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अब Form 12B की जगह Form 122, नौकरी बदलने वाले ध्यान रखें; वरना कट जाएगा टैक्स

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एक्सपर्ट के मुताबिक, नौकरी बदलने पर अब फॉर्म 122 जमा करना जरूरी है। पुरानी सैलरी की जानकारी न देने पर टैक्स की पेनल्टी और ब्याज का भारी नुकसान हो सकता है

Last Updated- May 05, 2026 | 4:39 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नौकरी बदलना प्रोफेशनल लाइफ का एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन यह अपने साथ टैक्स की कुछ मुश्किल जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। अक्सर लोग नई कंपनी में सैलरी और नए काम पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पुराने ऑफिस के ‘टैक्स रिकॉर्ड’ को ले जाना भूल जाते हैं। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के बाद अब नियम और भी स्पष्ट व सख्त हो गए हैं। अब पुराने ‘फॉर्म 12B’ की जगह ‘फॉर्म 122’ ने ले ली है, जिसे जमा करना हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जिसने साल के बीच में नौकरी बदली है।

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट CA चांदनी आनंदन कहती हैं कि नए नियमों में यह जरूरी है कि आपका टैक्स हिसाब बिल्कुल साफ और पारदर्शी रहे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि फॉर्म 122 आपकी फाइनेंशियल हेल्थ के लिए क्यों जरूरी है।

क्या है नया फॉर्म 122 और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

जब आप एक वित्त वर्ष (अप्रैल से मार्च) के दौरान अपनी पुरानी कंपनी छोड़कर नई कंपनी जॉइन करते हैं, तो आपकी आय के दो सोर्स हो जाते हैं। पुराने नियमों में फॉर्म 12B और 12BAA का उपयोग होता था, लेकिन अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत इन्हें फॉर्म 122 में डाल दिया गया है।

चांदनी आनंदन बताती हैं, “यह फॉर्म एक ‘कंसोलिडेटेड डिक्लेरेशन’ है। इसके जरिए आप अपनी नई कंपनी को यह बताते हैं कि पिछले महीनों में आपने कितना कमाया और उस पर कितना टैक्स पहले ही कट चुका है। यह नई कंपनी के अकाउंट्स डिपार्टमेंट को आपकी कुल वार्षिक आय (Annual Income) का सटीक अनुमान लगाने में मदद करता है। यदि आप यह जानकारी शेयर नहीं करते हैं, तो नई कंपनी आपकी पुरानी कमाई को जीरो मानकर टैक्स कैलकुलेट करेगी, जो बाद में आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।”

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रिफंड की उम्मीद में कहीं लग न जाए ‘टैक्स’ का झटका

अक्सर कर्मचारियों को लगता है कि टैक्स की चिंता रिटर्न फाइल करते वक्त की जाएगी, लेकिन यह सोच आपके बैंक बैलेंस को नुकसान पहुंचा सकती है। आनंदन बताती हैं, “अगर आपने फॉर्म 122 जमा नहीं किया, तो नया एम्प्लॉयर केवल मौजूदा जॉब की सैलरी पर TDS काटेगा। चूंकि टैक्स स्लैब प्रोग्रेसिव होते हैं (यानी आय बढ़ने के साथ टैक्स की दर बढ़ती है), इसलिए आपकी कुल आय पर लगने वाला टैक्स आपके द्वारा चुकाए गए TDS से कहीं ज्यादा हो सकता है।”

आनंदन के मुताबिक, इस स्थिति में, साल के अंत में आपको रिफंड मिलने के बजाय भारी-भरकम टैक्स चुकाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, यदि आपका कुल बकाया टैक्स 10,000 रुपये से अधिक है, तो आप पर एडवांस टैक्स न चुकाने की पेनल्टी भी लग सकती है। यह इनकम टैक्स लॉ के सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज के रूप में वसूली जाती है। इसलिए, समय पर फॉर्म 122 जमा करना केवल एक कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि एक बड़ी समस्या से छुटकारा है।

स्विचिंग के दौरान होने वाली 4 बड़ी गलतियां

चांदनी आनंदन ने उन सामान्य गलतियों के बारे में भी बात किया है जो अक्सर कर्मचारी अनजाने में कर देते हैं:

  • छूट का दोहरा लाभ: स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) का लाभ साल में केवल एक बार मिलता है। जानकारी के अभाव में पुरानी और नई दोनों कंपनियां आपको यह छूट दे देती हैं। रिटर्न भरते समय जब डेटा सिंक होता है, तो आपको अचानक 50,000 रुपये या उससे अधिक की आय पर अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है।
  • टैक्स स्लैब का गलत आंकलन: नई कंपनी आपको एक ‘फ्रेश एम्प्लॉई’ मानकर शुरुआती टैक्स-फ्री लिमिट का फायदा दे सकती है। जबकि हकीकत में आप उस लिमिट का फायदा पिछली कंपनी में ले चुके होते हैं।
  • पुराने फॉर्म 16 को नजरअंदाज करना: कई लोग पिछली कंपनी से फॉर्म 16 या सैलरी सर्टिफिकेट लेना भूल जाते हैं। इसके बिना फॉर्म 122 भरना और सही डेटा देना नामुमकिन हो जाता है।
  • निवेश की घोषणा में देरी: 80C या अन्य निवेशों की जानकारी नई कंपनी को समय पर न देने से आपका TDS ज्यादा कटने लगता है, जिससे महीने की ‘इन-हैंड सैलरी’ कम हो जाती है।

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अगर डेडलाइन निकल गई है तो क्या करें?

अगर आप नई कंपनी जॉइन कर चुके हैं और फॉर्म 122 जमा करना भूल गए हैं, तो भी स्थिति को संभाला जा सकता है। चांदनी आनंदन सलाह देती हैं कि सबसे पहले अपनी पुरानी कंपनी से ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट की स्लिप लें। इसमें आपकी ग्रॉस सैलरी और कटे हुए TDS का पूरा हिसाब-किताब होता है।

आनंदन के मुताबिक, भले ही आप इसे ऑफिस में जमा न कर पाएं हों, लेकिन अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय दोनों कंपनियों के फॉर्म 16 को साथ रखें। अपनी कुल आय को खुद जोड़ें और देखें कि क्या TDS कम कटा है। यदि हां, तो रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख का इंतजार न करें। बकाया राशि को ‘सेल्फ-असेसमेंट टैक्स’ के रूप में तुरंत जमा करें। इससे आप सेक्शन 234B के तहत लगने वाले मासिक 1% ब्याज से बच पाएंगे।

कुल मिलाकर, नए इनकम टैक्स नियमों के दौर में अब डेटा को लेकर नियम काफी सख्त और सटीक हो गए हैं। इसलिए फॉर्म 122 को बोझ समझने के बजाय अपनी टैक्स प्लानिंग का हिस्सा बनाएं, ताकि नौकरी बदलने की खुशी के बीच टैक्स नोटिस आकर मूड खराब न करे।

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First Published - May 5, 2026 | 4:30 PM IST

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