एक सफल करियर की तलाश और सुनहरे भविष्य के सपने अक्सर भारतीयों को सात समंदर पार ले जाते हैं। न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतें हों या दुबई की चमकती सड़कें, एक NRI अपनी मेहनत से दुनिया जीतने में तो लगा रहता है, लेकिन उसका दिल हमेशा अपने पीछे छूटे परिवार और भारत में मौजूद जिम्मेदारियों के लिए धड़कता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या परदेस में रहकर अपनों की सुरक्षा का घेरा विदेशी होना चाहिए?
एक्सपर्ट का मानना है कि अपनी जड़ों से दूर रहकर भी भारतीय मूल के निवासी (NRIs) और OCI कार्डधारक अपनी सुरक्षा के लिए भारत पर ही भरोसा जता रहे हैं। जब बात अपने परिवार के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने की आती है, तो भारत में मिलने वाले टर्म इंश्योरेंस प्लान बेहतर साबित होता है।
गो डिजिट लाइफ इंश्योरेंस की वाइस प्रेसिडेंट (अंडरराइटिंग) जयंती जयराम कहती हैं, “भारत में टर्म इंश्योरेंस लेना ऐसा फैसला है, जो आपके परदेशी जीवन को भारत में मौजूद आपकी जड़ों से जोड़ता है। बाहर के देशों में बीमा काफी महंगा होता है, जिससे अपने परिवार के लिए सुरक्षा तैयार करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, भारत की पॉलिसी आपको कम प्रीमियम, टैक्स में फायदा और यहां की जिम्मेदारियों के हिसाब से बेहतर फिट बैठती है।”
भारत में टर्म इंश्योरेंस चुनने की सबसे बड़ी वजह इसका सस्ता होना है। जयंती जयराम के मुताबिक, विकसित देशों के मुकाबले भारत में टर्म प्लान करीब 40% से 60% तक सस्ता मिल सकता है।
जयराम बताती हैं, “NRI को इसका सीधा फायदा मिलता है। वे दूसरे देशों में महंगी करेंसी में कमाते हैं और यहां भारतीय दरों पर प्रीमियम भरते हैं। इससे कम खर्च में उन्हें कई करोड़ रुपये का बड़ा लाइफ कवर मिल जाता है। आमतौर पर 18 से 65 साल की उम्र के NRI, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है और जिनके पास यूनिवर्सिटी डिग्री है, इस किफायती प्लान का फायदा उठा सकते हैं।”
ज्यादातर NRI के कुछ आर्थिक हित भारत से जुड़े होते हैं, जैसे होम लोन, एजुकेशन लोन या भारत में रह रहे बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल। जयंती जयराम का मानना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय पॉलिसी ज्यादा कारगर होती है क्योंकि यह सीधे भारतीय खाते में क्लेम का पेमेंट करती है, जिससे प्रक्रिया आसान हो जाती है।
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पॉलिसी धारक अपने NRE या NRO अकाउंट के जरिए प्रीमियम भर सकते हैं। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि NRE अकाउंट का उपयोग करना बेहतर है क्योंकि इससे बाद में बीमा का पैसा वापस विदेश ले जाना आसान होता है। इसके अलावा, यदि आप भविष्य में स्थायी रूप से भारत लौटते हैं या अपना पता बदलते हैं, तब भी आपकी पॉलिसी पूरी तरह प्रभावी रहती है।
भारतीय टर्म इंश्योरेंस सिर्फ सुरक्षा देने वाला प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि टैक्स बचाने का भी अच्छा तरीका है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत आप जो प्रीमियम भरते हैं उस पर टैक्स छूट मिलती है, और सेक्शन 10(10D) के तहत अगर पॉलिसी होल्डर की मौत हो जाती है तो मिलने वाला पूरा पैसा टैक्स-फ्री होता है। आजकल बीमा कंपनियां ग्राहकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से नए फीचर्स भी ला रही हैं।
जयंती जयराम ‘स्मार्ट एग्जिट’ जैसे फीचर का जिक्र करती हैं, जो डिजिट ग्लो प्लस जैसे प्लान में मिलता है। इसके जरिए पॉलिसीहोल्ड जीवन के किसी तय समय पर, अगर उन्हें कवर की जरूरत नहीं लगती, तो पॉलिसी बंद करके अब तक भरा गया पूरा प्रीमियम वापस ले सकते हैं। इस वजह से यह NRI के लिए एक सुरक्षित और फायदेमंद निवेश विकल्प बन जाता है।
अब विदेश में रहते हुए भारत से बीमा लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। टेक्नोलॉजी की मदद से पूरी KYC प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी की जा सकती है, जिसमें पासपोर्ट, OCI कार्ड, वीजा और वर्क परमिट जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट शामिल होते हैं।
जयंती जयराम के मुताबिक अब मेडिकल जांच के लिए भी ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती। ज्यादातर जरूरतें वीडियो कंसल्टेशन के जरिए ही पूरी हो जाती हैं। अगर फिजिकल चेकअप जरूरी हो, तो बीमा कंपनियां आपके मौजूदा देश में ही इसकी व्यवस्था कर देती हैं, या फिर आप भारत आने पर इसे पूरा कर सकते हैं।