वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास परियोजनाओं से जुड़े निर्माता (डेवलपर) बढ़ती मांग के बीच कारोबार का दायरा बढ़ाते हुए नए शहरों में दस्तक देने लगे हैं। समाचार माध्यमों में हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार आशियाना हाउसिंग, मनसुम सीनियर लिविंग और प्राइमस सीनियर लिविंग जैसी कंपनियां परियोजनाओं के लिए जमीन ले रही हैं और अपने छोटे शहरों में अपनी परियोजनाओं का विस्तार कर रही हैं।
ऐसी परियोजनाओं के लिए बढ़ रही मांग का एक प्रमुख कारण 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले लोगों की आबादी में इजाफा है। कोलियर्स के राष्ट्रीय अनुसंधान निदेशक विमल नादर कहते हैं,‘जीवन प्रत्याशा में वृद्धि से आवास, चिकित्सा सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाली संगठित वरिष्ठ नागरिक आवासीय सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ गई है।’
मनसुम सीनियर लिविंग के सह-संस्थापक अनंतराम वी वरायुर का कहना है कि संयुक्त परिवारों के बजाय अब एकल परिवारों के बढ़ते चलन से कई बुजुर्गों की देखभाल करने वाले लोगों की लगातार कमी आ रही है। वरायुर कहते हैं कि युवा पीढ़ी के अन्य शहरों एवं देशों में पलायन ने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के लिए सुरक्षित, पेशेवर रूप से प्रबंधित स्थानों की आवश्यकता बढ़ गई है। सेरेन कम्युनिटीज बाय कोलंबिया पैसिफिक के निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजगोपाल जी कहते हैं,‘दुनिया से वास्ता बढ़ने के बाद अब कई भारतीय विकसित देशों में प्रचलित वरिष्ठ नागरिकों के लिए तैयार आवासीय ढांचों को यहां भी आजमा रहे हैं।’
कोविड-19 महामारी ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ा दी है। फरांदे स्पेसेस के प्रबंध निदेशक आकाश फरांदे कहते हैं,‘इस महामारी के बाद अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के जोखिम अधिक उजागर हो गए हैं और स्वास्थ्य-केंद्रित सामुदायिक जीवन का महत्त्व बढ़ गया है।’ आज के सेवानिवृत्त लोगों की बदलती अपेक्षाएं भी ऐसी सुविधाओं को बढ़ावा दे रही हैं। नादर कहते हैं,‘खर्च करने योग्य अधिक आय और स्वास्थ्य एवं कल्याण पर अधिक ध्यान देने से ऐसी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है।’
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनी आवासीय आवासीय परियोजनाएं चौबीसों घंटे सुरक्षा, नियंत्रित प्रवेश और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करती हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवा सहायता भी उपलब्ध है। वरायूर कहते हैं,‘निवासियों को चिंता मुक्त वातावरण का लाभ मिलता है जहां साफ-सफाई, भोजन और मरम्मत का खास ध्यान रखा जाता है।’ ये परियोजनाएं उम्र के अनुकूल सुविधाओं से पूरी तरह लैस हैं। जे एस्टेट्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अनिल गोदारा कहते हैं, ‘सामुदायिक स्थान और संगठित कार्यक्रम अकेलापन दूर करने में सहायक होते हैं।’
हालांकि, ऐसी परियोजनाओं का एक कमजोर पक्ष यह है कि यहां रहने पर आने वाला मासिक खर्च काफी अधिक होता है। सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार एवं सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक अभिषेक कुमार कहते हैं,‘यह लागत अक्सर समय के साथ बढ़ती ही जाती हैं।’ इन संपत्तियों की कीमतों में वृद्धि भी सीमित हो सकती है क्योंकि रीसेल मार्केट (पुनर्विक्रय बाजार) एक विशिष्ट आयु वर्ग तक सीमित है। ऐसे बुजुर्ग की संतान अगर आयु से जुड़ी शर्त पूरी नहीं करते हैं तो उन्हें विरासत में मिलने वाली संपत्ति में रहने से रोका जा सकता है। कुमार कहते हैं, ‘डेवलपर्स कभी-कभी भारी हस्तांतरण शुल्क या लाभ-साझाकरण शर्तें लगा देते हैं जिससे उत्तराधिकारियों के वित्तीय लाभ कम हो जाते हैं।’
डेवलपर और ऑपरेटर की करें पड़ताल
स्वामित्व से जुड़ी बातें, रेरा पंजीकरण और देरी या किसी तरह की त्रुटि की स्थिति में शिकायत निपटान की प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों की जांच करें। ये भी देख लें कि ऐसी परियोजनाओं को जरूरी मंजूरी मिल चुकी है या नहीं। परियोजनाएं पूरी करने में डेवलपर के पिछले काम-काज की पड़ताल अवश्य कर लें। गोदारा कहते हैं,‘सेवा-उन्मुख आवासीय आवासों के निर्माण में उनकी क्षमता का मूल्यांकन करें।’
खरीदारों को यह आकलन करना चाहिए कि ऑपरेटर सेवाओं को लगातार प्रदान करने में कितने सक्षम हैं। वरायुर कहते हैं,‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासीय परियोजना का मूल्यांकन करते समय परिचालन क्षमता निर्माण गुणवत्ता जितनी ही महत्त्वपूर्ण है’। अधिक जानकारी के लिए वहां रहने वाले मौजूदा निवासियों से बात भी करें।
राजगोपाल सुझाव देते हैं कि खरीदारों को दी जाने वाली सेवाओं की समीक्षा करनी चाहिए और रखरखाव और बार-बार होने वाले खर्च से जुड़ी सभी जानकारियां भी जुटानी चाहिए। नादर कहते हैं,‘सहायक आवासीय सुविधाओं में खरीदारों को अनुबंध के तहत दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।’
इसे लेकर भी आश्वस्त हो लें कि परियोजना का किसी प्रतिष्ठित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ दीर्घकालिक अनुबंध हो। गोदारा कहते हैं कि खरीदारों को संचालन में पारदर्शिता और सेवाओं की दीर्घकालिक स्थिरता की जांच करनी चाहिए।
कुमार कहते हैं,‘उन्हें बिलिंग में पारदर्शिता और डेवलपर की अन्य वरिष्ठ नागरिक आवासीय परियोजनाओं में शुल्क वृद्धि के रिकॉर्ड का भी आकलन करना चाहिए।’ रीसेल और उत्तराधिकार संबंधी शर्तों की भी गहन पड़ताल होनी चाहिए।