टैक्स प्लानिंग के दौरान HUF यानी हिंदू अविभाजित परिवार का विकल्प अक्सर सामने आता है। आयकर कानून के तहत HUF को एक अलग कानूनी और टैक्स इकाई का दर्जा मिला हुआ है। इसका अपना PAN होता है, यह अलग से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करता है और इस पर वही टैक्स स्लैब लागू होते हैं जो किसी व्यक्ति पर लागू होते हैं। यही वजह है कि इसे टैक्स बचाने के एक प्रभावी तरीके के रूप में देखा जाता है।
आय को बांटकर मिलता है टैक्स फायदा
HUF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि परिवार अपनी आय को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकता है। एक हिस्सा व्यक्ति के नाम पर और दूसरा HUF के नाम पर दिखाया जा सकता है। इससे दोनों को अलग-अलग बेसिक टैक्स छूट का लाभ मिलता है और कुल टैक्स देनदारी कम हो सकती है।
HUF कब बनता है और कैसे शुरू करें?
HUF आमतौर पर शादी के बाद अपने आप बन जाता है। इसमें पति, पत्नी, बच्चे और आगे की पीढ़ियां शामिल होती हैं। हालांकि, इसे सही तरीके से चलाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होते हैं। इसके लिए HUF डीड तैयार करनी होती है, HUF के नाम पर PAN बनवाना होता है और एक अलग बैंक खाता खोलना जरूरी होता है।
एक्सपर्ट की राय
1 फाइनेंस में टैक्स हेड, सीए पराग जैन ने कहा कि HUF को लोग अक्सर सही तरीके से समझ नहीं पाते। उनके अनुसार HUF एक अलग टैक्सपेयर की तरह काम करता है, इसलिए सही प्लानिंग के जरिए परिवार अपनी आय को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है और टैक्स बचत का फायदा उठा सकता है।
कौन बना सकता है HUF?
HUF बनाने का अधिकार केवल हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों को होता है। मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय इस व्यवस्था के तहत HUF नहीं बना सकते।
Karta की भूमिका क्यों है अहम?
HUF का संचालन Karta करता है, जो परिवार का मुखिया होता है। आमतौर पर यह सबसे वरिष्ठ सदस्य होता है और यह पुरुष या महिला दोनों हो सकते हैं। HUF से जुड़े सभी जरूरी फैसले Karta ही लेता है, जैसे टैक्स रिटर्न भरना, बैंक अकाउंट चलाना और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना। यदि Karta सक्रिय नहीं है, तो HUF का संचालन प्रभावित हो सकता है। जरूरत पड़ने पर HUF के कर्ज की जिम्मेदारी भी Karta पर आ सकती है।
क्या सैलरी HUF में ट्रांसफर हो सकती है?
कानून के अनुसार सैलरी व्यक्ति की निजी आय होती है, इसलिए इसे HUF में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति या निवेश HUF के नाम कर सकता है। इसके बाद उस संपत्ति से होने वाली आय, जैसे किराया, ब्याज या निवेश से कमाई, HUF की आय मानी जाती है और उसी के नाम पर टैक्स लगाया जाता है। यही तरीका टैक्स प्लानिंग में मदद करता है।
जरूरी बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं
पराग जैन ने बताया कि HUF को सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता। नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की जो टैक्स राहत दी जाती है, वह केवल व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है। HUF इस छूट के लिए पात्र नहीं होता, चाहे उसकी आय कितनी भी हो।