बन सकते हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई और ब्याज दरों में बदलाव निवेश को प्रभावित कर सकते हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट का मानना है कि भारत का अल्टरनेटिव निवेश सेक्टर मजबूत स्थिति में है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और नई निवेश संभावनाएं इसे आगे बढ़ाने में मदद करेंगी।
सीधी बात करें तो भारत का अल्टरनेटिव निवेश सेक्टर अब एक नए मोड़ पर खड़ा है। तेजी से बढ़ती दौलत, बदलती सोच और नए अवसर इसे आगे धकेल रहे हैं। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले सालों में यह सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन सकता है।