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टैक्स सेविंग का नया ‘गेम चेंजर’? मील वाउचर पर ₹200 की छूट, जानें कैसे बढ़ेगी आपकी टेक-होम सैलरी

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सरकार ने मील वाउचर टैक्स छूट ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दी है। इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ेगी और सालाना ₹1.05 लाख तक का टैक्स-फ्री लाभ मिलेगा

Last Updated- April 07, 2026 | 7:06 PM IST
Meal
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

महंगाई के दबाव के बीच सैलरी पाने वालों के लिए न्यू इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत एक राहतभरी खबर आई है, जो सीधे उनके टेक-होम पे को बढ़ा सकती है। सरकार ने मील वाउचर पर टैक्स छूट को चार गुना बढ़ाकर प्रति भोजन 50 रुपये से 200 रुपये कर दिया है, जिससे अब कर्मचारियों की सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स से बाहर रहेगा।

खास बात यह है कि यह फायदा ओल्ड और न्यू दोनों टैक्स रिजीम में मिलेगा, जिससे ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले टैक्स ईयर से प्रभावी होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव न केवल टैक्स बचाएगा, बल्कि मध्यम वर्ग के खर्च करने की क्षमता को भी बढ़ाएगा।

टैक्स कैलकुलेशन में बड़ी बचत

अब तक कर्मचारियों को मिलने वाले मील वाउचर पर प्रति भोजन 50 रुपये की मामूली छूट मिलती थी, जो बढ़ते खाने-पीने के खर्च के सामने काफी कम थी। अब इसे सीधे 400% बढ़ा दिया गया है।

इस पर विस्तार से जानकारी देते हुए ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर (टैक्स), ऋचा साहनी कहती हैं, “सरकार ने मील वाउचर की टैक्स-फ्री वैल्यू में बड़ी बढ़ोतरी की है। यदि हम वर्क डे के दौरान दो बार के भोजन का हिसाब लगाएं (2 मील * ₹200 * 22 दिन * 12 महीने), तो अब कर्मचारी सालाना 1.05 लाख रुपये तक का बेनेफिट ले सकेंगे। पहले के नियमों के हिसाब से यह पैसा केवल 26,400 रुपये सालाना बैठता था।”

ऋचा के मुताबिक अब यह फायदा हर कर्मचारी को मिलेगा, चाहे वह ओल्ड टैक्स रिजीम चुनें या न्यू। अच्छी बात यह है कि मील वाउचर पर मिलने वाली यह रकम आपकी टैक्सेबल सैलरी में नहीं जुड़ती, यानी इस पर टैक्स नहीं लगता। इसी वजह से आपका कुल टैक्स अपने-आप कम हो जाता है और आपको सीधा फायदा मिलता है।

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मध्यम आय वर्ग के लिए क्यों है यह ‘गेम चेंजर’?

आमतौर पर टैक्स बचाने के लिए लोगों को इंश्योंरेंस या इनवेस्टमेंट प्लान में पैसा लंबे समय के लिए फंसाना पड़ता है। लेकिन मील वाउचर की यह छूट अलग है। यह कंजम्पशन लिंक्ड है, यानी इसमें आपको कहीं पैसा निवेश करने की जरूरत नहीं है, सिर्फ अपने खर्च करने के तरीके को थोड़ा बदलना होता है और आपको टैक्स में फायदा मिलने लगता है।

हंगरबॉक्स (HungerBox) के CFO रोहन मंधानिया के मुताबिक 50 रुपये से 200 रुपये तक की बढ़ोतरी सिर्फ छोटा बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ा स्ट्रक्चरल चेंज है। उनका कहना है कि 8 लाख रुपये से 15 लाख रुपये सालाना कमाने वालों के लिए, जहां निवेश के विकल्प अक्सर सीमित रहते हैं, यह छूट एक आसान और काम की राहत देती है। 30% टैक्स ब्रैकेट में आने वाले कर्मचारी के लिए इससे सालाना करीब 31,000 रुपये की टैक्स बचत हो सकती है, जो लगभग आधे महीने की सैलरी के बराबर बैठती है।

टेक-होम सैलरी पर असर: हर महीने ₹2,000 से ज्यादा का फायदा

इस नियम की सबसे खास बात यह है कि इसका असर सीधे आपकी मासिक सैलरी पर दिखता है। आसान शब्दों में समझें तो अगर आपकी कंपनी इस छूट को आपके सैलरी स्ट्रक्चर में जोड़ देती है, तो हर महीने आपके बैंक खाते में आने वाली रकम बढ़ सकती है।

ऋचा साहनी के मुताबिक, 30% टैक्स स्लैब में आने वाले व्यक्ति को सालाना करीब 25,000 रुपये की बचत हो सकती है, जिसका असर हर महीने की टेक-होम सैलरी में लगभग 2,000 रुपये की बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है।

वहीं रोहन मंधानिया बताते हैं कि यह छूट प्रति मील 200 रुपये के हिसाब से है, न कि पूरे दिन के लिए, इसलिए अगर कोई कर्मचारी दिन में दो बार भोजन करता है तो वह इसका पूरा फायदा उठा सकता है।

कंपनियों के लिए चुनौती और मौका: सैलरी स्ट्रक्चर (CTC) में बदलाव

इस बदलाव के बाद HR और पेरोल टीमों को कर्मचारियों के CTC स्ट्रक्चर को नए सिरे से तैयार करना पड़ सकता है। रोहन मंधानिया के मुताबिक यह ऐसा मौका है जब कंपनी पर कोई अतिरिक्त खर्च डाले बिना कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ाई जा सकती है।

उनका कहना है कि अब कंपनियां अपने CTC में मील अलाउंस को ज्यादा अहमियत देंगी और इसे प्रीपेड मील कार्ड या डिजिटल कैफेटेरिया प्लेटफॉर्म के जरिए लागू करेंगी। जो कंपनियां पहले इसे सिर्फ एक सुविधा मानती थीं, अब वही इसे कर्मचारियों के लिए एक अहम वैल्यू बेनिफिट के तौर पर पेश करेंगी।

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सावधानी: इन नियमों का पालन है जरूरी

टैक्स छूट का दावा करते समय कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखना जरूरी है, वरना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है।

  • डिजिटल माध्यम जरूरी: रोहन मंधानिया के अनुसार, यह छूट केवल डिजिटल मील कार्ड, वाउचर या कंपनी की कैंटीन में भोजन करने पर ही मिलेगी। नकद में लिए गए पैसे पर यह छूट लागू नहीं होगी।

  • Form 16 में सही एंट्री: कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके Form 16 के ‘Part B’ में यह राशि टैक्स-फ्री बेनेफिट के रूप में दिखाई गई हो। नोट: (Form 16 अब नए टैक्स ईयर में Form 130 बन जाएगा)

  • सीमा: यह वाउचर केवल खाने-पीने की जगहों (Eating Joints) पर ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं और इसमें अल्कोहल शामिल नहीं होना चाहिए।

डिजिटल खर्च को बढ़ावा, फूड सर्विस सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

दोनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नियम का असर सिर्फ टैक्स बचत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश में खर्च करने के तरीके को भी बदल सकता है। इससे कैश में होने वाला खर्च कम होगा और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिलेगा।

ऋचा साहनी के मुताबिक यह फैसला बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में आई तेजी को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक जरूरी कदम है। वहीं रोहन मंधानिया का कहना है कि इससे भारत में संगठित फूड सर्विस और इंस्टिट्यूशनल कैटरिंग सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा और इस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।

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First Published - April 7, 2026 | 6:27 PM IST

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